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बागपत:कभी बाल मजदूरी में फंसा यह युवा, अब प्रधानमंत्री के सामने रखेगा लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी का रोडमैप—ताकि कोई युवा पीछे न छूटे।

बागपत के अमन को मिली विकसित भारत यूथ कैप्टन की जिम्मेदारी, टीम यूपी की करेंगे अगुवाई।
कभी बाल मजदूरी और गरीबी थी पहचान, अब राष्ट्रीय मंच पर बुलंद होगी इस ग्रामीण युवा की आवाज।
राज्यपाल से भेंट कर नई दिल्ली प्रस्थान करेंगे अमन, जिलाधिकारी ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)05 जनवरी। जिस उम्र में कंधों पर स्कूल बैग का बोझ होना चाहिए था, उस उम्र में जिम्मेदारियों का वजन ढोता एक बच्चा अब देश के सबसे बड़े मंच पर युवाओं की आवाज बनने जा रहा है। कभी अख़बार बेचकर परिवार का सहारा बना, कभी ट्यूबलाइट फैक्ट्री में बाल श्रम करने को मजबूर हुआ बागपत का युवा अमन कुमार अब विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में यह बताएगा कि लोकतंत्र और शासन में युवाओं की भागीदारी कैसे बढ़ाई जाए, ताकि कोई युवा पीछे न छूटे।
अमन का चयन भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के लिए हुआ है। यहां वह विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की भूमिका, सहभागिता और नीति-निर्माण में उनकी हिस्सेदारी को लेकर अपने विचार रखेंगे। जो कभी समाज के सबसे उपेक्षित वर्ग में रहा, वही आज राष्ट्रीय मंच पर उत्तर प्रदेश के करोड़ों युवाओं की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करेगा।
नई दिल्ली रवाना होने से पहले अमन को यूपी राजभवन लखनऊ आमंत्रित किया गया है, जहां वह राज्यपाल महामहिम आनंदीबेन पटेल से संवाद करेंगे और राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे। इसके बाद नई दिल्ली में वह उत्तर प्रदेश की युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष अपने सुझाव साझा करेंगे। कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्रियों के साथ रात्रिभोज और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से संवाद का अवसर भी मिलेगा। खास बात यह है कि पूरे प्रदेश से चयनित युवाओं के समूह की अगुवाई के लिए युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल निदेशालय लखनऊ की ओर से बागपत के अमन को टीम कैप्टन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
वहीं लखनऊ प्रस्थान से पूर्व अमन ने जिलाधिकारी अस्मिता लाल से कलेक्ट्रेट पर भेंट कर मार्गदर्शन प्राप्त किया। जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की शुभकामनाएं दी एवं आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अमन के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि वह स्वयं बाल मजदूरी का दंश झेल चुके हैं। वह कहते हैं, “जब बचपन को याद करता हूं तो सबसे पहले सुबह की ठंड, साइकिल पर लदे अख़बार और उम्र से पहले कंधों पर आ गई जिम्मेदारियां याद आती हैं। कक्षा 8–9 में पढ़ते हुए रोज़ सुबह चार बजे साइकिल लेकर बड़ौत जाता, अख़बार खरीदता और गांव-गांव बांटता था। काम खत्म होने के बाद रास्ते में किसी ईंट-भट्टे पर रुककर स्कूल की पैंट-शर्ट पहनता और सीधे कक्षा में पहुंचता। खाली पेट साइकिल चलाना भी एक परीक्षा था। गरीबी सिर्फ काम नहीं कराती, चुप रहना भी सिखा देती है।”
कम उम्र में अमन ने वह सब देखा, जो किसी बच्चे को नहीं देखना चाहिए। साइकिल ठीक कराने की दुकान पर अपने जैसे टूटे बच्चों को देखना और फिर कुछ समय के लिए गांव की ट्यूबलाइट फैक्ट्री में बाल श्रम—सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक काम, दोपहर में सिर्फ एक घंटे का विराम। अमन कहते हैं, “उस एक घंटे में खाने से ज्यादा कीमती नींद होती थी।” उस उम्र में ‘निराशा’ शब्द भले न जानते हों लेकिन उसके लक्षण रोज़ जीते थे। लगातार थकान, चुप्पी और यह डर कि कहीं ज़िंदगी यहीं न थम जाए। तभी भीतर एक सवाल आकार लेने लगा कि हम बच्चे अपनी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के कारण पीछे क्यों रह जाते हैं?
यही पीड़ा आगे चलकर प्रेरणा बनी। अमन ने तय कर लिया कि असमानता, भेदभाव और उपेक्षा के खिलाफ लड़ना ही उनके जीवन का उद्देश्य होगा। 12वीं तक पढ़ाई इसी संघर्ष के बीच पूरी हुई। 12वीं के बाद दिल्ली-एनसीआर में नौकरी का विकल्प सामने था। बेहतर वेतन, स्थिर जीवन और शहर की सुविधाएं। लेकिन अमन ने वह रास्ता नहीं चुना। साइकिल की दुकानों पर काम करते बच्चों की याद उन्हें बार-बार गांव की ओर खींच लाई।
अमन ने निजी कंपनी की 25 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी छोड़ दी और गांव लौट आए। उनका मानना था कि जिन समस्याओं को उन्होंने गांव-समाज में जिया है, उनका समाधान भी वहीं से निकलेगा। योजनाएं थीं, स्कॉलरशिप थीं, लेकिन जानकारी नहीं पहुंचती थी। समाधान के तौर पर उन्होंने एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया और अख़बारों व इंटरनेट से मिले शैक्षिक व करियर अवसर साझा करने लगे। इसका असर जल्द दिखा और युवाओं ने इंटर्नशिप, स्कॉलरशिप और करियर की दिशा में कदम बढ़ाए।
इसी दौरान गांव में सर्वे के लिए आए एक स्वयंसेवक ने माय भारत की जानकारी दी और अमन ने ‘उड़ान’ नाम से यूथ क्लब बनाया। तत्कालीन जिला युवा अधिकारी अरुण तिवारी के सहयोग से अपने बनाए व्हाट्सऐप ग्रुप को वेबसाइट कॉन्टेस्ट 360 का रूप दिया जो एक क्लिक पर युवाओं को शैक्षिक अवसरों से जोड़ने वाला मंच बना। आज 83.6 लाख से अधिक विज़िट्स के साथ यह प्लेटफॉर्म अवसरों की खाई पाटने का सशक्त माध्यम बन चुका है। अमन ने जिले के गांव-गांव जाकर यूथ क्लब गठित कराए, युवाओं को ‘माय भारत’ से जोड़ा और डिजिटल अभियानों के जरिए लाखों लोगों तक जागरूकता पहुंचाई।
वर्ष 2022 में कांवड़ यात्रा के दौरान 25–30 लाख श्रद्धालुओं की समस्याओं को लेकर अख़बारों में पढ़कर अमन ने समाधान सुझाया—एक क्यूआर कोड आधारित ऐप। आमतौर पर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए युवा की बात अनसुनी रह जाती है, लेकिन जिला युवा अधिकारी ने उनके विचार को गंभीरता से सुना और जिलाधिकारी तक पहुंचाया। जिला सूचना अधिकारी के सहयोग से कांवड़ यात्रा का आईसीटी-आधारित ऐप तैयार हुआ, जिससे उसी वर्ष साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों को सीधी मदद मिली। इसके बाद स्वीप बागपत, सूचना सेतु और बागपत फॉर एनिमल्स जैसे ऐप विकसित किए गए, ताकि योजनाएं और सूचनाएं समाज के सबसे कमजोर तबकों तक पहुंच सकें।

