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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले 2026 का उद्घाटन किया।

RKTV NEWS/नई दिल्ली 10 जनवरी।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला (एनडीडब्ल्यूबीएफ) 2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर कतर के संस्कृति मंत्रीअब्दुल रहमान बिन हमद बिन जसीम बिन अल थानी, स्पेन के संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्टासुन डोमेनेच, स्पेन के संस्कृति मंत्रालय में पुस्तकों की महानिदेशक मारिया जोस गाल्वेज़, केन्‍द्रीय उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी, राष्‍ट्रीय पुस्‍तक न्‍यास (एनबीटी) के अध्यक्ष मिलिंद सुधाकर मराठे, एनबीटी के निदेशक श्री युवराज मलिक, कतर और स्पेन के विशिष्ट अतिथि और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम के दौरान श्री प्रधान ने “कुडोपाली की गाथा: 1857 की अनकही कहानी” नामक पुस्तक का विमोचन किया, जो बांग्ला, असमिया, पंजाबी, मलयालम, उर्दू और मराठी भाषाओं में उपलब्ध है। कुडोपाली की गाथा पर एक वीडियो भी प्रदर्शित किया गया।
श्री प्रधान ने इस अवसर पर कहा कि विश्व का सबसे बड़ा व्‍यवसाय से उपभोक्‍ता (बी2सी) पुस्तक मेला, एनडीडब्ल्यूबीएफ 2026, न केवल विचारों का संगम है बल्कि भारत की सशक्त और जीवंत पठन संस्कृति का एक भव्य उत्सव भी है। उन्होंने कहा कि पुस्तक मेले का विषय, “भारतीय सैन्य इतिहास: ‘’ शौर्य और ज्ञान के 75 वर्ष,” और कतर तथा स्पेन जैसे देशों की भागीदारी ने इस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक आयोजन के महत्व को और भी बढ़ा दिया है।
श्री प्रधान ने कहा कि संबलपुर की धरती पर हुए स्वतंत्रता संग्राम के अनकहे अध्यायों को उजागर करने वाली पुस्तक “कुडोपाली की गाथा: 1857 की अनकही कहानी” का विमोचन बंगाली, असमिया, पंजाबी, मराठी, मलयालम और उर्दू सहित नौ भारतीय भाषाओं और स्पेनिश अंतरराष्ट्रीय भाषा में किया गया है। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक पहले हिंदी, अंग्रेजी और ओडिया में प्रकाशित हो चुकी थी और अब 13 भाषाओं में उपलब्ध है। उन्होंने इस पुस्तक को वीर सुरेंद्र साई जी की विरासत और कुडोपाली के शहीदों के बलिदान को सम्मानित करने का सराहनीय प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत की बहुभाषावाद और वैश्विक संवाद की परंपरा को भी मजबूत करती है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पढ़ने की संस्कृति को एक जन आंदोलन में बदल दिया है और प्रधानमंत्री का ‘विकसित भारत’ का दृष्टिकोण बुनियादी ढांचे या प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जागरूक, विचारशील एवं ज्ञान-प्रेरित पीढ़ी के निर्माण में गहराई से निहित है जो ज्ञान को राष्ट्र निर्माण की नींव के रूप में पहचानता है।
उन्होंने एनबीटी इंडिया को बधाई दी और पुस्तक मेले के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पुस्तकों और संवाद के माध्यम से देश की पठन संस्कृति में नई ऊर्जा का संचार कर रहा है।
स्पेन के संस्कृति मंत्री अर्नेस्ट उर्टासुन डोमेनेच ने स्पेन-भारत द्विवर्षीय सम्मेलन 2026 में स्पेन की भागीदारी का उल्‍लेख करते हुए कहा कि यह मेला भारत में स्पेनिश लेखकों को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जहां स्पेनिश भाषा और साहित्य में रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने जुआन रामोन जिमेनेज और गुरूदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बीच ऐतिहासिक साहित्यिक संबंध को भी याद किया।
कतर के संस्कृति मंत्री अब्दुल रहमान बिन हमद बिन जसीम बिन हमद अल थानी ने कहा कि कतर की भागीदारी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को दर्शाती है। यह लोगों के बीच संबंधों और राष्ट्र निर्माण के आधार के रूप में संस्कृति और ज्ञान की भूमिका की पुष्टि करती है।
विश्व का सबसे बड़ा बी2सी पुस्तक मेला, नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला (एनडीडब्ल्यूबीएफ), शिक्षा मंत्रालय के अधीन भारत के राष्ट्रीय पुस्तक न्‍यास (एनबीटी) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। यह मेला 10 से 18 जनवरी 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है और पहली बार इसमें प्रवेश निःशुल्क किया गया है। भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का सह-आयोजक है। नौ दिवसीय इस पुस्तक मेले में 35 से अधिक देशों के 1000 से अधिक प्रकाशक एक साथ आएंगे। इस दौरान 600 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें 1000 से अधिक वक्ता शामिल होंगे और 20 लाख से अधिक आगंतुकों के आने की उम्मीद है।
इस वर्ष के पुस्‍तक मेले का विषय है “भारतीय सैन्य इतिहास: ‘’शौर्य और ज्ञान के 75 वर्ष’’। इसके साथ ही मेले में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने और सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष प्रदर्शनियां भी आयोजित की जाएंगी।
एनडीडब्ल्यूबीएफ 2026 का मुख्य आकर्षण “भारतीय सैन्य इतिहास: ‘’शौर्य और ज्ञान @75” शीर्षक वाला थीम पवेलियन है जो 1,000 वर्ग मीटर का एक ऐसा स्थान है जो स्वतंत्रता के बाद से भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के साहस, बलिदान और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को समर्पित है। इस पवेलियन में 500 से अधिक पुस्तकें, चुनिंदा प्रदर्शनियां, पोस्टर, वृत्तचित्र प्रदर्शित किए जाएंगे। प्रमुख आकर्षणों में अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस की प्रतिकृतियां, 21 परमवीर चक्र विजेताओं को श्रद्धांजलि और बुडगांव 1947 से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक के प्रमुख युद्धों और सैन्य अभियानों पर सत्र शामिल हैं।

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