परिवार नियोजन !
तू ऐसे चोच ना खोलो, कुछ कड़वी बात ना बोलो; मित्रों के सामने भी, इस तरह पोल ना खोलो।
तू नहाने के बहाने, रोज संगम मनाते रहो; दो से अधिक नहीं का, हमें नियोजन समझात रहो।
मित्र ने पुछा, यार ! लगता है कुछ फेरा है; टुभकी, हाँ इन्हें नियोजन का, हमें तो सात भवँर का फेरा है।
छोटा परिवार-सुखी परिवार, यह राज समझ जब आयी; मैंने नसबन्दी करायी, और जी पर आफत आयी।
सोचता हूँ बैठकर, पीछे दोस्त नहीं घर जाते; कुशल क्षेम बच्चों तक पुछते, अगर, राह कहीं मिल जाते।
ऑफिस में बैठता हूँ तो, दिन में सपने आते हैं;बाद बच्चों के जाने पर,क्यों दोस्त द्वार पर जाते हैं।
ऐसा कोई वैद्य बताता,पक्का बाँध यही नसबंदी, सभी कराते, धीरज बँधाता,टूट न पाता ये हदबंदी ।

(उक्त कविता ख्यातिप्राप्त लेखक,कवि,व्यंग्यकार,समीक्षक, अनुवादक “डॉ कृष्ण दयाल सिंह”जो एक अवकाश प्राप्त डाक सेवा अधिकारी भी है, उनके साहित्य काल के शुरूआती दौर में 09 फरवरी 1998 को प्रकाशित की गई कविता संग्रह पुस्तक “यत्र-तत्र”से ली गई है और यह कवि की उक्त संग्रह की चौबीसवीं रचना है। RKTV NEWS नित्य इनके संग्रहित पुस्तक से क्रमवार एक एक रचना प्रकाशित करेगी। इनकी कई रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होती रहती है साथ ही इनके दर्जनों पुस्तक भी प्रकाशित हो चुके है, वर्तमान में बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत आरा के वशिष्ठपुरी में निवास करते है। सुझाव और संपर्क हेतु: 9570805395)

