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पटना:राज्य स्तरीय भूकम्प परिदृश्य पर “मॉक अभ्यास” का सफल आयोजन।

23 जिलों में एकसाथ भूकम्प ड्रिल: राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से हुई सीधी निगरानी।

RKTV NEWS/पटना(बिहार)26 फरवरी। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, नई दिल्ली के सहयोग से बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में राज्य स्तरीय भूकम्प परिदृश्य पर आधारित भौतिक मॉक अभ्यास का आयोजन आज राज्य के 23 जिलों – पटना, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सीतामढ़ी, पश्चिम चम्पारण, समस्तीपुर, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चम्पारण, शिवहर, वैशाली, मुंगेर, बेगूसराय, खगड़िया, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, गोपालगंज, सारण, सिवान एवं सहरसा में सफलतापूर्वक किया गया। इसकी सीधी निगरानी सरदार पटेल भवन, पटना स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से आपदा प्राधिकरण के माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत,सदस्य पी. एन. राय,नरेंद्र कुमार सिंह, प्रकाश कुमार, शंभू दत्त झा, बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लीड कंसल्टेंट मेजर जनरल सुधीर बहल, प्राधिकरण के सचिव मो. वारिस खान, संयुक्त सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी, संयुक्त सचिव अविनाश कुमार एवं विशेष कार्य पदाधिकारी संदीप कुमार द्वारा की गई।
यह भूकम्प परिदृश्य पर आधारित भौतिक मॉक अभ्यास रियल टाइम इंसिडेंट बेस्ड सिनेरियो पर आधारित था। सभी जिलों ने काल्पनिक भूकम्पीय आपदा की स्थिति में नियंत्रण कक्ष की सक्रियता, रेस्क्यू टीमों की तैनाती, राहत सामग्री वितरण, संवेदनशील स्थलों की निगरानी एवं त्वरित प्रतिक्रिया का प्रभावी प्रदर्शन किया गया। विभिन्न हितधारकों एवं स्थानीय पुलिस की भूमिका से आपदा के समय फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में कार्य करने, सूचना स्रोत के रूप में सक्रिय रहने, भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक एवं भीड़ नियंत्रण सुनिश्चित करने तथा राहत शिविरों में पीड़ित परिवारों की सहायता करने हेतु निर्धारित की गई। मॉक अभ्यास से संबंधित जिलों में जिला पदाधिकारी स्वयं इसकी निगरानी कर रहे थे। इस मॉक अभ्यास की प्रमुख उपलब्धि यह रही कि आपदा के समय विभिन्न हितधारकों के साथ जान-माल की सुरक्षा हेतु जिस प्रकार त्वरित कार्रवाई की जाती है, उसी प्रकार भौतिक रूप में इसका आयोजन कर पूर्व तैयारी एवं सशक्त समन्वय को जांचा-परखा गया।
सभी जिलों में विभिन्न हितधारकों, यथा- भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल, बिहार अग्निशमन सेवा, सशस्त्र सीमा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस तथा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के वरीय अधिकारियों को भौतिक मॉक अभ्यास के दौरान संबंधित जिलों में प्रतिनियुक्त किया गया था। जिलों में जिला अधिकारी, अपर समाहर्ता एवं सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी चिह्नित हॉट स्पॉट की व्यावहारिक रूप से निगरानी कर रहे थे। सभी लाइन विभाग कंधे से कंधा मिलाकर राहत एवं बचाव कार्य कर रहे थे। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र सीधे राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र से जुड़कर ग्राउंड रिपोर्ट उच्चस्तरीय अधिकारियों को सूचित कर रहे थे। यह अभ्यास हमारी पूर्व तैयारी एवं सतत निगरानी की सफलता एवं कमियों को जांचने-परखने तथा सही समय पर सही निर्णय एवं समन्वय सुनिश्चित करने से संबंधित था।
मॉक अभ्यास में जिलों ने प्रातः 8:25 बजे भूकम्प आने की काल्पनिक सूचना पर विभाग में तत्काल “ड्रॉप, कवर एवं होल्ड (ड्रॉप, कवर एवं होल्ड)” का अभ्यास किया। सभी अधिकारियों एवं कर्मियों ने निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सुरक्षित स्थिति में बचाव एवं निष्क्रमण का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर पटना जिला में संचालित चिह्नित स्पॉटों इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना एवं जे. डी. विमेन्स कॉलेज, पटना पर माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लीड कंसल्टेंट मेजर जनरल सुधीर बहल द्वारा मॉक अभ्यास स्थल पर पहुँचकर जायजा लिया गया एवं निगरानी की गई। इस अवसर पर माननीय उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत ने बताया कि पूर्व में “भूकम्प सप्ताह” मनाया जाता था, जिसे अब “भूकम्प पखवाड़ा” के रूप में आयोजित किया जा रहा है। साथ ही यह भी घोषणा की गई कि प्रत्येक माह की 4 तारीख को नियमित रूप से अर्थक्वेक ड्रिल आयोजित की जाएगी, जिससे आपदा तैयारी को सतत एवं व्यवस्थित बनाया जा सके।

अभ्यास के दौरान प्रदर्शित प्रमुख गतिविधियाँ

अग्निकांड की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया एवं आग पर नियंत्रण।
मलबे में फंसे घायलों का रेस्क्यू एवं प्राथमिक उपचार।
बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों की सुरक्षित निकासी।
अस्थायी राहत शिविरों की स्थापना।
भोजन, पेयजल एवं अस्थायी आवास की व्यवस्था।
चिकित्सकीय टीमों की तैनाती एवं एम्बुलेंस समन्वय।
संचार तंत्र एवं आपातकालीन नियंत्रण कक्ष की सक्रियता।
ट्रायेज प्रणाली का अनुपालन एवं अस्पताल रेफरल व्यवस्था।
अस्थायी ई. ओ. सी., अस्पताल एवं रिलीफ कैंप के संबंध में मॉक अभ्यास।
एस. डी. आर. एफ. टीम द्वारा विशेष उपकरणों के माध्यम से सर्च एवं रेस्क्यू अभियान।

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