ठंड के बावजूद लाखों की संख्या में लोग ले रहे मेले का आनंद।

11 दिनों में रिकॉर्ड 14 करोड़ के पार पहुंचा व्यवसाय।

प्रकृति से लोगों का दिखा प्रेम,खूब हो रही विभिन्न प्रजातियों के पौधों की खरीदारी।

जीविका दीदियों ने घर की साज सज्जा के उत्पादों का लगाया भंडार।

विभिन्न प्रकार के रसोई के बर्तनों के प्रति महिलाओं का आकर्षण।

संगीत की प्रस्तुतियों से गुंजायमान से हो रहा मेला परिसर।
RKTV NEWS/पटना(बिहार )23 दिसंबर।गांव की महक, गांव की विनम्रता, गांव का हुनर, गांव का शिल्प और गांव का स्वाद अपने गांव से दूर रह रहे लोगों को राजधानी पटना में खूब भा रहा है। गांधी मैदान, पटना में आयोजित सरस मेला में आगंतुकों को अपने गांव की यादें और विरासत बरबस ही अपनी ओर खींच रही है। आगंतुक वर्षों पुरानी शिल्प और कलाकृतियों को एक बार फिर से अपने घर , दुकान और संस्थान के लिए खरीद रहे हैं। और यही नहीं देशी व्यंजनों का स्वाद भी गांव की यादें ताजा कर रहा है। सरस मेला में बिहार समेत 25 राज्यों की हस्तशिल्प, कलाकृतियां और मशहूर व्यंजन पांच सौ से अधिक स्टॉल पर प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए रखे गए हैं। जहां से इनकी खूब खरीद -बिक्री हो रही है ।
बिहार सरस मेला हर वर्ग, हर उम्र और हर प्रदेश के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
सरस मेला में विभिन्न प्रदेशों से आई महिला उद्यमियों के चेहरे पर आत्मविश्वास, स्वावलंबन एवं महिला सशक्तिकरण की झलक साफ दिख रही है।
बिहार के सभी जिलें से आई महिला शिल्पकारों एवं उद्यमियों के चेहरे सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना और सतत जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित होकर समाज में मिली पहचान, मान सम्मान एवं आर्थिक उन्नति की रौनक है। सारण जिला के ढाका प्रखंड स्थित दलपतपुर गांव से आई आशा देवी ने सिक्की कला को जीविका के माध्यम से पुनर्जीवित किया है। सतत जीविकोपार्जन योजना और फिर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मिले लाभ से उन्होंने सिक्की कला के तहत बने कलाकृतियों को बड़े बाजार से जोड़ा है। सरस मेला में प्रतिदिन अपने स्टॉल से 20 से 30 हजार रुपए की बिक्री कर रही हैं। जीविका से जुड़कर और फिर योजनाओं से मिले लाभ ने उनके जीवन में खुशहाली लाई है
। आशा देवी की तरह सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं सरस मेला के विभिन्न स्टॉल पर महिला स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण की गाथा सुना रही हैं। कई संस्थानों से जुड़ी महिलाएं इनके स्टॉल पर आकर इनसे व्यवसाय के गुण सीखते हुए अपना क्षमतावर्धन कर रही हैं। प्रबंधन की पढ़ाई कर रहे छात्र- छात्राएं भी इनसे व्यवसाय प्रबंधन सीख रही हैं।
सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु आगंतुकों को जागरूक करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास निगम के तत्वाधान में विद्या केंद्र के कलाकारों द्वारा बाल विवाह, दहेज़ उन्मूलन, यौन उत्पीडन, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ , महिला सशक्तिकरण , महिला स्वरोजगार और साईबर सुरक्षा पर आधारित नुक्कड़ नाटक की गई l
सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत मुख्य मंच पर संध्या काल में अपनी गायन एवं नृत्य से लोक कलाकारों ने दर्शकों को झुमाया l राहुल सैनी ने गजल गायकी से सबको मोहा l स्थानीय कलाकारों ने बिहार के लोक नृत्यों जट-जटिन झिजिया और एक नृत्य की प्रस्तुति से दर्शकों की वाहवाही लुटी l गाँव के अधिकारी मोरा बड़का भैया हो और घिर आईल कारी बदरिया पर लोक नृत्यों की प्रस्तुति ने बिहार की लोक संस्कृति और परंपरा की यादें ताज़ा कराई l
कड़ाके की ठंड के बावजूद मेला में आगंतुक बड़ी संख्या में आ रहे हैं l 12 दिसंबर से जारी सरस मेला में 11 दिनों में अनुमानत: 9 लाख लोग आये । इस 11 दिनों में लगभग 14 करोड़ 11 लाख रुपये का व्यवसाय हुआ है l
सरस मेला में हर वर्ग और हर उम्र के लिए खास बन गया है l आगंतुक अपने पसंद के उत्पादों की खरीददारी के साथ ही देशी व्यंजनों का लुत्फ़ उठाते हुए सेल्फी पॉइंट पर फोटोग्राफी, बच्चे – बच्चियां फन ज़ोन में मस्ती और बाईस्कोप देखकर देश-दुनिया की सैर कर रहे हैं l बुजुर्ग अपने पुरानेदिनो के शिल्प को देखकर हर्षित हो रहे हैं l सरस मेला में स्वच्छता और कुशल प्रबंधन पर विशेष ध्यान है l सौ सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में सरस मेला का सुरक्षित और भव्य आयोजन जारी है l कई विभागों, संस्थानों एवं बैंको के स्टॉल से आगंतुक लाभान्वित हो रहे हैं l ग्राहक सेवा केंद्र पर रुपये की जमा-निकासी जारी है l सभी स्टॉल पर कैशलेश खरीददारी की उपलब्धता ने सरस मेला में खरीद-बिक्री को आसान बनाया है l

