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गढ़वा:उपायुक्त की अध्यक्षता में दिव्यांग बच्चे को विद्यालय में नामांकन कराने हेतु ‘विशेष नामांकन अभियान’ संचालित करने संबंधी बैठक का आयोज।

दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के मुख्यधारा में जोड़ने हेतु 15 जून से 24 जून तक चलेगा विशेष नामांकन अभियान।
विशेष नामांकन अभियान के सफल संचालन हेतु प्रचार-प्रसार के विभिन्न माध्यमों से व्यापक जनजागरूकता फैलाने की अपील।

RKTV NEWS/गढ़वा (झारखंड)17 जून।दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विद्यालय में नामांकन कराने को लेकर ‘विशेष नामांकन अभियान’ संचालित कराने हेतु उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य रूप से जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज, सिविल सर्जन जेएफ कैनेडी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी पंकज कुमार गिरी एवं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अर्चना सिन्हा समेत शिक्षा विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थें।

इस दौरान बैठक का मुख्य उद्देश्य बताते हुए कहा गया कि जिले के हर एक दिव्यांग बच्चों तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित कराते हुए उन्हें विद्यालयी शिक्षा प्रदान करना है। यह सुनिश्चित करना कि कोई भी विद्यालय किसी भी बच्चे को उसकी दिव्यांगता के आधार पर प्रवेश देने से मना न करें।

उपायुक्त श्री मिश्रा द्वारा दिव्यांग बच्चे को विद्यालय में नामांकन कराने हेतु चलाए जा रहे ‘विशेष नामांकन अभियान’ को लेकर विशेष दिशा निर्देश दिए गए। विशेष नामांकन अभियान 15 जून से 24 जून तक निर्धारित किए गए हैं। इसके लिए विभिन्न तिथियों में कई गतिविधियां शामिल है, जिसके क्रियान्वयन हेतु संबंधित पदाधिकारियों को जिला स्तर, प्रखंड स्तर एवं विद्यालय स्तर पर नामांकन अभियान से संबंधित तिथि वार गतिविधियों को जिम्मेदारी पूर्वक निर्वह्न करने एवं अभियान को सफल बनाने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि दिव्यांगता को लेकर समाज में फैली गलत भ्रान्तियों को खत्म करना है तथा अभिभावकों को प्रेरित करना कि दिव्यांग बच्चे भी शिक्षा ग्रहण कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। इसके लिए विशेष नामांकन अभियान का व्यापक प्रचार प्रसार करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रचार प्रसार सामग्री में स्पष्ट रूप से यह अंकित होना चाहिए कि आपके घर और पास पड़ोस में कोई भी दिव्यांग बच्चा यदि हो, जिसकी उम्र 3 से 18 साल हो तो उस बच्चे के घर से नजदीकी विद्यालय में उसका नामांकन करायें।

इस संदर्भ में लोगों के बीच जन जागरूकता फैलाने हेतु अभियान का प्रचार प्रसार समाचार पत्रों, होर्डिंग, पोस्टर, पंपलेट एवं सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए यह बताने का निदेश दिया कि विद्यालयों में नामांकित दिव्यांग बच्चों को सरकार/समग्र शिक्षा अभियान द्वारा विभिन्न नि:शुल्क सुविधाओं जैसे कि व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र, ब्रेल किट्स, स्काउट भत्ता, परिवहन भत्ता आदि दी जाती है।

उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में यह आवश्यक है कि कोई भी दिव्यांग बच्चा विद्यालयी शिक्षा से वंचित न रहे।

बैठक के दौरान जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा बताया गया कि दिव्यांग बच्चों (CWSN- Children With Special Needs) को विद्यालय में नामांकन, उपस्थिति एवं शैक्षणिक सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु समग्र शिक्षा के अंतर्गत विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं। यू-डायस प्लस 2025-26 के आँकड़ों के अनुसार जिले के विभिन्न विद्यालयों में नामांकित 3-18 आयुवर्ग के कुल 317942 बच्चों में से मात्र 1609 दिव्यांग बच्चे ही नामांकित हैं, जो औसतन कम संख्या है। जिले में बड़ी संख्या में दिव्यांग बच्चे विद्यालय से बाहर हैं।

जिले के प्रत्येक विद्यालय में दिनांक 15.04.2026 से 30.04 2026 तक प्रत्येक अनामांकित बच्चों को विद्यालय की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु एक विशेष अभियान “स्कूल रूआर- 2026” का आयोजन किया गया था। बावजूद सभी छीजित एवं अनामांकित बच्चों का विद्यालयों में नामांकन नहीं हो पाया है।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विद्यालय से बाहर दिव्यांग बच्चों को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने हेतु एक “विशेष नामांकन अभियान” दिनांक 15.06. 2026 से 24.06.2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

जिला शिक्षा अधीक्षक ने जिले का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 6 से 18 वर्ष के दिव्यांग बच्चों को DAHAR 2.0 पोर्टल से चिन्हित किया गया है, जिसमें OOSC (Out-of-School Children) एवं CWSN (Children With Special Needs) के कुल 81 बच्चें चिन्हित हैं, जिनमें होम बेस्ड एजुकेशन के 09 बच्चें चिन्हित हैं।

उपायुक्त श्री मिश्रा द्वारा निर्देशित किया गया कि प्रत्येक विद्यालय अपने पोषक क्षेत्र में डहर पोर्टल के माध्यम से कराए गए सर्वेक्षण के आंकड़ों को संपुष्ट कर लें कि उनके पोषक क्षेत्र के सभी 6 से 18 वर्ष के दिव्यांग बच्चों का नाम सर्वेक्षण में दर्ज हो चुका है। यदि किसी बच्चे का नाम दर्ज नहीं है तो उन बच्चों का सर्वेक्षण में नाम दर्ज अवश्य कर लें।

बैठक के दौरान यह संकल्प लिया गया कि कोई भी दिव्यांग बच्चा ना छूटे। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि दिव्यांग बच्चों को उनके शिक्षा के अधिकार और ससम्मान जीवन जीने का अवसर देने का एक मानवीय प्रयास है।

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