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देवघर:राज्य स्तरीय खादी प्रदर्शनी का अपर समाहर्ता व अनुमंडल पदाधिकारी ने किया शुभारंभ।

जिले में आयोजित दस दिवसीय खादी प्रदर्शनी में देश भर के खादी उत्पाद का संग्रह।

RKTV NEWS/देवघर (झारखंड)11 मार्च।जिले में मंगलवार को खादी और ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम मंत्रालय, भारत सरकार राज्य स्तरीय खादी प्रदर्शनी, विपणन वर्ष 2025-26 का शुभारंभ सयुंक्त रूप से हीरा कुमार अपर समाहर्ता, रवि कुमार अनुमंडल पदाधिकारी, देवघर द्वारा किया गया। इस अवसर पर निदेशक, खादी और ग्रामोद्योग आयोग, राज्य कार्यालय, रांची की गरिमामय उपस्थिति रही। उक्त पदाधिकारियों के साथ ही साथ शैलेश सिंह, एन.डी.सी., देवघर, प्रशांत कुमार झा, क्षेत्रीय प्रबन्धक, भारतीय स्टेट बैंक, देवघर, आनंद मोहन, अग्रणी जिला प्रबन्धक, भारतीय स्टेट बैंक, देवघर सहित अन्य गणमान्य अतिथिगण एवं प्रेस एवं मीडिया के संवाददाता राज्य स्तरीय खादी प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में उपस्थित थे। इसके अलावा उद्घाटन सत्र के दौरान स्वागत भाषण देते हुए खादी और ग्रामोद्योग आयोग के निदेशक मांगे राम ने कहा कि चूंकि खादी हमारी स्वदेशी की परिचायक है, अतः उसकी बिक्री बढ़ाने एवं प्रचार-प्रसार करने हेतु इस दस दिवसीय राज्य स्तरीय खादी प्रदर्शनी का आयोजन देवघर में किया गया है। इस प्रदर्शनी में बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल एवं झारखंड से आए हुए खादी एवं ग्रामोद्योगी स्टाल धारक हैं। इस प्रर्दशनी में कुल 68 स्टाल लगाए गए हैं, जिनमें से 34 स्टाल सिर्फ खादी वस्त्रों एवं कपड़ों के हैं तथा शेष 28 स्टाल ग्रामोद्यागी/स्फूर्ति कलस्टर उत्पादों एवं 06 अन्य विभागीय स्टाल हैं, जैसे-बैंकों के स्टाल, पोस्ट आफिस एवं यू.आई.डी. के स्टाल आदि। उन्होंने संबोधन में कहा कि खादी का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में डोर टू डोर रोजगार उपलब्ध कराना है। खादी स्टाल हमारी देशभर की खादी संस्थाओं द्वारा लगाए गए हैं तथा ग्रामोद्योग के तहत लगाए जाने वाले ज्यादातर स्टाल पूरे देश भर के प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पी.एम.ई.जी.पी.) के हैं जो खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा संचालित, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (भारत सरकार) की एक महत्वाकांक्षी योजना है। उन्होंने कहा कि देवघर के आसपास के कत्तीन-बुनकर सहित आम जनमानस को खादी और ग्रामोद्योगी गतिविधियों से जोड़ने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इसका आयोजन किया गया है। इसके साथ ही साथ वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवा पीढ़ी हृदय से खादी को अपना सकें, इसी सोच को आगे रखते हुए देवघर में राज्य स्तरीय खादी प्रर्दशनी सह बिक्री कार्यक्रम आयोजित की गई है जो वर्तमान में देश की मांग भी है एवं देश के माननीय प्रधानमंत्री द्वारा खादी को अपनाने पर बल दिया जाता रहा है। निदेशक खा.ग्रा.आ., रांची ने कहा कि माननीय अध्यक्ष, खादी और ग्रामोद्योग आयोग (भारत सरकार) माननीय प्रधानमंत्री जी के सपने को साकार करने की दिशा में अग्रसर है, जिनके कार्यकाल में खादी का उत्पादन एवं बिक्री सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देशभर में पिछले वित्तीय वर्षों की तुलना में उत्तरोतर तेज गति से बढ़ रही है।
इसके अलावा इस दस दिवसीय खादी प्रदर्शनी में लोगों को पूरे देश भर के खादी उत्पाद- जैसे रेशम खादी–झारखंड का मशहूर तसर सिल्क, तसर कटिया, पोली कटिया, सिल्क मटका, सिल्क मलबरी साड़ी, तसर साड़ी, गरड़ साड़ी, सिल्क बलकल, सिल्क अंगवस्त्र, तसर साल, रेडीमेड रेशमी बंडी, रेशमी कुर्ता-कुर्ती, रेशमी सर्ट-पैंट देखने को मिलेंगे। सूती खादी में सूती थान, सूती धोती, साड़ी, गमछा, चादर, रेडीमेड कुर्ता-पाजामा, सुती बंडी, सुती अंगवस्त्र प्रदर्शन एवं बिक्री हेतु उपलब्ध रहेंगे। मसलीन खादी में– मसलीन थान, रेडीमेड कुता-पाजामा, बंगाल के मशहूर मलमल जो बहुत ही बारीक एवं फाईन हाते हैं, देखने को मिलेंगे। इसमें संताल परगना ग्रामोद्योग समिति, देवघर के माध्यम से आयोग द्वारा संचालित सिल्क कलस्टर, भगैया में उत्पादित सिल्क के वस्त्र भी लोगों के आकर्षण के केन्द्र रहेंगे। साथ ही साथ विकास भारती, बिशुनपुर, गुमला के माध्यम से आयोग द्वारा स्थापित मल्टी प्रोडक्ट कलस्टर के विभिन्न ग्रामोद्योगी उत्पाद आकर्षण के केन्द्र रहेंगे। महिलाओं के लिए विशेष आर्कषण बिहार के मधुबनी पिंट की साड़ी, ब्लाक प्रिंट, स्क्रीन प्रिंट, कत्था