
RKTV NEWS/पटना(बिहार)04 अप्रैल। शुक्रवार को फ़्रेज़र रोड स्थित भारतीय नृत्य कला मंदिर में राजकमल प्रकाशन द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय ‘पटना किताब उत्सव’ का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। यह उत्सव 7 अप्रैल तक चलेगा। उद्घाटन वरिष्ठ कवि आलोकधन्वा ने किया। इस अवसर पर त्रिपुरारी शरण, रणेंद्र, हृषीकेश सुलभ, तरुण कुमार, अन्विता प्रधान सहित कई साहित्यकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत ‘पुनर्नवा: कृति-प्रसंग’ सत्र से हुई, जिसमें 20वीं सदी के चार महत्वपूर्ण उपन्यास—मनमोहन पाठक का ‘गगन घटा घहरानी’, सतीनाथ भादुड़ी का ‘ढोड़ाय चरितमानस’, हिमांशु श्रीवास्तव का ‘नदी फिर बह चली’ और चंद्रकिशोर जायसवाल का ‘पलटनिया’—के नए संस्करणों का लोकार्पण किया गया। ये कृतियाँ लंबे समय से पाठकों के लिए अनुपलब्ध थीं।
सत्र में रणेंद्र, हृषीकेश सुलभ, संतोष दीक्षित और पुष्यमित्र ने इन उपन्यासों की विशेषताओं पर चर्चा की। संतोष दीक्षित ने इन्हें बिहार की साहित्यिक धरोहर बताते हुए उनके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने उपन्यास विधा के विकास, उसके धारावाहिक प्रकाशन और मध्यवर्ग में उसकी लोकप्रियता पर भी प्रकाश डाला।
रणेंद्र ने ‘गगन घटा घहरानी’ में आदिवासी जीवन के सटीक चित्रण और उसकी भाषा-शैली की सराहना की। हृषीकेश सुलभ ने सतीनाथ भादुड़ी के चरित्र-निर्माण और हिमांशु श्रीवास्तव के लेखन में जीवनानुभव की गहराई को रेखांकित किया।
पुष्यमित्र ने ‘ढोड़ाय चरितमानस’ की संरचना और भाषा को विशिष्ट बताते हुए कहा कि यह उपन्यास अपने समय के सामाजिक यथार्थ को अनूठे ढंग से प्रस्तुत करता है। उन्होंने ‘पलटनिया’ के संदर्भ में मंडल आयोग के बाद ग्रामीण समाज में आए बदलावों को रेखांकित किया।
कविता पाठ में समकालीन स्वरों की प्रस्तुति
दूसरे सत्र ‘दुनिया रोज़ बनती है : कविता पाठ’ में अंचित, उपांशु, कर्मानंद आर्य, गुंजन उपाध्याय पाठक, चंद्रबिंद सिंह, नताशा, प्रभात प्रणीत, प्रशांत विप्लवी, फ़रीद ख़ाँ, राजेश कमल और शहंशाह आलम ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं। इसी दौरान अंचित के संग्रह ‘आधी पंक्ति’ और नताशा के ‘छूटी हुई चीज़ें’ का लोकार्पण हुआ। सत्र का संचालन अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने किया।
जी. एन. देवी की किताब ‘महाभारत : महाकाव्य एवं राष्ट्र’ का लोकार्पण
अंतिम सत्र में विख्यात भाषाविद् जी. एन. देवी की पुस्तक ‘महाभारत : महाकाव्य एवं राष्ट्र’ का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि अरुण कमल भी उपस्थित रहे। अरुण कमल ने कहा कि जी. एन. देवी का पटना आगमन एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक घटना है।
लोकार्पण के बाद जी. एन. देवी ने अपने व्याख्यान में कहा, हम भारत हैं क्योंकि हम ‘महाभारत’ हैं। महाभारत एक ऐसा महाकाव्य है जिसने भारत के हर एक व्यक्ति को अपने अतीत को देखने की दृष्टि दी है। भारत के अलग-अलग समाजों में हमें अनेक तरह की महाभारत देखने को मिलती है। यह महाकाव्य केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि मिथ, इतिहास और दर्शन का व्यापक संसार है, जिसकी व्याख्याएँ अनंत हैं।
शनिवार को होंगे ये कार्यक्रम
किताब उत्सव में 4 अप्रैल, शनिवार को कार्यक्रम के पहले सत्र में जावेद अनवर की किताब ‘साम्प्रदायिकता और जातिवाद के विषाणु : भारतीय भाषाओं की लोकोक्तियाँ, कहावतें और मुहावरे’ का लोकार्पण होगा। दूसरा सत्र ‘डिजिटल दौर में अख़बार की ज़रूरत’ विषय पर केंद्रित परिचर्चा का होगा। इसके बाद प्रेमकुमार मणि की विचारोत्तेजक कृति ‘भारत : एक विचार परम्परा’ पर केंद्रित परिचर्चा होगी। अगले सत्र में पत्रकार मंजीत ठाकुर की किताब ‘बहे सो गंगा : डार्क जोन में बदलता उत्तर भारत’ का लोकार्पण होगा।
कार्यक्रम का पाँचवाँ सत्र हृषीकेश सुलभ के नवीनतम उपन्यास ‘जूठी गली’ पर चर्चा का होगा। इसके बाद पुष्यमित्र की नई किताब ‘गांधी का सैंतालीस’ पर बातचीत होगी। छठा सत्र ‘समकालीन कहानी : सवाल और सरोकार’ विषय पर चर्चा का होगा। इसी दौरान ज्योति चावला के कहानी-संग्रह ‘चाबी, घर और अँधेरा’ का लोकार्पण होगा। अगला सत्र राजकमल प्रकाशन द्वारा मनाए जा रहे ‘हिन्दी उपन्यास का स्त्री वर्ष’ पर केंद्रित होगा। वहीं अंतिम सत्र में विश्वनाथ त्रिपाठी पर केंद्रित पुस्तक से पाठ-प्रस्तुति होगी।
