अब केवल प्रशासन ही नहीं, पूरा बागपत बनेगा पशु मैत्री जनपद— “बागपत फॉर एनिमल्स” ऐप ने सभी को जोड़ा।
‘जानवर बोल नहीं सकते’—लेकिन बागपत प्रशासन और स्वयंसेवकों ने उनकी खामोशी सुनने के लिए एक ऐप बना डाला।

जिलाधिकारी को समस्या दिखी, समीक्षा हुई, आदेश जारी… “बागपत फॉर एनिमल्स” ऐप हुआ तैयार—यही है नया बागपत।
RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)09 दिसंबर। जिले में पशु कल्याण व्यवस्था को मजबूत बनाने और आपात स्थिति में त्वरित मदद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में “बागपत फॉर एनिमल्स” एप का शुभारंभ किया गया। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने एप का औपचारिक उद्घाटन कर इसकी उपयोगिता का परीक्षण भी किया। यह एप प्रशासन और पशु कल्याण स्वयंसेवकों के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है, जिसमें पूरे जनपद के पशु चिकित्सकों/चिकित्सालयों और पंजीकृत पशु कल्याण स्वयंसेवकों का डेटा जोड़ा गया है। इस एप को राज्य युवा पुरस्कार विजेता अमन कुमार के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है जिसकी जिलाधिकारी ने बेहद प्रशंसा की।
कुछ महीने पहले कई पशुओं की दुर्घटना आदि से जुड़ी ऐसी सूचनाएं संज्ञान में आई जिसमें असल मदद पहुँचने में देरी हुई। जिलाधिकारी ने समीक्षा की तो सामने आया कि किसी के पास डॉक्टर का सही नंबर नहीं था, किसी को यह समझ नहीं आ रहा था कि किस स्वयंसेवक को कॉल करें। सूचना इधर–उधर भटकती रही… और जब तक मदद पहुँची, देर हो चुकी थी। इस घटना ने जिले के प्रशासन को झकझोर दिया। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने अपनी टीम से यही सवाल पूछा— “जब मदद करने वाले लोग इतने हैं, तो मदद पहुँच क्यों नहीं पा रही?”
जवाब चौंकाने वाला था— समस्या यह नहीं थी कि डॉक्टर या स्वयंसेवक कम हैं; समस्या यह थी कि जानकारी बिखरी हुई थी, समय पर सही व्यक्ति तक पहुँचती ही नहीं थी। उसी रात जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा— “अब बागपत में किसी पशु की जान सिर्फ इसलिए नहीं जाएगी कि सूचना भटक गई।” और इसी संकल्प से जन्म हुआ— “बागपत फॉर एनिमल्स” एप का विचार। एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था, जहाँ घायल पशु दिखते ही कोई भी व्यक्ति एक क्लिक में नजदीकी पशु चिकित्सकों से संपर्क कर सहायता पा सके।
यह ऐप सिर्फ नवाचार नहीं है; यह कुछ बेजूबान पशुओं के लिए देर से आई मदद से उपजा एक शांत संकल्प है— अगली बार देरी नहीं होगी। उन असहाय पशुओं ने आज पूरे जिले में जान बचाने की एक डिजिटल क्रांति शुरू करा दी है। मदद अब एक क्लिक की दूरी पर है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि कई बार घायल पशुओं के लिए समय पर सूचना न मिलने से उपचार में देरी होती है। इस एप के माध्यम से जिले में पशु सहायता प्रणाली को एक मंच पर लाया गया है। उन्होंने बताया कि एप में हर चिकित्सक और स्वयंसेवक का संपर्क विवरण, लोकेशन और उपलब्धता की जानकारी दी गई है, जिससे किसी भी नागरिक को जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद मिल सकेगी।
पशुओं के अधिकारों के लिए कार्यरत माय भारत स्वयंसेवक अमन कुमार ने घटनाओं के डेटा को इकट्ठा कर बताया कि सबसे बड़ी समस्या ‘अव्यवस्थित सूचना’ की थी। इसी युवा ने, अपनी पढ़ाई के साथ समय निकालकर, ऐप का प्रारंभिक खाका तैयार किया। इसके बाद अमीर खान, गुलफ़सा राजपूत, नितिश भारद्वाज, संयम सिंह, शादाब, वरुण शर्मा, सागर तोमर सहित कई अन्य स्वयंसेवक जुड़ते गए—किसी ने डॉक्टरों के नंबर जुटाए, किसी ने लोकेशन मैप तैयार किए, किसी ने ऐप की टेस्टिंग की। इस तरह “बागपत फॉर एनिमल्स” नागरिकों और प्रशासन की साझेदारी से बना एक जीवंत, मनुष्यत्व से भरा मॉडल बना।
