
RKTV NEWS/दुमका ( झारखंड)20 दिसंबर।प्रखंड मुख्यालय परिसर, शिकारीपाड़ा में केंद्रीय रेशम बोर्ड एवं क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र, दुमका द्वारा तसर रेशम कृषि मेला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मेले का उद्घाटन उप विकास आयुक्त अनिकेत सचान, वैज्ञानिक डॉ. शांताकर गिरि, सहायक उद्योग निदेशक (रेशम), दुमका रविशंकर शर्मा, पीपीओ सह सीओ कपिलदेव ठाकुर तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी एजाज आलम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त ने कहा कि भारत में तसर रेशम उद्योग का गौरवशाली इतिहास सदियों पुराना है। झारखंड राज्य तसर उत्पादन में अग्रणी है तथा राज्य में दुमका जिला तसर उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने तसर खेती का परिचय देते हुए बताया कि तसर कीट पालन मुख्यतः जंगलों में आसन एवं अर्जुन के पेड़ों पर किया जाता है, जहाँ कीट इन पेड़ों की पत्तियाँ खाकर अपना जीवन-चक्र पूर्ण करते हैं।
तसर रेशम अपनी समृद्ध बनावट, प्राकृतिक गुणों तथा गहरे सुनहरे रंग के कारण अत्यंत मूल्यवान है।
उन्होंने कहा कि रेशम उद्योग की विभिन्न कड़ियाँ—कीट पालन, गुणवत्तापूर्ण अंडों का उत्पादन, धागाकरण, कताई, बुनाई एवं वस्त्र निर्माण—सभी क्षेत्रों में स्वरोजगार की अपार संभावनाएँ निहित हैं। कोकून उत्पादन से लेकर धागा निकालने एवं कपड़ा बुनने की कला को संताल परगना क्षेत्र में सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है। इसके लिए केंद्रीय रेशम बोर्ड एवं राज्य रेशम विभाग के समन्वित सहयोग से हितधारकों को अधिकतम लाभ पहुँचाया जाना चाहिए।
उप विकास आयुक्त ने कृषकों को तसर खेती के साथ उसी भूमि में हल्दी की खेती अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करने की भी सलाह दी।
इस अवसर पर प्रखंड के रेशमदूत मैनेजर हेब्रम, चूड़का हेब्रम, तलामय हांसदा, चंपा हांसदा एवं गुपिन सोरेन को तसर कृषि कीट प्रदान किए गए। साथ ही 10 तसर कृषकों को मोमेंटो एवं झारखंड की पहचान स्वरूप अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र, दुमका के प्रबीर कुमार गोराई, शिवम कुमार, शिवनंदन शर्मा, अग्र परियोजना शिकारीपाड़ा के कर्मीगण तथा बड़ी संख्या में तसर कृषक उपस्थित थे।
