
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)05 जून।कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी पटना के संयुक्त तत्वावधान में “खेत बचाओ अभियान” अंतर्गत हेमतपुर एवं सिंहीतला गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक बनाना था। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित उपयोग किया जा रहा है, जिसके कारण मिट्टी की उर्वराशक्ति एवं जैविक गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। किसानों मृदा परीक्षण पर उर्वरकों का प्रयोग करे और संतुलित पोषण प्रबंधन अपनावे।आईसीएआर-आरसीईआर, वैज्ञानिक डॉ. सौरभ कुमार ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग पर विस्तार से बताया कि नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी उचित मात्रा में प्रयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण प्रबंधन से न केवल फसल उत्पादन बढ़ता है बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य भी लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।उन्होंने किसानों को फसल चक्र में हरी खाद को शामिल करने की सलाह दी।
कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर के वैज्ञानिक डॉ. विकाश सिंह ने बताया कि राइजोबियम, एजोटोबैक्टर, एजोस्पिरिलम तथा फास्फेट घुलनशील जीवाणु जैसे जैव उर्वरक रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता को कम करने में सहायक होते हैं। इनके प्रयोग से उत्पादन लागत में कमी आती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। डॉ.अनिल कुमार यादव ने वर्मी कम्पोस्टिंग की तकनीक एवं इसके लाभों पर विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया तथा “खेत बचाओ अभियान” के तहत संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद, जैव उर्वरकों एवं वर्मी कम्पोस्ट के प्रयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
