
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद) 1 जून। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय भोपाल द्वारा पंडित दीनदयाल पुरातत्व संस्थान नई दिल्ली के सहयोग से 1 जून 2026 को पुरातत्व में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीए) के 15 विद्यार्थियों हेतु 4 दिवसीय संग्रहालय विज्ञान (म्यूज़ियोलॉजी) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को संग्रहालयीय कार्यप्रणाली, संग्रह प्रबंधन, प्रदर्शनी तकनीक, संरक्षण, प्रलेखन तथा सामुदायिक सहभागिता से संबंधित व्यावहारिक अनुभव एवं व्यापक समझ प्रदान करना है।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. टी. अरुण राज, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, (ASI)भोपाल ने की। कार्यक्रम में डॉ. शिवकांत बाजपेयी, अधीक्षण पुरातत्वविद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल परिमंडल, मध्य प्रदेश तथा डॉ. मनोज कुमार कुर्मी, अधीक्षण पुरातत्वविद्, टेम्पल सर्वे ऑफ इंडिया, भोपाल, तथा डॉ पी शंकर राव, प्रशासनिक अधिकारी मानव संग्रहालय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रारम्भ संग्रहालय सहायक सुकन्या गुहा नियोगी के परिचयात्मक वक्तव्य से हुआ। इसके पश्चात अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया गया।
प्रतिभागियों एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ. पी. शंकर राव, सहायक क्यूरेटर, मानव संग्रहालय ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया तथा उपस्थित गणमान्य अतिथियों का परिचय कराया। अपने संबोधन में उन्होंने विरासत एवं संग्रहालय क्षेत्र के भावी पेशेवरों की दक्षता विकसित करने में इस प्रकार की शैक्षणिक सहभागिताओं के महत्व पर प्रकाश डाला।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. शिवकांत बाजपेयी ने विद्यार्थियों को इस प्रशिक्षण अवसर का पूर्ण लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया तथा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं व्याख्या में संग्रहालयों एवं पुरातात्त्विक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को विरासत प्रबंधन एवं संग्रहालयीय कार्यप्रणाली की गहन समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
अपने उद्बोधन में डॉ. मनोज कुमार कुर्मी ने पुरातात्त्विक विरासत, संरक्षण तथा सांस्कृतिक संसाधनों के संरक्षण में प्रशिक्षित पेशेवरों की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों से जिज्ञासा, समर्पण एवं सीखने की भावना के साथ प्रशिक्षण में सहभागिता करने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. टी. अरुण राज ने संग्रहालय विज्ञान को एक बहुविषयी अध्ययन क्षेत्र बताते हुए इसकी भूमिका को विरासत, शिक्षा, अनुसंधान तथा जनसहभागिता के मध्य सेतु के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने तथा संग्रहालय एवं विरासत संस्थानों में करियर निर्माण हेतु आवश्यक पेशेवर कौशल विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
उद्घाटन सत्र के पश्चात प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम शैक्षणिक सत्र में सुश्री आयशा गराबडू द्वारा “संग्रहालय विज्ञान, संग्रहालय अध्ययन एवं संग्रहालयों की भूमिका” विषय पर व्याख्यान दिया गया। इसके बाद संग्रहालय की अधिकारी डॉ. पी. अनुराधा ने “भारत में संग्रहालय आंदोलन” विषय पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। अपराह्न सत्र में रंजन चटर्जी ने भारतीय संग्रहालय, कोलकाता; राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली; सालारजंग संग्रहालय, हैदराबाद; बिहार संग्रहालय, पटना तथा प्रधानमंत्री संग्रहालय, नई दिल्ली के अध्ययन-प्रकरणों पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
उद्घाटन सत्र का समापन आयशा गराबडू, संग्रहालय सहयोगी,द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथियों, प्रतिभागियों, संकाय सदस्यों एवं कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के सफल एवं ज्ञानवर्धक अनुभव की शुभकामनाएँ दीं।
मानव संग्रहालय के जन संपर्क अधिकारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने बताया कि,यह 4 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संग्रहालय विज्ञान, पुरातत्व, संरक्षण एवं विरासत प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के व्याख्यानों, व्यावहारिक सत्रों, क्षेत्राधारित शिक्षण गतिविधियों तथा संवादात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं, संग्रह भंडार, जनजातीय आवास परिसर एवं अन्य प्रदर्शनी स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा। साथ ही उन्हें मध्यप्रदेश के प्रमुख पुरातात्त्विक एवं सांस्कृतिक धरोहर स्थलों के अध्ययन का अवसर भी प्राप्त होगा, जिससे वे संग्रहालय एवं विरासत प्रबंधन के व्यावहारिक पक्षों को निकटता से समझ सकेंगे।
