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मुजफ्फरपुर:अभिभावकों को मिली बड़ी राहत: निजी स्कूल फीस पर आयुक्त का सख्त शिकंजा।

मनमानी पर लगेगा लगाम: आयुक्त के कड़े निर्देश से फीस व्यवस्था में आयेगी पारदर्शिता , तय होगी जवाबदेही तथा अभिभावक लेंगे राहत की सांस।
प्रमंडलीय आयुक्त ने सभी डीएम, डीईओ को पत्र निर्गत कर दिया कड़ा निर्देश।
निजी विद्यालयों के नियंत्रण, निरीक्षण एवं निगरानी की हुई कड़ी व्यवस्था।

RKTV NEWS/मुजफ्फरपुर(बिहार)08 अप्रैल।
तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह द्वारा निजी विद्यालयों में शुल्क निर्धारण एवं उसकी पारदर्शिता सुनिश्चित करने को लेकर महत्वपूर्ण पत्र जारी किया गया हैं। इसके माध्यम से बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2019 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल देते हुए प्रमंडल के सभी जिलाधिकारियों, जिला शिक्षा पदाधिकारियों तथा क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं। आयुक्त के इस कदम को अभिभावकों के हित में एक अहम पहल माना जा रहा है, जिससे निजी विद्यालयों की मनमानी पर अंकुश लग सकेगा।
आयुक्त ने कहा है कि बिहार सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सभी निजी विद्यालय—चाहे वे प्री-प्राइमरी, प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक या उच्च माध्यमिक स्तर के हों—उन्हें अपने शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया को अधिनियम के अनुरूप पारदर्शी बनाना अनिवार्य होगा। इसमें स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार, केंद्र सरकार अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा संचालित या सहायता प्राप्त विद्यालय इस दायरे में शामिल नहीं होंगे, जबकि निजी प्रबंधन वाले सभी विद्यालयों को इसका पालन करना होगा।
आयुक्त ने अपने पत्र में कहा है कि निजी विद्यालयों द्वारा प्रवेश शुल्क, पुनर्नामांकन शुल्क, विकास शुल्क, मासिक शुल्क, वार्षिक शुल्क सहित पुस्तकों, पाठ्य सामग्री, वर्दी एवं अन्य मदों में लिए जाने वाले शुल्क का निर्धारण निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। साथ ही इन सभी शुल्कों का विस्तृत विवरण विद्यालय के सूचना पट्ट एवं आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा, ताकि अभिभावकों को किसी प्रकार की असुविधा या भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसी भी विद्यालय द्वारा वार्षिक शुल्क में वृद्धि अधिकतम 7 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। यदि किसी विद्यालय को इससे अधिक शुल्क वृद्धि करनी हो, तो उसे विधिवत गठित शुल्क विनियमन समिति के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा। यह समिति प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित की जाएगी, जिसमें क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (सदस्य-सचिव), प्रमंडल मुख्यालय के जिला शिक्षा पदाधिकारी, संबंधित जिले के निजी विद्यालयों के प्रतिनिधि तथा अभिभावक प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समिति के समक्ष शुल्क वृद्धि से संबंधित प्रस्ताव शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने से कम से कम तीन माह पूर्व प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। समिति द्वारा प्रस्ताव का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार निर्णय लिया जाएगा। यह व्यवस्था इस उद्देश्य से लागू की जा रही है कि विद्यालय मनमाने तरीके से शुल्क वृद्धि न कर सकें और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि विद्यालयों द्वारा पुस्तकों, यूनिफॉर्म एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री की खरीद को लेकर किसी प्रकार की बाध्यता नहीं बनाई जाएगी। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे। यदि कोई विद्यालय किसी विशेष दुकान या विक्रेता से सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाता है, तो उसे दंडनीय कृत्य माना जाएगा और संबंधित विद्यालय के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने उल्लेख किया है कि अब तक कई विद्यालयों द्वारा शुल्क वृद्धि से संबंधित प्रस्ताव निर्धारित समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं, जिससे अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हो रहा है। आयुक्त ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिया है कि सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में निजी विद्यालयों द्वारा की गई शुल्क वृद्धि की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि वृद्धि निर्धारित सीमा के भीतर ही की गई है।
यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि किसी विद्यालय ने 7 प्रतिशत से अधिक की शुल्क वृद्धि की है या अधिनियम के अन्य प्रावधानों का उल्लंघन किया है, तो उसके विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें आर्थिक दंड, मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया या अन्य वैधानिक कदम शामिल हो सकते हैं।
आयुक्त ने जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों में एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करें, ताकि अभिभावक अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकें। इसके लिए कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा शिकायतों के त्वरित निष्पादन की व्यवस्था करने को कहा गया है। साथ ही इस व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक अभिभावक इसका लाभ उठा सकें।
इसके अतिरिक्त, संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। निरीक्षण के दौरान शुल्क संरचना, रसीद व्यवस्था, सूचना पट्ट एवं वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर विशेष जांच टीमों का गठन भी किया जा सकता है।
आयुक्त ने विशेष रूप से यह निर्देश दिया है कि सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी अपने-अपने जिलों से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन निर्धारित प्रपत्र में तैयार कर क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक के माध्यम से 15 अप्रैल 2026 को अपराह्न 4 बजे तक आयुक्त कार्यालय में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। इस प्रतिवेदन में प्रत्येक विद्यालय की शुल्क संरचना, वृद्धि का प्रतिशत, समिति के समक्ष प्रस्तुत प्रस्तावों की स्थिति तथा प्राप्त शिकायतों का विवरण शामिल होगा।
आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही या विलंब को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य निजी विद्यालयों में शुल्क को लेकर व्याप्त अनियमितताओं को समाप्त करना तथा अभिभावकों को राहत प्रदान करना है। अक्सर यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि निजी विद्यालय बिना किसी स्पष्ट आधार के शुल्क में वृद्धि कर देते हैं और अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं, जो अनुचित एवं अवैध है।
प्रमंडलीय आयुक्त द्वारा प्रदत्त निदेश के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अनुपालन के उपरांत निजी विद्यालयों में न केवल शुल्क संरचना में पारदर्शिता आयेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी आम नागरिकों का विश्वास बढ़ेगा।
समग्र रूप से, तिरहुत प्रमंडल में निजी विद्यालयों की शुल्क व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए आयुक्त द्वारा उठाया गया यह कदम एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल है। इससे शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही है और अभिभावकों को राहत मिलने की संभावना भी बढ़ी है।

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