अजूबा हिन्दी जागरण
बेटा भइले अँखफोर, मोछी पर पाम्हीं आइल;
बाबा बुझलें, बबुआ के देह गोटाइल, हमरो लाठी में ताकत आइल।
अपना पैर पर खड़ा भइले,
बबुआ के मेहरी से खूँट बन्धाइल;
गाँव छोड़ बंगलोरे गोइलन,
दुअरा दालान मुरदासी छाइल।
आइल खत, कहलन बाबा,
तू रहे के, खोता एक बनइह;
बाहर एक दालान बइठका,
भीतर एक चुहान बनइह।
सामने एक कुआँ खोदवा के,
लाठा कूड़ी तू लगवइह;
बाग-बगीचा से घेरवा के घरवा तू ही सजइह,
कुछ दिन बीतल, मिलल जवाब लेटर से,
हाउस कन्सट्रक्शन हो गोइल बा पूरा; तीन रूम के साथे, लैट्रिन,
किचेन और बाथ रूम में,
झरना झरता हरदम फुर-फुरा।
डाइनिंग टेबुल, टिक वुड के,
खाना वास्ते रखले बानी काटा छूरा; तोहरा के इन्भाइट बा, देखीह, इंतजाम बा फूल, की कुछुओ बा अधूरा।
माथा ठोक के बोललन बाबा,
कहाँ गोइल हिन्द से हिन्दी;
भारतेन्दु के सिर पर कइसे लागल,
ई इंगलिश के बिन्दी।
संस्कार पर पड़ल कफन,
दफन भइल सब नाता;
मंचे पर भाषण उगलाता,
पढ़ी प्रस्ताव अधाइल जाता।
मत अपनायीं ईगलिश शब्दन के अंखमूदा,
हिन्दी के कोश बढ़ावे खातिर;
राउर भाषा खखोरायी जइसे अर्थ के, खखोरे में डब्लूटीओ बा माहिर।


