
RKTV NEWS/औरंगाबाद ( बिहार)20 अप्रैल।आज जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद अभिलाषा शर्मा द्वारा “ज्ञान भारतम् मिशन” के अंतर्गत जिले में प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन कार्य की विस्तृत समीक्षा की गई। इस क्रम में ओबरा प्रखंड के बभनडीहा पंचायत में लगभग 1200 वर्ष प्राचीन सूफी संत हज़रत अब्दुल कादरी जिलानी र॰ह॰ द्वारा हस्तलिखित अमूल्य पाण्डुलिपि का निरीक्षण किया गया, जिसमें धर्म एवं नैतिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश संजोए गए हैं।
इसके साथ ही मुगल कालीन (जहाँगीर काल) की ऐतिहासिक धरोहर “तुरफ़ातुल फ़ुकुहा (फ़तवा मसूदिया)” — 1181 पृष्ठों की एक महत्वपूर्ण विधि-ग्रंथ — का भी अवलोकन किया गया। यह रचना क़ाज़ी सैयद मसूद महेज़ क़ादरी द्वारा लिखित है, जो उस समय की न्याय व्यवस्था और सामाजिक संरचना को दर्शाती है।
इसके अतिरिक्त अरबी-फ़ारसी भाषा में लिखित लगभग 16 दुर्लभ पांडुलिपियाँ—गद्य, पद्य, प्रार्थना, स्तुति एवं चिकित्सा विषयक—का भी निरीक्षण कर उनकी ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित किया गया।
ज्ञान भारतम् मिशन का उद्देश्य
75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेजों (कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र आदि) का डिजिटाइजेशन कर भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को संरक्षित करना है, ताकि भविष्य में शोध, अनुवाद और वैश्विक स्तर पर प्रसार संभव हो सके।
अब तक की उपलब्धि
जिले में लगभग 5000 पाण्डुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। विशेषज्ञ टीम द्वारा इनका भौतिक निरीक्षण कर संरक्षण एवं उपचार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे ये अमूल्य धरोहर
समय के साथ नष्ट न हों।
महत्वपूर्ण स्थलों की पहचान
दाउदनगर गुरुद्वारा, पातालगंगा मठ, देवकुंड मठ, अमझर शरीफ, मनौरा शरीफ, देव किला, सूर्य मंदिर, विभिन्न कॉलेज एवं पुस्तकालय जैसे अनेक ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को चिन्हित किया गया है।
जिला प्रशासन की अपील
यदि आपके पास 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी कोई पाण्डुलिपि या हस्तलिखित दस्तावेज है, तो उसे सुरक्षित रखने और डिजिटल रूप में संरक्षित कराने हेतु
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, औरंगाबाद
कुमार पप्पू राज (मो.: 7488153690) से संपर्क करें।
प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि पाण्डुलिपियाँ आपके स्वामित्व में ही सुरक्षित रहेंगी — केवल उनका डिजिटाइजेशन कर उन्हें संरक्षित किया जाएगा।
