
उमरिया /मध्यप्रदेश ( मनोज कुमार प्रसाद)26 मार्च।कृषि विज्ञान केंद्र, उमरिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ के पी तिवारी के मार्गदर्शन में कार्यालय के सस्य वैज्ञानिक डा धनंजय सिंह, गृह वैज्ञानिक डा विनीता सिंह एवं कार्यक्रम सहायक कुंदन मुवेल द्वारा करकेली विकासखंड के पठारी कला, ताली एवं डबरौहा ग्राम तथा विकासखंड पाली के बरहाई ग्राम के कुल 20 आदिवासी महिला कृषकों को कड़कनाथ एवं नर्मदानिधि नस्ल की मुर्गी के चूजों का वितरण किया गया। मुर्गी पालन कार्य में सबसे बड़ी समस्या मुर्गी के चूजों की उपलब्धता की होती है। डबरौहा ग्राम कि महिला समूह को हैचरी यूनिट की मशीन कृषि विज्ञान केंद्र उमरिया द्वारा उपलब्ध कराई गई , ताकि जिले के कृषकों को स्थानीय स्तर पर अच्छी नस्ल के चूजे मिल सकें। यह कार्य आई. सी. ए. आर.-निशाद, भोपाल द्वारा वित्तपोषित आदिवासी उप परियोजना के अंतर्गत किया गया।
महिला कृषकों को मुर्गी के चूजों के साथ ही मुर्गियों के रहने का घर, मुर्गी के चूजों को फीड एवं चरी के बीज का वितरण किया गया। डॉ के पी तिवारी द्वारा बताया गया कि आज के समय में किसानों का ध्यान केवल परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रह गया है। बदलते बाजार, बढ़ती मांग और रोजगार के नए अवसरों के कारण किसान अब विविध व्यवसायों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इन्हीं में से एक है पोल्ट्री फार्मिंग यानी मुर्गी पालन है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां कम पूंजी में व्यवसाय शुरू किया जा सकता है और लगातार आय प्राप्त की जा सकती है।
डा विनीता सिंह ने मुर्गियों के स्वास्थ्य और तेज़ विकास के लिए सही फीड बेहद आवश्यक है। चूजों को पहले 15 दिन तक बारीक दलिया (स्टार्टर फीड) दें। उम्र के अनुसार स्टार्टर, ग्रोअर और फिनिशर फीड अवश्य बदलें। फीड में विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन की संतुलित मात्रा होनी चाहिए। संभव हो तो किसान अपने खेत की सामग्री (मक्का, चना, बाजरा आदि) का उपयोग करके फीड तैयार कर सकते हैं। इससे लागत काफी कम हो जाती है। कुंदन मुवल द्वारा बताया गया कि पोल्ट्री फार्मिंग में शुरुआती 15 से 20 दिन चूजों के लिए सबसे संवेदनशील समय होता है। फार्म में डिसइंफेक्शन (कीटाणु-नाशन) का प्रयोग करें करें। हवा, नमी और रोशनी का संतुलन रखें ताकि चूजों का विकास सही तरीके से हो सके। अरुण रजक द्वारा मुर्गी पालन से सम्बंधित विडियो फिल्म भी दिखाए गए ताकि महिला कृषकों को मुर्गी पालन जानकारी से अधिक से अधिक लाभान्वित हो सकें।

