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इंदौर में स्लीपर बसों पर आरटीओ का बड़ा एक्शन, नियम तोड़ने वालों पर सख्ती।

इंदौर/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)18 जनवरी।यात्रियों की जान की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने स्लीपर बसों पर कड़ा शिकंजा कस दिया है। देश के विभिन्न हिस्सों में हाल के महीनों में स्लीपर बसों में आग लगने और गंभीर हादसों की घटनाओं के बाद अब इंदौर में आरटीओ ने सघन जांच अभियान शुरू कर दिया है। बस संचालकों को साफ कह दिया गया है कि यात्रियों का सफर सुरक्षित हो और सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता न होने दिया जाये। दो दिनों में आधा दर्जन से अधिक बसों पर कार्रवाई की गई है।
एआरटीओ अर्चना मिश्रा ने बताया कि परिवहन आयुक्त के निर्देश के तहत बस बॉडी कोड AIS-119 एवं AIS-052 के अनुसार स्लीपर बसों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी क्रम में टीम के एआरटीओ राजेश गुप्ता द्वारा बीते दिनों इंदौर जिले के सभी स्लीपर बस संचालकों और स्वामियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें उन्हें नियमों की जानकारी देकर पालन के स्पष्ट निर्देश दिए गए। बस संचालकों से लिया लिखित में बस संचालकों से लिखित में आश्वासन लिया गया कि वे एक माह के अपनी बसों में एफडीएसएस लगवा कर सभी कमियां दूर करेंगे।

दो दिन शहरभर में चला जांच अभियान

एआरटीओ मिश्रा ने बताया कि हमारी टीम ने तीन इमली रोड, तीन इमली बस स्टैंड, राजीव गांधी चौराहा और चोइथराम रोड सहित विभिन्न स्थानों पर बस यार्ड में जांच की। निरीक्षण के दौरान कई बसों में अवैध पार्टीशन दरवाजे हटवाए गए, कुछ में FDSS सिस्टम नहीं मिला और कई वाहनों में आपातकालीन उपकरणों की कमी पाई गई। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर एक स्लीपर बस की फिटनेस तत्काल निरस्त कर दिया गया है। साथ ही निजी एटीएस सेंटरों को भी निर्देश दिए गए हैं कि मानकों पर खरी न उतरने वाली बसों की फिटनेस न करें।

इंदौर में है 489 स्लीपर बसे

आरटीओ के अनुसार इंदौर में कुल 489 स्लीपर बसें पंजीकृत हैं, जिनमें से 70 से अधिक फिलहाल ऑफ-रोड हैं। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यात्री सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

स्लीपर बसों के लिए अनिवार्य किए गए सुरक्षा नियम

बैठक में बताया गया कि स्लीपर बसों में ड्राइवर केबिन और यात्री केबिन के बीच पार्टीशन दरवाजा नहीं होना चाहिए, स्लीपर बर्थ के साथ स्लाइडर या स्टोरेज पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा,बसों में FDSS (फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम) अनिवार्य, सभी बसों में कम से कम 10 किलो का अग्निशमन यंत्र (ग्रीन ज़ोन) होना चाहिए,
बस की लंबाई के अनुसार 4 से 5 आपातकालीन द्वार अनिवार्य होना चाहिए, VLTD, पैनिक बटन और स्पीड गवर्नर चालू हालत में होना जरूरी है,ज्वलनशील पदार्थों का परिवहन प्रतिबंधित है, फर्स्ट-एड बॉक्स अनिवार्य है तथा चालक द्वारा नशे में वाहन चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध है।

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