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भोपाल:प्रकृति के मनमोहक नर्तन एवं मां सरस्वती के प्राकट्योत्सव का पर्व है बसंत: गोकुल सोनी

फागुन उतरा है शाखो पर, मौसम की कटी पतंग लिए : मधु शुक्ला

भोपाल /मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)23 जनवरी। भोपाल बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केंद्र में आज वाणी, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की वंदना के साथ बसंत विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार गोकुल सोनी की अध्यक्षता, मधु शुक्ला गीतकार के मुख्य आतिथ्य तथा गीतकार मनोज जैन मधुर एवं कवि सत्यदेव सत्य के विशेष आतिथ्य में संपन्न हुआ। सरस एवं सफल संचालन मधुलता शर्मा ने किया।
कार्यक्रम का आरंभ बाल कल्याण शोध केंद्र के निदेशक महेश सक्सेना के स्वागत भाषण एवं कविता पाठ से हुआ।सरोज दुबे ने गोष्ठी का आरंभ इन शब्दों से किया, “पतझड़ ले गई पवन उड़ाए, ऋतुराज आज आए हैं। नीलिमा रंजन की सरस कविता मनमोहक रही, “पात पात कली कली, छा गया बसंत, लो फिर आ गया बसंत।” सुरेश पटवा ने पढ़ा, पवन झकोरे गा रहे, राग बसंत बहार। ताल दे रहे झूमकर, नव पल्लव सुकुमार।।” सुनीता शर्मा सिद्धि ने पढ़ा, “सखि नाच रहे मोर, और भंवरों का शोर।” सीमा हरि शर्मा ने पढ़ा, “रंग विधाता ने भरे, टेसू लाल गुलाल। धरती सजधज लगी ले बासन्ती थाल।। सुधा दुबे ने पढ़ा, लो बसंत आ गया, कोयले कुहुक उठीं।” अनिता तिवारी ने पढ़ा, “तुम पतझड़ पर लिखो, मैं बसंत पर लिखूंगी। कवि सत्यदेव सत्य ने पढ़ा, “अरे सखियां निहारो, ऋतुराज आ गया है।” गीतकार मनोज जैन मधुर ने समसामयिक विषय पर व्यंग्य गीत पढ़ा, “आज नहीं तो कल पा लोगे, नोबल को तुम हथिया लोगे, सुनो ट्रंप जी।” मधु शुक्ला ने पढ़ा, “फागुन उतरा है शाखाओं पर, मौसम की कटी पतंग लिए।
अध्यक्षता कर रहे गोकुल सोनी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आज के दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ। आज के ही दिन कामदेव ने बसंत ऋतु के माध्यम से भगवान शंकर की तपस्या भंग की थी। प्रकृति के मनमोहक उत्सव और नर्तन का नाम है बसंत। इन प्रसंगों के साथ ही उन्होंने गीत पढ़ा, “खिल गए फिर फूल लो देखो पलासों में।” साथ ही सुभाष चंद्र बोस का भी अपने छंद के माध्यम से स्मरण किया। अन्य कवियों में गौरीशंकर शर्मा गौरीश, रेखा नायक, अशोक व्यग्र, बिहारीलाल सोनी, चरणजीत सिंह कुकरेजा, हरिवल्लभ शर्मा हरि, अल्पना वर्मा, वीरेंद्र गोहिया, दिनेश भदौरिया, आदि ने भी सरस रचनाओं का पाठ किया। अंत में आभार अनीता तिवारी ने व्यक्त किया।
इसमें श्रीराम महेश्वरी, वी के श्रीवास्तव, एस डी श्रीवास्तव, के साथ ही अनेकों साहित्य प्रेमियों ने अपनी उपस्थिति दी।

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