एप लॉन्च होने के बाद जिलाधिकारी ने खुद अपने मोबाइल से इसे संचालित कर एक पशु चिकित्सक से संपर्क किया और व्यवस्था की जांच की जिसमें संतोषजनक फीडबैक एवं व्यवस्थाएं दुरुस्त मिली। कॉल तुरंत जुड़ने पर उन्होंने अधिकारियों को एप की मॉनिटरिंग एवं समीक्षा हेतु आवश्यक निर्देश दिए। शिकायतों और तकनीकी समस्याओं को समय पर समाधान करना प्राथमिकता रहेगी।
स्वयंसेवक अमीर खान ने बताया कि पहले आपस में जानकारी साझा करने के लिए अलग-अलग व्हाट्सऐप ग्रुप और फोन कॉल पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे समन्वय में दिक्कत होती थी। स्वयंसेविका गुलफ़सा राजपूत ने कहा कि एप की शुरुआत से अब एकीकृत सूचना प्रणाली तैयार हो गई है। स्वयंसेवक वरुण शर्मा ने कहा कि इससे समय की बचत होगी और फील्ड में काम करना आसान होगा। कई स्वयंसेवकों ने इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कई बार सड़क पर घायल गाय या डॉगस को अस्पताल पहुँचाने में सही संसाधन जुटाने में देरी हो जाती थी, लेकिन अब यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी।
पशु चिकित्सकों ने भी माना कि एप के माध्यम से आपात मामलों की सूचना तेजी से मिलने लगेगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर घटनाओं की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती, जिसके कारण उपचार में देर हो जाती है। एप से सूचना मिलने पर निकटतम घटना बिंदु तक जल्दी पहुँच सकेंगे। इससे गंभीर मामलों में पशुओं की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी। अधिकारियों ने बताया कि एप में पशु क्रूरता की शिकायत दर्ज करने का विकल्प भी दिया जाएगा। शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन उस पर कार्रवाई करेगा। एप में जिले के फीडिंग ज़ोन और आश्रय स्थलों का विवरण भी रहेगा ताकि जरूरत पड़ने पर स्वयंसेवक और नागरिक आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें। एप में जिले के सभी पशु चिकित्सालयों, गौशालाओं और पशु आश्रय स्थलों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।
जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में चल रहे पशु कल्याण प्रयासों को व्यवस्थित करना समय की आवश्यकता थी। पशु दुर्घटनाओं और बीमारियों की घटनाएँ बढ़ने पर रिस्पांस सिस्टम का होना जरूरी है। स्वयंसेवकों ने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पहली बार पशु सहायता को लेकर जिले में एक केंद्रीकृत और प्रशासनिक समर्थन वाली व्यवस्था तैयार हुई है। उन्होंने बताया कि कई बार वे घायल पशुओं को उठाकर अस्पताल तक ले जाते थे लेकिन डॉक्टरों से समय पर संपर्क न हो पाने पर उन्हें कठिनाई होती थी। एप से यह समस्या दूर होगी और प्रशासनिक निगरानी होने से जिम्मेदारी भी तय होगी। उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि वे इस पहल को मजबूत बनाने में प्रशासन का सहयोग करें और वास्तविक जानकारी समय पर उपलब्ध कराएँ। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में इसमें और फीचर जोड़कर इसे अधिक उपयोगी बनाया जाएगा।
कुल मिलाकर, एप लॉन्च होने के साथ जिले में पशु कल्याण को लेकर एक नई दिशा तैयार हुई है। सड़क दुर्घटनाओं, बीमारियों और पशु क्रूरता के मामलों में त्वरित सहायता प्राप्त करना अब पहले से आसान होगा। यह पहल जिले में मानव और पशु के बीच संवेदनशीलता एवं सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देगी। वहीं इस अवसर पर डिप्टी कलेक्टर मनीष यादव, जिला सूचना अधिकारी राहुल भाटी सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

