
RKTV NEWS/ नई दिल्ली 26 मार्च।राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच द्वारा “मंथन 5.0 (2026)” दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 27 एवं 28 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित सर शंकर लाल हॉल में किया जा रहा है। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “संस्कृति, जलवायु और इतिहास : विशाल भारत से प्राप्त शिक्षाएँ” निर्धारित किया गया है, जिसके अंतर्गत ईरान से लेकर दक्षिण (पूर्व) एशिया तक फैली सांस्कृतिक एवं पारिस्थितिक विरासत के विभिन्न आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इस 2 दिवसीय सम्मेलन में कुल 5 शैक्षिक सत्र रहेंगे।
इस सम्मेलन का आयोजन राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच तथा विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इसमें सहयोगी संस्थानों के रूप में हिमालय अध्ययन केंद्र, दिल्ली विश्वविद्यालय तथा पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन केंद्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी।
सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य “विशाल भारत” की अवधारणा के माध्यम से सांस्कृतिक, ऐतिहासिक तथा पारिस्थितिक संबंधों को समझना तथा समकालीन वैश्विक चुनौतियों विशेषकर जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति मार्गों और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर सार्थक विमर्श को प्रोत्साहित करना है। यह मंच विद्वानों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और रणनीतिक विश्लेषकों के बीच विचारों के आदान-प्रदान को सुदृढ़ करेगा।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ इंद्रेश कुमार, वरिष्ठ प्रचारक एवं मार्गदर्शक व मुख्य संरक्षक राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। उनके साथ विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विद्वान एवं विशिष्ट अतिथि इस आयोजन में सहभागिता करेंगे। सम्मेलन में कुलपति स्तर के शिक्षाविद, वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ, रणनीतिक विशेषज्ञ तथा सामाजिक कार्यकर्ता भाग लेंगे।
इस कार्यक्रम में प्रो. योगेश सिंह, कुलपति दिल्ली विश्वविद्यालय; पूर्व मेजर जनरल एस. भट्टाचार्य, अध्यक्ष दिल्ली चैप्टर, फैंस; प्रो. मालविका डुडी बागड़िया, अध्यक्ष विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय, जयपुर कार्यक्रम संरक्षक स्वरूप रहेंगे।
उद्घाटन सत्र में आमन्त्रित विशिष्ट अतिथिगण
जे के त्रिपाठी, सेवानिवृत्त आई.एफ. एस. एवं पूर्व राजनयिक भारत सरकार
अशोक सज्जनहर, सेवानिवृत्त आई.एफ. एस. एवं पूर्व राजनयिक भारत सरकार
प्रो. के के अग्रवाल, अध्यक्ष दक्षिण एशियाई विश्विद्यालय नई दिल्ली
प्रो. मजहर आसिफ, कुलपति जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
डॉ. के जी सुरेश, निदेशक, इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली
प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़
एच एच आचार्य, डॉ. लोकेश मुनि, संस्थापक अहिंसा विश्वभारती , जैन आचार्य एवं सामाज सुधारक
उद्धय महुरकर, पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
हर्षवर्धन त्रिपाठी, पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
उद्घाटन सत्र में गरिमामई उपस्थिति स्वरूप ई. ओंकार बागड़िया, मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं न्यासी विवेकानंद ग्लोबल विश्वविद्यालय, जयपुर; गोलोक बिहारी राय, सदस्य राष्ट्रीय संचालन समिति, राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच; जसबीर सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच आदि गणमान्य व्यक्ति रहेंगे।
समापन सत्र के आयोजन में आमन्त्रित विशिष्ट अतिथिगण
पद्मश्री अगुस इंद्र उदयना, सामाजिक कार्यकर्ता इंडोनेशिया
मंजू सेठ, सेवानिवृत्त आई.एफ. एस. एवं पूर्व राजनयिक, भारत सरकार
अचल मल्होत्रा, सेवानिवृत्त आई.एफ. एस. एवं पूर्व राजनयिक, भारत सरकार
देवयानी राणा, विधानसभा सदस्य, जम्मू कश्मीर
प्रो. एस पी बंसल, कुलपति, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, कांगड़ा
प्रो. राजकुमार मित्तल, कुलपति, बाबासाहेब भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ
