
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)02 मई।अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस के अवसर पर स्थानीय मानसरोवर कालोनी अस्पताल रोड स्थित सावित्री श्याम संगीत महाविद्यालय सभागार में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।अतिथियों द्वारा मां सरस्वती और संगीत मार्तण्ड शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू ललन जी के तैल चित्र पर माल्यार्पण से किया गया। केंद्राधीक्षक कावेरी मोहन ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार और रंगकर्मी शमशाद ‘प्रेम’ ने कहा कि नृत्य केवल शरीर की हलचल नहीं, बल्कि आत्मा की वह गहराई है जहां शब्द मौन हो जाते हैं और भावनाएं थिरकने लगती हैं। यह वह सार्वभौमिक भाषा है, जो बिना कुछ कहे ही प्रेम, विरह, भक्ति और उल्लास जैसे जटिल भावों को सीधे हृदय तक पहुंचा देती है। सदियों से नृत्य को ईश्वर की आराधना और स्वयं को खोजने का साधन माना गया है।
सर्वप्रथम रंगी साड़ी गुलाबी चुनरिया… पर इशिका, श्रव्या श्रेष्ठ एवं समृद्धि सिंह ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी। तत्पश्चात् असीमिता मुखर्जी, आविशी मिश्रा, वंशिका, आराध्या अदिति, निहालिका और मेनिका ने तीनताल में कथक की आकर्षक प्रस्तुति दी। लहरा पर संयोगिता व तबले पर संगत बबिता कुमारी थीं, जबकि बोल पढ़त आकर्षि ने किया। कार्यक्रम के अंत में लोकनृत्य – लाली रे लाली चुनरिया…की प्रस्तुति हुई, जिसे इशिका, श्रव्या, नंदिनी और आकर्षि ने प्रस्तुत किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डब्लू कुमार ने किया।
