
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)30 अप्रैल।वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा में स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ दिवाकर पाण्डेय के सौजन्य से उपर्युक्त विषय पर 68छात्र -छात्राओं के बीच कवि -आलोचक जितेन्द्र कुमार ने सारगर्भित वक्तव्य रखा।मंच संचालन करते हुए विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ दिवाकर पाण्डेय ने जितेन्द्र कुमार का लेखकीय परिचय दिया और कहा कि ये वर्तमान में त्रैमासिक भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका के संपादक हैं। भोजपुरी आलोचना में इनकी सद्य : प्रकाशित पुस्तक “भोजपुरी उपन्यास आ देस “है।
जितेन्द्र कुमार ने सद्य : प्रकाशित विदेशी उपन्यासों में केन्याई मूल के उपन्यासकार नोबेल पुरस्कार प्राप्त (2021)अब्दुलरज्जाक गुर्नाह के उपन्यास ‘आफटरलाईफ’और एशियाई मुल्क श्रीलंका के उपन्यासकार शहाना करुणा तिलके के उपन्यास ‘सेवेन मुन्स ऑफ माली अलमीडा ‘की विशेष चर्चा की।
हिन्दी उपन्यासों में संतोष दीक्षित के उपन्यास ‘ख़लल’, अवधेश प्रीत के उपन्यास ‘रूई लपेटी आग ‘, गीतांजलि श्री के उपन्यास ‘रेत समाधि ‘, हृषीकेश सुलभ के उपन्यास ‘दातापीर’और’ जूठी गली ‘के कथानक और विषय वस्तु पर प्रकाश डाला।
जितेन्द्र कुमार ने कहा कि भोजपुरी उपन्यास लेखन का प्रारंभ बहुत शानदार है। सन् 1956में रामनाथ पाण्डेय के उपन्यास ‘बिंदिया’ को भोजपुरी का पहला उपन्यास होने का गौरव प्राप्त है।इस उपन्यास की नायिका बिंदिया अपने विवाह के लिए अंधे पिता के आदेश का उल्लंघन करती है।वह लंपट युवक झमन से विवाह करने से इंकार करती है।
उन्होंने भोजपुरी के दूसरे उल्लेखनीय उपन्यास ‘फुलसुंघी’के कथानक की विशद विवेचना की और संगीतज्ञ महेंद्र मिसिर के मानवी चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने भोजपुरी के तीसरे उपन्यास “गंगा रतन विदेशी ‘के कथानक और कथाभूमि के फैलाव की विवेचना की।इस तरह भोजपुरी उपन्यास की विकास यात्रा ‘फुलसुंघी से लेकर ‘गंगा रतन विदेशी ‘तक को रेखांकित किया।
अंत में ‘भोजपुरी सम्मेलन पत्रिका ‘जनवरी-मार्च-2026, कार्यवाही विशेषांक का लोकार्पण विद्यार्थियों के बीच सम्पन्न हुआ।
