धूल उड़ाई तो दंड, कूड़ा जलाया तो कार्रवाई: रेलवे से लेकर NHAI तक सबको चेतावनी।
एक्शन मोड में डीएम… ईंट भट्ठों से लेकर एक्सप्रेसवे तक—जहाँ नियम टूटे, वहीं कार्रवाई शुरू
स्वच्छ हवा सभी का अधिकार: बागपत में नागरिकों से ‘क्लीन एयर चैंपियन बनने का आह्वान।
RKTV NEWS/बागपत (उत्तर प्रदेश)09 दिसंबर।सर्दी बढ़ने के साथ हवा की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। ऐसे में जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देश पर जनपद में GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के तहत कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। जिले में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा किए गए निरीक्षण में कई स्थानों पर GRAP मानकों की अनदेखी पाई गई, जिसके बाद विभिन्न निर्माण एजेंसियों और जिम्मेदार विभागों के विरुद्ध बड़ी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की संस्तुतियाँ भेजी गई हैं।
टटीरी में निर्माणाधीन रेलवे फ्लाईओवर की जांच में धूल नियंत्रण की कोई उचित व्यवस्था नहीं मिली। निर्माण सामग्री खुली पड़ी थी और जल छिड़काव भी नहीं पाया गया। इस गंभीर लापरवाही पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने Northern Railway Delhi Division के विरुद्ध ₹23.55 लाख की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की संस्तुति की है। इसी प्रकार नगर पालिका बागपत क्षेत्र में निर्माणाधीन नाले और दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के कार्य में भी धूल नियंत्रण व्यवस्था कमजोर मिली, जिसके चलते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने National Highways Authority of India (NHAI) बागपत पर ₹18.90 लाख की क्षतिपूर्ति की संस्तुति भेजी है।
दिल्ली–सहारनपुर मार्ग पर ग्राम पाली के सामने चल रहे स्थलीय विकास कार्य में भी निर्माण सामग्री की ढुलाई, ग्रीन नेट फेसिंग और पानी छिड़काव जैसी आवश्यक व्यवस्थाएँ अनुपस्थित मिलीं। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बागपत-बड़ौत-खेकड़ा विकास प्राधिकरण को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पत्र भेजा है। वहीं सरधना–बिनौली मार्ग पर ग्राम बरनावा के पास नगर ठोस अपशिष्ट को खुले में जलाने का मामला भी सामने आया, जिसे GRAP का गंभीर उल्लंघन माना गया और जिला पंचायत राज अधिकारी बागपत को कार्रवाई की संस्तुति भेजी गई है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासन ने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए विभिन्न मोर्चों पर एक साथ काम शुरू कर दिया है। नगर निकायों द्वारा मुख्य मार्गों, बाजारों, बस अड्डों और औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित जल छिड़काव किया जा रहा है। एंटी-स्मॉग गन और स्प्रिंकलर का उपयोग बढ़ाया गया है ताकि सड़कों पर उड़ती धूल को कम किया जा सके। निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट लगाना, सामग्री को ढककर रखना, नियमित फॉगिंग और निरीक्षण अब सख्ती से अनिवार्य किया गया है। परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषणकारी वाहनों की चेकिंग बढ़ाई गई है और बस अड्डों पर वाहनों के इंजनों को अनावश्यक रूप से चालू रखने पर रोक लगाई गई है। कृषि विभाग गांवों में पराली न जलाने के लिए किसानों से संवाद कर रहा है, जबकि नगर निकायों द्वारा खुले में कूड़ा जलाने की घटनाओं पर सख्ती की जा रही है और सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
जिलाधिकारी ने कहा है कि हवा को स्वच्छ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। लोग अपने आसपास कूड़ा या पत्तियाँ न जलाएँ और अगर कहीं ऐसा होते देखें तो तुरंत सूचना दें। वाहन चालकों को अपने वाहनों की प्रदूषण जांच समय पर करवानी चाहिए और नियमित सर्विसिंग रखनी चाहिए। नागरिक कार-पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग करके भी प्रदूषण में कमी ला सकते हैं। घरों में सूखे पत्तों का कंपोस्ट बनाना, अपने घर-दुकान के सामने हल्का पानी छिड़ककर धूल को बैठाना और पेड़-पौधे लगाना भी प्रभावी उपाय हैं। यदि किसी निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण न मिले तो नागरिक नगर निकाय या प्रशासन को इसकी जानकारी दे सकते हैं।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने दोहराया है कि GRAP के निर्देशों का पालन अनिवार्य है और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। आने वाले दिनों में निरीक्षण और भी तेज किए जाएंगे ताकि बागपत की हवा स्वच्छ, सुरक्षित और स्वास्थ्य के अनुकूल बनी रहे।

