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रामगढ़ संघर्ष से सम्मान तकः गायत्री देवी की सफलता की कहानी।

RKTV NEWS/रामगढ़(झारखंड )29 अप्रैल।रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखण्ड के देववरिया गाँव की रहने वाली गायत्री देवी एक साधारण परिवार से थीं, जिनका जीवन अभावों और आर्थिक तंगी के बीच बीत रहा था। उनके पति मजदूरी करते थे, जिनकी आय इतनी कम थी कि घर का दैनिक खर्च चलाना भी एक बड़ी चुनौती थी। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनकी सही परवरिश करना गायत्री के लिए एक सपने जैसा था, क्योंकि बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ता था। घर की स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि गायत्री देवी ने हड़िया-दारू बेचने का काम शुरू कर दिया। हालांकि इससे कुछ पैसे तो मिल जाते थे, लेकिन इसकी कीमत उन्हें अपने आत्म-सम्मान से चुकानी पड़ती थी। शराब के नशे में आने वाले लोग अक्सर अभद्र भाषा का प्रयोग करते थे और समाज के लोग भी उन्हें हेय हीन भावना से देखते थे। एक महिला के लिए आर्थिक तंगी और सामाजिक तिरस्कार के बीच जीना मानसिक रूप से बहुत कष्टदायक था।
गायत्री देवी के जीवन में नया मोड़ दिसंबर 2017 को आया, जब झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के द्वारा दिनांक 7 दिसंबर 2017 को गठित ‘सखी शिव महिला समूह’ की सदस्यता ली, इस समूह से जुड़ने के बाद नियमित रूप से साप्ताहिक बैठकों में सामिल होने लगी और बचत भी करने लगी। समूह में जुड़ने से उन्हें न केवल वित्तीय सहायता की राह दिखी, बल्कि उनका खोया हुआ आत्मविश्वास भी वापस लौटने लगा। उन्होंने अपनी समस्याओं को समूह की ‘दीदियों’ के साथ साझा किया। वहाँ उन्हें आजीविका के नए और सम्मानजनक रास्तों के बारे में विस्तार से समझाया गया।
समूह के माध्यम से गायत्री देवी को चक्रीय निधि (RF) रूप में 2000 रूपया मिला जिसका उपयोग उन्होंने अपने दैनिक जरूरतों को पूरा करने में किया और समय पर वापस भी कर दिया। बाद में उन्हें समूह के दीदियों के माध्यम से फूलो झानो आशीर्वाद अभियान के बारे में पता चला जिसका उद्देश्य हड़िया दारू के व्यवसाय से जुड़े महिलाओं को एक सामानजनक व्यवसाय से जोड़ना है जिसके तहत 10000 से 50000 रुपया तक ऋण एक वर्ष के लिए ब्याज मुफ्त दी जाती है। इसी अभियान के तहत गायत्री देवी को 10,000 रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने तुरंत हड़िया-दारू बेचने का काम बंद कर दिया और इस राशी से चार बकरियां खरीदी और बकरी पालन का व्यवसाय शुरू किया। वर्तमान समय में उनके पास 10 से अधिक बकरियां है और वह अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए बकरी पालन से होने वाली आय का उपयोग कर बकरी पालन के साथ-साथ खेती-बाड़ी का भी काम शुरू किया। आज गायत्री देवी को बकरी पालन और खेती बाड़ी से वार्षिक आय लगभग 100000 रुपये तक हो जाती है। गायत्री देवी ने अपनी ऋण की राशी को भी समय से चूका दी।
इस सम्मानजनक काम मिलने से समाज का नजरिया भी उनके प्रति बदल गया। जो लोग पहले उन्हें तिरस्कार की नजर से देखते थे, अब वे उन्हें एक उद्यमी के रूप में सम्मान देने लगे।
आज गायत्री देवी एक गर्वित ‘सम्मान आजीविका’ सदस्य के रूप में पहचानी जाती हैं। वर्तमान में वह बकरी पालन और खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। अब उनके घर का खर्च आसानी से चल जाता है और अपने बच्चों की परवरिश और शिक्षा पर ध्यान दे पा रही हैं। उनकी जरूरतें अब बिना किसी के सामने हाथ फैलाए पूरी हो रही हैं। गायत्री देवी की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि किसी महिला को सही मार्गदर्शन और थोड़ा सा वित्तीय सहयोग मिले, तो वह न केवल अपने परिवार की किस्मत बदल सकती है, बल्कि समाज में अपने लिए एक ससम्मान स्थान भी बना सकती है।

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