भूविज्ञान को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालते हुए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण 65वीं सीजीपीबी बैठक में अपने आगामी वार्षिक कार्यक्रम के अनावरण के साथ भविष्य की भूवैज्ञानिक पहलों की रूपरेखा तैयार करेगा।
RKTV NEWS/ नई दिल्ली 20 जनवरी।खान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) 21 जनवरी 2026 को एपी शिंदे संगोष्ठी हॉल, आईसीएआर, पूसा, नई दिल्ली में 65वीं केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (सीजीपीबी) की बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, उद्योग, शिक्षा जगत और खनन क्षेत्रों के प्रमुख हितधारक भूवैज्ञानिक- प्रगति, खनिज अन्वेषण रणनीतियों और स्वच्छ ऊर्जा, भू-खतरों एवं सतत विकास सहित चुनौतियों के समाधान पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ एक मंच पर होंगे।
केंद्रीय भूवैज्ञानिक कार्यक्रम बोर्ड (सीजीपीबी) खान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसके अंतर्गत जीएसआई के वार्षिक क्षेत्र सत्र कार्यक्रम (एफएसपी) पर चर्चा की जाती है और कार्यों के दोहराव से बचा जाता है। सीजीपीबी के सदस्य और अन्य हितधारक जैसे राज्य सरकारें, केंद्र/राज्य सरकार की खनिज अन्वेषण एजेंसियां, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और निजी उद्यमी जीएसआई के साथ सहयोगात्मक कार्य के लिए अपने अनुरोध प्रस्तुत करते हैं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं और सदस्यों एवं हितधारकों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के महत्व और तात्कालिकता के आधार पर, आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सर्वेक्षण एवं मानचित्रण, अन्वेषण, अनुसंधान एवं विकास, सामाजिक परियोजनाओं के लिए बहुविषयक कार्य तथा प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए जीएसआई के वार्षिक कार्यक्रम को सीजीपीबी की शीर्ष स्तरीय बैठकों में उचित चर्चा और विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाता है।
खान मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल की अध्यक्षता में 65वीं सीजीपीबी बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस बैठक में जीएसआई के महानिदेशक असित साहा और खान मंत्रालय के अपर सचिव संजय लोहिया के साथ-साथ खान मंत्रालय, जीएसआई, राज्य भूवैज्ञानिक विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी अन्वेषण/खनन कंपनियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
बैठक में होने वाली चर्चा देश के खनिज क्षेत्र के सामने आने वाली समस्याओं पर केंद्रित होगी, जिनमें निम्नलिखित विषय शामिल हैं:
लिथियम, आरईई, ग्रेफाइट, पीजीई, वैनेडियम, स्कैंडियम, सीजियम आदि जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का अन्वेषण, ऊर्जा पारेषण और आत्मनिर्भर भारत पर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप किया जाना।
एआई/एमएल आधारित डेटा एकीकरण, भूभौतिकीय सर्वेक्षण, हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग, डीप ड्रिलिंग और खनिज प्रणाली अध्ययन जैसे आधुनिक अन्वेषण उपकरणों को अपनाना।
राष्ट्रीय संसाधनों को अनुकूलित करने, दोहराव को कम करने और अन्वेषण से नीलामी के लिए तैयार ब्लॉकों में संक्रमण को गति देने के लिए, विशेष रूप से महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के लिए, पूर्व-प्रतिस्पर्धी डेटा साझाकरण और सहयोगात्मक अन्वेषण मॉडल।
विशेष रूप से हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए भूस्खलन खतरे के क्षेत्र निर्धारण और ढलान स्थिरता अध्ययन।
इस बैठक में भूविज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों की 1,068 परियोजनाओं के जीएसआई का वार्षिक कार्यक्रम (वित्तीय सर्वेक्षण वर्ष 2026-27) प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें खनिज अन्वेषण पर विशेष बल दिया गया है। कार्यक्रम में नवाचार और स्थिरता पर जोर देने के साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों, कार्बन पृथक्करण अध्ययन, अपतटीय अन्वेषण और जनहित भूविज्ञान पर विशेष बल दिया गया है। बैठक में गणमान्यजनों द्वारा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सामरिक एवं महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में जीएसआई की गतिविधियों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
सीजीपीबी की बैठक राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक प्राथमिकताओं को वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप बनाने के लिए एक सहयोगात्मक और समन्वय मंच के रूप में कार्य करेगी, जिससे नवाचार और संसाधन सुरक्षा के प्रति भारत की दृष्टि को आगे बढ़ाया जा सके।

