
RKTV NEWS/दुमका ( झारखंड)09 मार्च।उपायुक्त अभिजीत सिन्हा की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में पेयजल से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित विभिन्न पेयजल योजनाओं, विशेष रूप से हर घर जल योजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए हर घर जल योजना के अंतर्गत चल रहे सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि जो भी पेयजल योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, उन्हें अविलंब हैंडओवर करने की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि आम लोगों को इन योजनाओं का लाभ शीघ्र मिल सके।
उपायुक्त ने गर्मी के मौसम को देखते हुए खराब पड़े चापानलों की स्थिति पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर सभी खराब चापानलों की पहचान कर उन्हें शीघ्र दुरुस्त किया जाए, ताकि गर्मी के दिनों में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लोगों को पेयजल की किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने सभी जूनियर इंजीनियर (जेई) को निर्देश दिया कि वे प्रखंड विकास पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अपने-अपने क्षेत्र में खराब पड़े चापानलों का सर्वेक्षण करें तथा उन्हें दुरुस्त कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
उपायुक्त ने यह भी निर्देश दिया कि पेयजल से संबंधित शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए एक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम का गठन किया जाए। इस कंट्रोल रूम के माध्यम से खराब चापानल या अन्य पेयजल समस्याओं से संबंधित शिकायतें प्राप्त की जाएंगी और संबंधित विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त उपायुक्त ने पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता एवं समयबद्धता बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि जिन संवेदकों द्वारा कार्यों में लापरवाही बरती जा रही है या कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है, ऐसे संवेदकों को चिन्हित करते हुए उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। आवश्यक होने पर ऐसे संवेदकों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की जाए।
उपायुक्त ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में नियमित रूप से निगरानी रखें और यह सुनिश्चित करें कि जिले के किसी भी क्षेत्र में पेयजल की समस्या उत्पन्न न हो।
