
RKTV NEWS/गिरिडीह(झारखंड)19 जनवरी। भारत सरकार द्वारा फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य 2027 निर्धारित है। इसी क्रम में आज जिला उपायुक्त रामनिवास यादव ने समाहरणालय सभागार में फाइलेरिया मुक्त भारत अभियान के सफल क्रियान्वयन एवं संचालन को लेकर बैठक की। बैठक में बताया गया कि फाइलेरिया मुक्त भारत अभियान 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत लक्षित जनमानस को फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराया जाएगा। एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिला, गम्भीर रूप से बीमार व्यक्ति को दवा का सेवन नहीं करना है। दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है। गिरिडीह जिला में कुल 27 लाख दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। 10 फरवरी को सभी आगंनबाडी केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, स्वास्थ्य उपकेन्द्र पर DEC एवं Albendazole की एकल खुराक खिलाई जाएगी। शेष बचे हुए व्यक्तियों को 11 फरवरी से 25 फरवरी तक प्रशिक्षित दवा प्रशासकों (सहिया, सेविका एवं भोलेन्टेयर वर्कर) के द्वारा घर-घर जाकर दवा खिलाई जाएगी। जिसमें कुल 3512 दवा प्रशासक दवा सेवन करवाने हेतु कार्य करेंगे।
1. फाइलेरिया एक खतरनाक बीमारी है जिससे हाथी पाँव या हाइड्रोसील होने का खतरा होता है। यह बीमारी मादा क्यूलेक्स नामक मच्छर काटने से होती है।
2. संक्रमण के शुरू में कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है। संक्रमण के कुछ सालों के बाद बुखार रहने लगता है। कुछ वर्षों के बाद दर्द एवं पैरो में सुजन आने लगती है इस बीमारी का ठीक से उपचार नहीं होने पर सुजन स्थायी हो जाता है। फाइलेरिया बीमारी को स्थानीय भाषा में हाथीपाव कहा जाता है।
3. इस बीमारी से बचाव हेतु वर्ष में एक बार मास ड्रग एडगिशट्रेशन कार्यक्रम (MDA) के तहत फाईलेरिया रोगी दवा की एकल खुराक खाना आवश्यक है।
4. यदि सभी व्यक्तियों को डी.ई.सी. एवं अलबेन्डाजोल गोली की एक खुराक वर्ष में एक बार खिलायी जाये तो 80 से 90 प्रतिशत तक इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है एवं अपने अगले पीढ़ी के बच्चों में इस बीमारी को फैलने से रोक सकते है। फाइलेरिया की दवा किसी भी स्थिति में खाली पेट नहीं ली जानी पाहिए।
5. इस वर्ष एम०डी०ए० दिनांक 10 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक मनाया जायेगा इस कार्यक्रम के अन्र्तगत एक दिन (10 फरवरी 2026) को सभी आंगनबाडी केन्द्रो / सा०स्वा०केन्द्रो / स्वास्थ्य उपकेन्द्रों/वार्ड कार्यालय एवं अन्य सार्वजनिक स्थान को बुथ के रूप में चिन्हित करते हुए दवा सेवन कराया जाएगा। बची हुई लक्षित आबादी को घर-घर जाकर सहिया/स्वास्थ्य कार्यकर्ता के द्वारा अपनी उपस्थिति में डी०ई०सी० एवं अल्बेन्डाजोल गोली की एकल खुराक खिलाई जाएगी।
6. 02 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिला एवं गम्भीर रूप से बिमार व्यक्ति को छोड़कर अन्य सभी को उम्र के अनुसार डी०ई०सी० एवं अल्बेन्डाजोल की गोली एकल खुराक खिलाई जाती है। 01 वर्ष से 02 वर्ष वो बच्चों को अल्बेन्डाजोल आधी गोली खिलाई जायेगी।
7. यह दवा पुर्णतः सुरक्षित है। दवा का सेवन के पश्चात् जिन व्यक्यिों के खुन में फाइलेरिया के रोगाणु उपस्थित होते है उनको प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है जैसे सिर दर्द, उल्टी, चक्कर एवं बुखार। ये समस्या एक प्रतिशत लोगों में होती है जो माइक्रो फाइलेरिया से संक्रमित है। प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन हेतु जिला एवं प्रखण्ड स्तर पर रैपिड रिसपोंस दल (RRT) का गठन किया गया है।
8. सभी दवा प्रशासक एवं पर्यवेक्षकों का जिला एवं प्रखण्ड स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
