बांस निर्मित उत्पादों से पर्यावरण संरक्षण का दे रही महिलाएं संदेश।

गुलाबी ठंड में हजारों की संख्या में पहुंच रहे खरीदार।

बिहार की नदियों के नामों पर किया गया है पवेलियन का निर्माण।

मिट्टी के आधुनिक बर्तनों से पटा है बाजार।

देशी परिधानों के प्रति महिलाएं हो रहीं आकर्षित।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनता को किया जा रहा जागरूक।

फूड जोन पर देश-प्रदेश के देशी व्यंजनों का लोग ले रहे आनंद।

सांस्कृतिक संध्या में लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोगों का हो रहा मनोरंजन।
RKTV NEWS/पटना(बिहार )13 दिसंबर ।“हुनरमंद हाथों से सजता बिहार” थीम पर आधारित बिहार सरस मेला का आयोजन गाँधी मैदान, पटना में शुरू हो गया है। बिहार सरस मेला का आयोजन ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा किया जा रहा है।
बिहार की नदियों गंगा, कोसी , गंडक, और महानंदा के नाम पर पवेलियन बनाये गए हैं। यहाँ से ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
सरस मेला में पांच सौ से अधिक स्टॉल के माध्यम से ग्रामीण उद्यमिता, हस्तशिल्प. लोक कलाकृतियों,महिला स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण को संरक्षण और प्रोत्साहन देने के साथ ही देशी व्यंजनों के स्वाद और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं से रू-ब-रू कराते हुए लाभान्वित किया जा रहा है।
सरस मेला में बिहार समेत 25 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला उद्यमी , शिल्पकार और स्वरोजगारी अपने –अपने प्रदेश के हस्तशिल्प, लोक कला और मशहूर देशी व्यंजनों को लेकर प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए उपस्थित हैं l
महिला एवं बाल विकास निगम, उद्योग संघ , नगर निगम, पटना, पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग , पर्यटन विभाग, स्वास्थ्य विभाग , स्टेट बैंक औफ़ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक , विकास प्रबंधन विभाग, भारतीय डाक विभाग समेत कई सरकारी विभाग , बैंक और वित्तीय संस्थाओं के स्टॉल को भी स्टॉल आवंटित किये गए हैं।इनके स्टॉल से आगंतुकों को लोक कल्याणकारी योजनाओं से आगंतुक लाभ उठा रहे हैं।जीविका के विभिन्न स्टॉल और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के स्टॉल से आगंतुक महिला स्वालंबन एवं सशक्तिकरण तथा स्वच्छता अभियान के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों को प्रदर्शित किया जा रहा है।
जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की पौधशाला के स्टॉल पर कर प्रकार के औषधीय पौधे, फूल-फल के पौधे प्रदर्शनी सह बिक्री के लिए लाये गए हैं।
फ़ूड जोन में दीदी की रसोई समेत कई प्रदेशों के देशी, पौष्टिक एवं मशहूर व्यंजन परोसे जा रहे हैं l
सरस मेला में हस्तशिल्प एवं देशी व्यंजनों , परिधान, फर्नीचर, झूले, आचार-पापड़, सत्तू, बेसन , कतरनी चावल-चुडा , गुड़, कई प्रकार के मुरब्बे, पाचक , कालीन, कंबल , चुड़ी, लहठी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, गर्म कपड़े , मधुग्राम के स्टॉल पर कई प्रकार के फ्लेवर में मधु, आदि के प्रति लोगों का आकर्षण देखते ही बन रहा है।सभी स्टॉल पर कैशलेश खरीददारी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। रुपयों की जमा -निकासी के लिए जीविका दीदियों द्वारा ग्राहक सेवा केंद्र भी उपलब्ध होंगे l
जीविका दीदियों द्वारा संचालित शिल्पग्राम के हस्तशिल्प उत्पाद, मधुग्राम के मधु तथा सतत जीविकोपार्जन योजना के लाभार्थियों द्वारा निर्मित उत्पादों का खास क्रेज खास है l पलना घर, फन जोन और सेल्फी जोन की और भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है और इन स्थानों पर आगंतुक सरस मेला में आगमन की स्मृति के तौर पर अपने परिजनों संग फोटो संग्रहित कर रहे हैं l
प्रतिदिन सम-सामयिक मुद्दों पर आधारित सेमिनार, लोकगीत एवं लोक नृत्य पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीत-गजल और सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन हेतु जन–जागरण के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति हो रही है l
शनिवार को नाद, पटना के कलाकारों द्वारा लोगों को पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की गई l
मुख्य मंच पर अरुण एंड ग्रुप के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत लोक गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति की गई l” गजल चांदी जैसा रंग है तेरा” और “”सईयाँ मडईया नीक लागे” अरे रमा घिर आईल बदरिया” जैसे गीतों पर नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झुमाया। मंच संचालन नजिस बानो, राज्य परियोजना प्रबंधक, जीविका ने किया।

