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खैरागढ़ विश्वविद्यालय में गूंजी लोक कला की गूंज : सिद्धेश्वर सेन और मदन निषाद का ‘स्मरण’ कार्यक्रम आयोजित।

कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने विद्यार्थियों को लोक कलाओं पर शोध और बहुमुखी प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 10 मार्च। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के लोक संगीत विभाग में “स्मरण सिद्धेश्वर सेन व मदन निषाद” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक संगीत एवं कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजन यादव ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मध्यप्रदेश के लोकनाट्य माच के संरक्षण एवं संवर्धन में विशेष योगदान देने वाले स्व. सिद्धेश्वर सेन तथा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध नाट्यशैली नाचा को देश-विदेश में प्रसिद्धि दिलाने वाले नाचा के मूर्धन्य कलाकार स्व. मदन निषाद के तैलचित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात विभाग के शोधार्थी भुनेश्वर साहू ने स्व. सिद्धेश्वर सेन के जीवनवृत्त पर सारगर्भित प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि किस तरह प्राथमिक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी श्री सेन ने मध्यप्रदेश के लोकनाट्य माच को देश-विदेश में पहुंचाया। साथ ही इसके संरक्षण एवं संवर्धन में अपना जीवन समर्पित कर दिया। श्री सेन इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के लोक संगीत विभाग में अतिथि शिक्षक के रूप में अपनी सेवा दे चुके हैं। इसके बाद शोधार्थी कु. नम्रता अलेंद्र ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध नाट्यशैली नाचा को देश-विदेश में प्रसिद्धि दिलाने वाले नाचा के मूर्धन्य कलाकार स्व. मदन निषाद की जीवनी से उपस्थितजनों को अवगत कराया। कु. नम्रता ने बताया कि किस तरह छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव से निकलकर मदन निषाद ने नाचा शैली को देश-विदेश तक पहुंचाया और छत्तीसगढ़ का नाम रौशन किया। इसके बाद विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा नाचा गीत की प्रस्तुति दी गई जिसमें गायन पक्ष में छात्रा ईशा बघेल, साक्षी, सुधा व हर्षलता साहू रहीं तथा वाद्य संगत में डॉ. बिहारी लाल तारम (बैंजो), डॉ. परमानन्द पांडेय (हार्मोनियम), डॉ. राजकुमार पटेल (मंजीरा), कामेश साहू (ढोलक) तथा कुलदीप (तबला) रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. शर्मा ने नाचा गीत प्रस्तुत करने वाले सभी कलाकारों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि इन लोक नृत्यों के हर एक पहलु पर शोध कार्य हो सकता है। ऐसे आयोजनों से उन्हें प्रेरणा लेने की बात कही। साथ ही विद्यार्थियों को लोक संगीत के अलावा विभिन्न विषयों का अध्ययन कर बहु प्रतिभाशाली बनने के लिए प्रेरित किया।
अधिष्ठाता प्रो. राजन यादव ने विद्यार्थियों से गुणवत्तापूर्ण अध्ययन करने की बात कही। उन्होंने ऐसे आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में हिस्सा लेने की बात कही ताकि उनमें बेहतर कार्य करने का भाव बना रहे। उन्होंने समर कैंप में अभिव्यक्ति कौशल विषय को रखने की बात कही, जिससे बच्चों में माइक सेंस बना रहे।
संगतकार डॉ. नत्थू तोड़े ने विद्यार्थियों को श्री सिद्धेश्वर सेन जी के लोक संगीत विभाग में बतौर अतिथि शिक्षक उनके शिक्षकीय दौर का संस्मरण बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपशिखा पटेल कार्यक्रम संयोजक एवं सहायक प्राध्यापक लोक संगीत विभाग ने तथा आभार व्यक्त डॉ.परमानंद पांडेय अतिथि व्याख्याता ने किया। इस अवसर पर डॉ. नत्थू तोड़े, डॉ. राजकुमार पटेल, डॉ. परमानंद पांडेय, डॉ. विधा सिंह, अभिनव महोबिया व अनिल टंडन सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी-शोधार्थी उपस्थित रहे।

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