
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)22 फरवरी।दुनिया भर के मुसलमान रमजान के महीने में रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं ।यह महीना सबसे महत्वपूर्ण और पाक माना जाता है। रोजा के संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता सरफराज खान ने बताया कि रोजा रखने से आत्मा और शरीर का पूरी तरह से शुद्धिकरण हो जाता है। रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां पवित्र और बरकत वाला महीना तथा इस्लाम का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता है।सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखा जाता है। इसी महीने में कुरान शरीफ का धरती पर अवतरण हुआ था। 30 दिनों तक चलने वाले रोजा में 15 से 16 घंटे तक भूखे रहना पड़ता है जिससे शरीर के बड़े से बड़े बीमारियों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है । इबादत करने से बुराई दूर होते हैं।ऐसी मान्यता है कि इस माह में कोई भी बुरा नहीं करता है ना सोचता है बल्कि सबके साथ अच्छा व्यवहार और सहयोग किया जाता है। पूरे माह इबादत के बाद चांद दिखने पर ईद-उल-फितर का त्यौहार मनाया जाता है ।इन्होंने बताया कि रमजान आत्म शुद्धि त्याग और अल्लाह के प्रति समर्पण का महीना है।