प्रो. महताब आलम रिजवी, कुलसचिव, जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
टोकन साहू,आवास एवं शहरी मामले, राज्य मंत्री, भारत सरकार
राम कृपाल सिंह, पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
अवधेश कुमार सिंह, पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
समापन सत्र में प्रो. बिंध्य वासिनी पांडेय, निदेशक हिमालयी अध्ययन केंद्र, दिल्ली विश्वविद्यालय; डॉ. वर्णिका शर्मा, महामंत्री- प्रथम राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच; विक्रमादित्य सिंह, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच गरिमामई उपस्थिति के रूप में रहेंगे।
इसके साथ ही विभिन्न विश्विद्यालयों के कुलपति विशेष अतिथि स्वरूप इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे जिनमें प्रो. दिनेश सी राय, कुलपति बाबासाहेब भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, बिहार, प्रो. विजय कुमार, कुलपति, चौधरी देवीलाल विश्विद्यालय,प्रो. संजय कौशिक, कुलपति, गुरुग्राम विश्विद्यालय,प्रो. असीम मिगलानी, कुलपति, इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय,प्रो. रंजना झा, कुलपति, इंदिरा गांधी तकनीकी महिला विश्वविद्यालय,प्रो. बलदेव भाई शर्मा, पूर्व कुलपति, कुशबाहु ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, प्रो. गुरमीत सिंह, पूर्व कुलपति, पांडिचेरी विश्विद्यालय,प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, कुलपति, सोबन सिंह जीना यूनिवर्सिटी, अल्मोड़ा, प्रो. अजय कुमार मिश्रा, कुलपति, एम बी एम विश्वविद्यालय ,प्रो. पवन कुमार शर्मा, कुलसचिव, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृति विश्विद्यालय ,प्रो. विजय कुमार, सम्मेलन संयोजक; चतर सिंह, मंथन समन्वयक; डॉ. विवेक, मंथन संयोजक स्वरूप कार्यक्रम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उद्घाटन सत्र का आयोजन 27 मार्च को प्रात: 10बजे से होगा व समापन सत्र 28 मार्च को सांय 4:30 बजे से आयोजित किया जाएगा। दो दिवसीय इस सम्मेलन में विभिन्न शैक्षणिक सत्रों, परिचर्चाओं तथा 100 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुतियों का आयोजन होगा। साथ ही इन सत्रों में “विशाल भारत और वैश्विक संवाद”, “सभ्यतागत परिदृश्य और विशाल भारत का पारिस्थितिक लोकाचार”, “ ऐतिहासिक संदर्भ में सांस्कृतिक मेलजोल”, “समकालीन वैश्विक चुनौतियों और भारतीय ज्ञान परंपरा”,”विशाल भारत में सांस्कृतिक स्मृति, विरासत और निरंतरता” जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। जिसमें 15 से अधिक मुख्य वक्ता अपना वक्तव्य प्रेषित करेंगे। इसके अतिरिक्त, सम्मेलन के दौरान “विशाल भारत: सांस्कृतिक और सभ्यतागत चेतना” विषय पर आधारित एक महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा।
सम्मेलन की पृष्ठभूमि में “हिमालय से हिंद महासागर” तक विस्तृत भारत की अवधारणा उसे एक समेकित सांस्कृतिक एवं भू-राजनीतिक परिक्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करती है। ऐतिहासिक रूप से भारत के पूर्वी अफ्रीका, अरब जगत, श्रीलंका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ गहरे सांस्कृतिक, व्यापारिक और शैक्षणिक संबंध रहे हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को सुदृढ़ किया है।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में हिंद महासागर क्षेत्र का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों तथा सामरिक संतुलन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे में यह सम्मेलन इन सभी आयामों पर गहन विचार-विमर्श कर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
इस सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविद, शोधार्थी, विद्यार्थी, नीति-निर्माता तथा विश्लेषक बड़ी संख्या में भाग लेंगे। “मंथन 5.0” के माध्यम से आयोजकों का उद्देश्य एक ऐसा मंच प्रदान करना है, जहाँ विचारों का आदान-प्रदान हो, समकालीन चुनौतियों के समाधान खोजे जाएँ और एक समावेशी तथा सतत भविष्य की दिशा में सार्थक पहल की जा सके। प्रो. विजय कुमार, सम्मेलन संयोजक; चतर सिंह, मंथन समन्वयक; डॉ. विवेक, मंथन संयोजक स्वरूप कार्यक्रम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

