
आरा/भोजपुर (अतुल प्रकाश)08 दिसंबर।यह वर्ष 2006 की बात है मैं और नंदकिशोर कमल जी जनहित परिवार के कार्यालय में भोजपुर महोत्सव पर चर्चा कर रहे थे इसी दौरान रामदास राही जी आ गए उनसे भिखारी ठाकुर जी पर चर्चा होने लगी हम लोगों ने उनसे पूछ दिया है कि आखिर 18 दिसंबर को भिखारी ठाकुर जयंती क्यों मनाई जाती है। इसी चर्चा में उन्होंने बताया कि भिखारी ठाकुर की जयंती उन्होंने पहली बार हिंदी महीने के अनुसार मानना आरंभ किया था। जिसके अनुसार *भिखारी ठाकुर का जन्मदिन पूस मास के सुदी पंचमी को पड़ता है। बाद में /सभानाथ पाठक जी ने अंग्रेजी महीने से गणना करके 18 दिसंबर 1887 निर्धारित किया। अब अंग्रेजी महीने के अनुसार ही मनाई जाती है।
आज रामदास राही हमारे बीच नहीं है परंतु उनके व्यक्ति तो कृतित्व हमारी स्मृतियों में व्याप्त हैं।
क्या हुआ जो 4 दिसंबर 2025 को महान पथिक रामदास रही अनंत पथकी यात्रा के लिए प्रस्थान कर चुके हैं परंतु वे उनके द्वारा भिखारी ठाकुर के लिए किए गए कार्य के लिए हमेशा याद किए जाते रहेंगे। जनहित परिवार की ओर से हमलोगों ने रामदास रही जी को अपनी जीवनी एवं संस्मरण के लिए आग्रह किया था। हम लोगों ने आश्वासन भी दिया था कि उसे हम लोग जनहित परिवार से प्रकाशित करवा देंगे। रामदास राही जी ने कहा था कि मुझे अपनी जीवनी लिखने की फुर्सत कहां है ? मैं तो आजीवन भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व और कृतित्व को प्रकाशित करने के लिए अपने आप को समर्पित कर चुका हूं। भिखारी ठाकुर की जीवनी को लोग पढ़े और याद करें, उनकी कृतियों पर चिंतन और मनन करें मेरी यही इच्छा है। मेरी जीवनी न भी रहेगी तो मुझें कोई अफसोस नहीं होगा।
अलविदा रामदास राही!
