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अहमदाबाद:अदाणी ग्रीन ने ग्लोबल बायोडाइवर्सिटी फ्रेमवर्क अपनाकर प्रकृति संरक्षण को दी नई गति।

 

अहमदाबाद/गुजरात (एजेंसी PR 24 7)08 दिसंबर। भारत की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी, अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने अपने सस्टेनेबल डेवलपमेंटे के सफर में एक अहम् कदम उठाया है। कंपनी ने नेचर- रिलेटेड फाइनेंशियल डिस्क्लोज़र्स (टीएनएफडी) फ्रेमवर्क को अपनी पूरी कारोबार रणनीति का हिस्सा बनाया है। इस फ्रेमवर्क की मदद से किसी भी संगठन को यह समझने में आसानी होती है कि उसके कामकाज का प्रकृति और जैव विविधता पर क्या असर पड़ता है, कहाँ जोखिम हैं और कहाँ आगे बढ़ने के मौके। इससे एजीईएल की कोशिश है कि वह सिर्फ कागजी ईएसजी नियमों तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसा मॉडल अपनाए जिसमें स्वच्छ ऊर्जा के साथ-साथ पर्यावरण की सेहत का भी ध्यान रखा जाए।
वित्त वर्ष 2024 से ही एजीईएल ने अपने सभी प्रोजेक्ट्स में यह समझने का काम शुरू किया कि उनके कामकाज पर प्रकृति का क्या असर पड़ता है, कंपनी की गतिविधियों से पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ रहा है और भविष्य में क्या जोखिम और मौके हो सकते हैं। टीएनएफडी ग्रुप से औपचारिक रूप से जुड़ने से पहले ही किया गया यह कार्य दर्शाता है कि कंपनी प्रकृति से जुड़े पहलुओं को महज वर्ष के आखिर में रिपोर्ट देने तक ही सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि अपनी योजना और फैसलों का हिस्सा भी बनाना चाहती है।
एजीईएल के सीईओ आशीष खन्ना ने कहा, प्रकृति हमारी विकास की कहानी का अहम् हिस्सा है। टीएनएफडी के सिद्धांतों को अपने कामकाज में शामिल करते हुए हम ऐसे मौके तलाश रहे हैं, जिनसे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ-साथ प्राकृतिक तंत्र भी मजबूत हो। हमारी कोशिश है कि स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार प्रकृति की सुरक्षा और उसके पुनर्जीवन में भी योगदान दे। प्रकृति से जुड़े जोखिमों को सकारात्मक तरीके से समझना और संभालना लंबे समय तक कारोबार को मजबूत बनाए रखने के साथ- साथ समाज, निवेशकों और पर्यावरण के लिए स्थायी मूल्य तैयार करने के लिए बेहद जरूरी है।”
टीएनएफडी फ्रेमवर्क एक अंतर्राष्ट्रीय और विज्ञान आधारित पहल है, जिसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम वित्त पहल, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, विश्व वन्यजीव कोष और ग्लोबल कैनोपी ने मिलकर शुरू किया है। यह फ्रेमवर्क संगठनों को प्रकृति से जुड़े जोखिमों और अवसरों को पहचानने, समझने और सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करता है। टीएनएफडी के साथ जुड़कर एजीईएल ने यह दर्शाया है कि वह जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने वाली वैश्विक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे दुनियाभर की संरक्षण प्राथमिकताओं और भारत की जलवायु नेतृत्व की कोशिशों को भी मजबूती मिलती है। एजीईएल इंडिया बिज़नेस बायोडाइवर्सिटी इनिशिएटिव (आईबीबीआई और आईबीबीआई 2.0) का भी हिस्सा है। जैव विविधता को लेकर अपनी लंबे समय की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कंपनी का लक्ष्य, वर्ष 2030 तक ‘नो नेट लॉस ऑफ बायोडाइवर्सिटी’ हासिल करना है। इसके तहत एजीईएल ने अपने सभी प्रोजेक्ट क्षेत्रों में करीब 2 करोड़ 78 लाख 60 हजार पेड़ लगाने की योजना बनाई है।

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