
आरा/ भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)06 मई।बिहार राज्य के चक्की प्रखंड के धर्मावती नदी तट पर अवस्थित भरियार में आयोजित यज्ञ अन्तर्गत श्रीमद्भागवत कथा में पू जीयर स्वामी जी महाराज के कृपापात्र विश्वाचार्य ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज सप्तम् स्कंध की कथा का विस्तार देते हुए भक्त प्रह्लाद चरित्र कहते हुए कहा कि कोई जरूरी नहीं की सज्जन कुल में सज्जन और दुर्जन कुल में दुर्जन का ही जन्म हो।इस सिद्धांत की पूष्टि में उन्होंने कहा कि कश्यप दीप्ति कुल में हिरण्याक्ष हिरण्यकशिपु और हिरण्यकशिपु कयाधू कुल में भक्त प्रह्लाद का जन्म होता है।मतलब माता दीति कीअसावधानी असंयम के कारण राक्षस और कयाधू की सावधानी संयम के कारण भक्त प्रह्लाद का अवतरण होता है।प्रह्लाद पर नारायण की कृपाकटाक्ष की कथा इस बात का प्रमाण है कि भगवान की कृपा किसी पर भी हो सकता है,बस शर्त इतना ही है उसमें भक्ति होनी चाहिए।भगवान की दया सभी जीवों पर बराबर होती है।जो याद करता है उस पर दया होती है , अर्थात जीव को याद करने में भले देर हो ,पर भगवान को दया करने में देर नहीं होती।कर्म का भोग भोगना ही पड़ता है और सत्संग पून्य फल बिन मांगे मिलता ।इस कथन की पूष्टि में श्रीमद्भागवत के अष्टम स्कंध में वर्णित गजेंद्र मोक्ष की की कथा कहीं। आचार्य जी ने कहा किसी भी स्थिति में संत का अपमान अवज्ञा नहीं होनी चाहिए।
