मानदेय बढ़ोतरी और सम्मान से सशक्त हुए 376 शिक्षामित्र, बागपत में गूंजा शिक्षा को मजबूत बनाने का संकल्प।

मानदेय वृद्धि से शिक्षा को मिली नई ऊर्जा, बच्चों के सपनों को मिलेगा नया आधार।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अच्छे संस्कार ही एक मजबूत समाज और राष्ट्र की नींव रखते हैं।
RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)05 मई। कलेक्ट्रेट लोक मंच पर मंगलवार सुबह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने न केवल शिक्षामित्रों के चेहरे पर मुस्कान लाई, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में नई ऊर्जा भर दी। योगीराज बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र गोरखपुर में शिक्षामित्र की मानदेय बढ़ोतरी के उपलक्ष में शिक्षामित्र सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 143000 शिक्षामित्र कार्यरत है जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्र को सांकेतिक चेक देकर सम्मानित किया और उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं नीतियों के बारे में प्रकाश डाला और उन्होंने अनुभवी शिक्षकों की प्रशंसा भी की इसी के क्रम में कार्यक्रम का सजीव प्रसारण जनपद बागपत में कलेक्ट्रेट लोक मंच पर उत्तर प्रदेश सरकार के वन एवं पर्यावरण जंतु उद्यान माननीय राज्य मंत्री केपी मलिक मुख्य अतिथि की उपस्थिति में गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम का सजीव प्रसारण कलेक्ट्रेट लोकमंच पर देखा गया उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया जब मंच से एक-एक कर शिक्षामित्रों को सम्मानित किया गया और उनके हाथों में बढ़े हुए मानदेय का प्रतीकात्मक चेक सौंपा गया, तो वर्षों के संघर्ष, समर्पण और सेवा को मानो एक नई पहचान मिल गई। यह अवसर था “शिक्षामित्र सम्मान एवं बढ़ा हुआ मानदेय वितरण समारोह” का, जहाँ शिक्षा के इन आधार स्तंभों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मंत्री ने शिक्षामित्रों का सम्मान करते हुए उन्हें बधाई दी। इस दौरान उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन का सजीव प्रसारण भी किया गया, जिसे उपस्थित सभी लोगों ने उत्साह के साथ देखा और सुना।
इस समारोह की सबसे खास बात रही वह बदलाव, जिसने शिक्षामित्रों के जीवन को नई दिशा दी है। एक समय था जब शिक्षामित्रों को ₹3500 मानदेय मिलता था, फिर वर्ष 2017 में यह बढ़कर ₹10,000 हुआ और अब इसे बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह कर दिया गया है। यह केवल आंकड़ों का बदलाव नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास का विस्तार है। यह उस समर्पण की स्वीकृति है, जो शिक्षामित्र वर्षों से गांव-गांव में बच्चों को शिक्षित करने में लगा रहे हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय राज्य मंत्री केपी मलिक ने कहा कि “गुरुओं का सम्मान और बड़ों का आशीर्वाद ही एक अच्छे राष्ट्र की नींव रखता है। शिक्षक ही वह शक्ति है, जो समाज को सही दिशा देती है और बच्चों के भविष्य को संवारती है।” उन्होंने कहा कि यह मानदेय वृद्धि केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि शिक्षामित्रों के प्रति सरकार के विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने शिक्षामित्रों से अपील की कि वे बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और सही मार्गदर्शन भी दें। समारोह में सम्मान प्राप्त करते समय कई शिक्षामित्रों की आंखें नम हो गईं। तालियों की गूंज के बीच जब उन्हें डमी चेक प्रदान किया गया, तो उनके चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। बड़ौत विकासखंड से नीलू, बागपत विकासखंड से राजेश, बिजेंद्र भाटी, मेनका, खेकड़ा विकासखंड से निष्ठा, प्रियंका, सुनीता, बिनोली विकासखंड से अनुराधा, रविन्द्र कुमार, कपिल भारद्वाज, पिलाना विकासखंड से देवेंद्र, अरुण, अलका और छपरौली विकासखंड से मंजू, प्रवेश, गुड्डन तोमर सहित कुल 376 शिक्षामित्रों को सम्मानित किया गया जिनके खाते में 18000 रुपए का मानदेय बढ़ाकर पहुंचा है। इन सभी ने सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
कार्यक्रम में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि शिक्षामित्र केवल शिक्षक नहीं, बल्कि समाज के निर्माणकर्ता हैं। उनके प्रयासों से विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो रही है और बच्चों के सपने साकार हो रहे हैं। सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का लाभ अब विद्यालयों तक पहुंच रहा है, जिससे बच्चों को बेहतर वातावरण और अवसर मिल रहे हैं। मानदेय वृद्धि से शिक्षामित्र और अधिक उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे। मंच से यह संदेश भी दिया गया कि “सामाजिक शिक्षा से ही राष्ट्र का वास्तविक उदय संभव है।” जब बच्चे अच्छे संस्कार और शिक्षा के साथ आगे बढ़ते हैं, तो समाज अपने आप सशक्त होता है। शिक्षक ही वह माध्यम हैं, जो बच्चों को सही और गलत का अंतर सिखाते हैं और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया गया। राज्य मंत्री ने कहा कि “प्रकृति को बेहतर बनाने के लिए हमें अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए। पौधे हमें जीवन देते हैं, इसलिए उनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने सभी से अपील की कि वे शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति भी जागरूक रहें और अपने आसपास हरियाली बढ़ाने में योगदान दें। शिक्षामित्रों के मानदेय में यह वृद्धि उनके मनोबल को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। अब वे आर्थिक रूप से अधिक सक्षम होंगे और अपने कार्य में पूरी निष्ठा के साथ योगदान दे सकेंगे। सरकार शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और शिक्षकों को उनका उचित सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
जनपद में वर्तमान में 376 शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जबकि पूरे प्रदेश में लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्र शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने में लगे हैं। मानदेय वृद्धि से उनका मनोबल बढ़ेगा और वे और अधिक उत्साह के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
इस अवसर पर स्कूल बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया। मंत्री ने निपुण शिक्षा बच्चों को कैसे सिखाया जाए संबंधित बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए स्टेला का भी अवलोकन किया और उन्होंने कहा कि पेरेंट्स मीटिंग में भी इस चीज की जानकारी दी जानी चाहिए कि बच्चों को अच्छे उदाहरण से कैसे समझाया जा सकता है बच्चों द्वारा बनाई गई चित्रकला को देखकर मंत्री ने प्रशंसा की।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अच्छे संस्कार ही एक मजबूत समाज और राष्ट्र की नींव रखते हैं।
इस अवसर पर जिलाधिकारी अस्मिता लाल ,अपर जिलाधिकारी विनीत कुमार उपाध्याय ,जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गीता चौधरी, वरिष्ठ कोषाधिकारी मनीष कुमार सिंह ,अधिशासी अधिकारी के के भड़ाना सहित समस्त खंड विकास अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

