
शाहपुर/भोजपुर (राकेश मंगल सिन्हा) 21 जुलाई। बिहार सरकार द्वारा सूबे के 551 विद्यालयों का नाम सरस्वती विद्या निकेतन कर दिए जाने का विरोध करते हुए राजद के पूर्व विधायक राहुल तिवारी उर्फ मंटू तिवारी ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने समाज और देश को शिक्षित करने के लिए महंगी जमीन दान की। उन्होंने कहा कि विद्यालयों से दानदाता का नाम हटाना या नीचे करना पूर्वजों और उनके वंशजों के साथ अपराध और अन्याय करना है। उन्होंने इसका पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि क्या हमारे पूर्वज इतने बेवकूफ थे कि नाम बदलने के लिए इतनी महंगी जमीन और विद्यालय दान किये थे। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार मे दान किए हुए विद्यालय ही चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरि नारायण प्लस टू उच्च विद्यालय का नाम वही रहना चाहिए। उनके नाम के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। अगर सरकार सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) बनना चाहती है तो नये विद्यालय बनाये। बढ़ते हुए जनसंख्या के हिसाब से नये विद्यालयों की जरूरत भी है। उन्होंने इसे शिक्षा का भगवाकरण करने की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि सरकार पंचायत सरकार भवन मे ही नये विद्यालय बना दे। उन्होंने कहा कि पुराने विद्यालयों के दान दाताओं के नाम के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि सरकार हमारे पूर्वजों और दानदाताके नाम को मिटाना चाहती है। यह हमारे पूर्वजों और उनके वंशजों का अपमान है।