स्टीप, रिवर्स कत्था, झारखंड का मशहूर सोहराई प्रिंट की साड़ी, असम की वाटिका प्रिंट की साड़ियां इस प्रदर्शनी में देखने को मिलेंगी। आगे अपने उद्बोधन में देवघर के अनुमण्डल पदाधिकारी ने खादी की महत्ता एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमी को शब्दों में पिरोया तथा कहा कि खादी हमारी धरोहर है, जिसे न सिर्फ इसकी गुणवत्ता बचाये रखने की आवश्यकता है बल्कि वर्तमान युवाओं को इसे अपनाने की जरूरत है। उन्होंने खादी को देश की पहचान बताया तथा कुटीर उद्योग को देश की रीढ़ बताया एवं कहा कि देश को ठोस आधार देने एवं निरंतर रूप से आर्थिक मजबूती प्रदान करने हेतु देश की वर्तमान युवा पीढ़ी को खादी से जुड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने देवघर की युवा पीढ़ी सहित आम जनमानस को खादी अपनाने की अपील की ताकि ज्यादा से ज्यादा खादी एवं ग्रामोद्योग आधारित रोजगार सृजित हो सके। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक देवघरवासी यदि प्रदर्शनी का दौरा करें तो कम से कम एक खादी वस्त्र अपने साथ जरूर ले जायें जिससे ग्रामीण कत्तीन-बुनकरों को प्रोत्साहन मिलेगा।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में देवघर के अपर समाहर्ता, देवघर हीरा कुमार ने इस तरह के आयोजन को देश के विकास की दिशा में मिल का पत्थर बताया। उन्होंने खादी का सीधा मतलब भारतीयता से है तथा खादी भारतीयता की पहचान है तथा स्वरोजगार से खादी का सीधा संबंध है, इस बात पर जोर दिया तथा पूरे देशभर से आए खादी एवं ग्रामोद्योगी इकाइयों के जज्बे को सराहा। उन्होंने कहा कि खादी हमारी परंपरागत वस्त्र है इसे हृदय से अपनाने की जरूरत है। उन्होंने आज की पीढ़ी खासकर नवयुवकों को इस धरोहर को पहचानने एवं बचाने की अपील की। उन्होंने खादी को नये बच्चों के पाठ्य पुस्तकों को जानकारी देने एवं बताने की आवश्यकता पर बल दिया कि खादी न केवल स्वदेशी है बल्कि आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम है। उन्होंने भी पूरे देवघरवासियों को खादी परिधान खरीदने का आह्वान किया ताकि हमारी कत्तीन-बुनकरों को आर्थिक सहायता मिल सके। उन्होंने मोदी जी स्लोगन खादी सिर्फ वस्त्र नहीं, अस्त्र भी है और शस्त्र भी”। इसी को अस्त्र बनाकर महात्मा गांधी जी ने देश को आजादी का मार्ग दिखाया था, जिसका परिणाम है कि हम आजाद भारत में आजादी की सांस ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुटीर उद्योग भारत के लिए रोजगार के प्रमुख साधन गरीबी कम करने के प्रभावी उपाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि कम लागत और घर पर संचालित होने के कारण ये स्थानीय कौशल हस्तशिल्प बुनाई का उपयोग करके महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं और देश के संतुलित क्षेत्रीय विकास में योगदान देते हैं। उन्होंने कुटीर उद्योग को भारत के लिए रोजगार के प्रमुख साधन, गरीबी कम करने के प्रभावी उपाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया जो कम लागत और घर पर संचालित होने के कारण, स्थानीय कौशल (हस्तशिल्प, बुनाई) का उपयोग देश के संतुलित क्षेत्रीय विकास में योगदान देते हैं।
अग्रणी जिला प्रबन्धक आनन्द मोहन, भारतीय स्टेट बैंक, देवघर ने वोकल फार लोकल अपनाने की अपील की और आयोग के मिशन को बढ़चढ़कर भागीदारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि खादी न सिर्फ एक फैशन है बल्कि भारतीयता की पहचान है। भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबन्धक, देवघर प्रशान्त कुमार झा ने अपने संबोधन में खादी एवं आयोग की पी.एम.ई.जी.पी. सहित अन्य ग्रामोद्योगी योजनाओं को जानने एवं अपनाने पर बल दिया तथा कहा कि भारतीय स्टेट बैंक नये हितधारकों को सहयोग करने के लिए तत्तपर हैं और हरसंभव सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने खादी को सिर्फ वस्त्र नहीं बल्कि फैशन का पर्याय बताया तथा हर वर्ग को जुड़ने की अपील की। शैलेश सिंह, एन.डी.सी., देवघर ने अपने संबोधन में खादी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमी को बताते हुए कहा कि खादी तो पहले हमारी पारंपरिक वस्त्र हुआ करती थी जो गांव-गांव में बुनी एवं पहनी जाती थी, जो बाद में हमारी स्वतंत्रता आंदोलन का मुख्य अस्त्र बनी एवं हमें परतंत्रता की बेड़ियों से निकालने में सहायक बनी। अतः खादी की इस धरोहर को बचाने की आवश्कता है ज्यादा से ज्यादा खादी वस्त्र प्रोमोट करने की आवश्कता है। उन्होंने खादी और हस्तकरघा से बने वस्त्र में खादी को ज्यादा उपयोगी एवं शरीर के लिए उपयोगी बताया।

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