स्वागत!
प्यार की पाँति जब से मिली है, बेचैन हुए जाता था,कब पास मिलेंगे सोच, सुख चैन नहीं आता था।
धन्य हुआ जब आये है,बेहोश हुआ मन है; है सुधि नहीं अब मुझको, और बिखरा हुआ बदन है।
तो छलकाओ कुछ प्यार,आज हम भी नहायेंगे; अपने गीले बदन को, तेरे किरणों में सुखायेंगे ।
आज अंधेरा तो छँट जायेगा, अमा पूनम में बदल जायेगा; आप आये हैं तो पतझड़,वसंत में बदल जायेगा।
इस पराग की खुशबू,मिठास क्या है बस तू ही जानो; हम तो अरमानों में छुपाये हैं, बस यही जानो ।
ऐ वसंत, ऐ प्यारे भौरे, तू तो केवल मेरे हो; हर अंग मेरा तो तेरा है,तू तो केवल मेरे हो।
मेरे पास अकिंचन जो है, सब कुछ ले लो;ये न कहना मिला नहीं कुछ, सब तेरा है, सब कुछ ले लो।
प्यार को इस तरह उड़ेला है आपने, कि तेरी बेहोशी में, मदहोश हुए जाता हूँ; अब और भी बटोर कुछ पाऊँगा, पता नहीं, क्योंकि अभी से गोता लगाये पाता हूँ।
अब तो हर काँटा भी, फूल नजर आते हैं, चुभने के बाद भी दर्द कहाँ; जब साथ आपको पाते हैं।
न खुशबू ही पहचान पाता, न मिठास का आभास ही होता; बीच इस कदर भूला कि, पहचान अपना नहीं होता।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की प पच्चीसवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

