
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)21 जुलाई।आरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुदामा प्रसाद ने आज लोकसभा में शून्यकाल के दौरान शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की नियमावली में किए गए संशोधन से उत्पन्न गंभीर समस्या का मुद्दा उठाया।
सासंद सुदामा प्रसाद ने कहा कि 2011 से पूर्व नियुक्त लाखों शिक्षक-शिक्षिकाओं पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता लागू किए जाने से वे गंभीर असुरक्षा और मानसिक तनाव की स्थिति में हैं।
उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय हुई थी, जब नियुक्ति के लिए TET की कोई अनिवार्यता नहीं थी। वर्षों बाद नियमों में बदलाव कर उन्हें TET उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य करना प्राकृतिक न्याय तथा सेवा शर्तों की स्थिरता के सिद्धांत के विपरीत है।
सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि इस निर्णय से लाखों शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं उनके परिवारों के समक्ष आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की नियमावली में आवश्यक संशोधन अथवा उपयुक्त विधायी/अध्यादेशीय प्रावधान कर 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को TET की अनिवार्यता से तत्काल छूट प्रदान की जाए तथा उनके सेवा अधिकारों और रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सांसद ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ उन शिक्षकों के हितों की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है, जिन्होंने वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दी हैं।
उक्त आशय की सासंद सुदामा प्रसाद के निजी सहायक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी जानकारी।