यह लड़ाई सिर्फ मेरी नहीं : अमन

अमन कहते हैं, “मेरी लड़ाई यह सुनिश्चित करने की है कि कोई युवा पीछे न छूटे। जानकारी का अभाव न रहे। शासन-प्रशासन में भागीदारी बढ़े और युवाओं को सम्मान व विश्वास मिले।” वह मानते हैं कि अगर समय पर सही मार्गदर्शन न मिलता तो समाज अपराधी कह देता लेकिन यह नहीं पूछता कि वहां पहुंचाया किसने।
अमन के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया जब माय भारत केंद्र बागपत के तत्कालीन जिला युवा अधिकारी अरुण तिवारी और जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी का मार्गदर्शन मिला। प्रशासन के साथ स्वैच्छिक रूप से कार्य करने, नियमित अख़बार पढ़ने और नागरिक कर्तव्य को समझने से उनके भीतर जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। अमन का अनुभव बताता है कि जब परिवार, समाज, स्कूल और शासन युवाओं को विश्वास और सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, तो वही युवा अपराध, नशे और बेरोजगारी से दूर होकर विकास के साझीदार बनते हैं।
वर्ष 2025 में अमन कुमार को उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को दिए जाने वाले सर्वोच्च युवा सम्मान विवेकानन्द राज्य युवा पुरस्कार से सम्मानित किया है। वहीं नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के मार्गदर्शन में वह सत्यार्थी समर स्कूल का हिस्सा रहे हैं। आई वॉलंटियर यूथ चैंपियन, यूनिसेफ इंडिया के यूथ एंबेसडर, माय भारत मेंटोर, माय गवर्नमेंट यूथ एंबेसडर, स्वीप कोर कमेटी सदस्य, यूनेस्को ग्लोबल यूथ कम्युनिटी सदस्य सहित कई उपलब्धियां इस युवा होनहार के नाम शामिल है।
आज अमन देश-विदेश के मंचों पर अपनी राय रखते हैं, लेकिन बातों के केंद्र में होते है साइकिल की दुकान और फैक्ट्रियों में बाल मजदूरी करते बच्चे, अवसरों से वंचित ग्रामीण युवा और कभी अख़बार बेचता वह खुद। अमन का सवाल आज भी वही है कि हम ऐसा विश्व कैसे बनाएं जहां कोई युवा पीछे न छूटे? यह कहानी बागपत की है, लेकिन प्रश्न पूरे देश और दुनिया का है। अमन की उड़ान का आधार है पीड़ा से उपजी प्रेरणा, उसकी शक्ति है नैतिक करुणा और लक्ष्य है कोई युवा पीछे न छूटे।

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