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भारत मोटापा और मेटाबोलिक डिसऑर्डर से निपटने के लिए सबूतों पर आधारित एकीकृत दृष्टिकोण को मज़बूत कर रहा है: आयुष मंत्री

सीसीआरएएस–सीएआरआई बेंगलुरु आयुर्वेद और मोटापा और मेटाबोलिक सिंड्रोम के लिए एकीकृत तरीकों पर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन की मेजबानी करेगा।

RKTV NEWS/नई दिल्ली 30 नवंबर।आयुष मंत्रालय की केन्‍द्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) अपने केन्‍द्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्‍थान (सीएआरआई), बेंगलुरु के ज़रिए 1-2 दिसम्‍बर 2025 को ए.वी. रामा राव ऑडिटोरियम, भारतीय विज्ञान संस्‍थान (आईआईएससी), बेंगलुरु में आयुर्वेद और मोटापे और मेटाबोलिक सिंड्रोम के लिए एकीकृत तरीकों पर दो दिवसीय अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन का आयोजन कर रही है। यह सम्‍मेलन आयुष मंत्रालय के तहत एक स्‍वायत्‍तशासी संगठन, सीसीआरएएस के 57वें स्‍थापना दिवस समारोहों के साथ हो रहा है।
भारतीय विज्ञान संस्‍थान और निमहन्‍स के साथ मिलकर आयोजित किए गए इस सम्‍मेलन का उद्देश्‍य दुनिया भर में मोटापे और मेटाबोलिक सिंड्रोम के बढ़ते बोझ को सबूतों पर आधारित आयुर्वेदिक और एकीकृत चिकित्‍सा तरीकों से कम करना है। यह यह वैज्ञानिक कार्यक्रम आयुष मंत्रालय के अनुसंधान पर आधारित एकीकृत स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल को मज़बूत करने और दुनिया भर में स्‍वास्‍थ्‍य के नतीजों को बेहतर बनाने की कल्‍पना को दर्शाता है।
इस पहल की अहमियत बताते हुए, आयुष राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) और स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री, प्रतापराव जाधव ने कहा, “भारत एकीकृत स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल में अपने काम को मज़बूत कर रहा है, और आयुर्वेद इस बदलाव का केन्‍द्र है। मोटापा और मेटाबोलिक डिसऑर्डर हमारे समय की सबसे बड़ी स्‍वास्‍थ्‍य चुनौतियों में से हैं। यह सम्‍मेलन सबूतों पर आधारित तरीकों को मज़बूत करने के हमारे इरादे को दिखाती है, जो आयुर्वेद के ज्ञान को मॉडर्न मेडिकल साइंस की सख्ती के साथ जोड़ते हैं। भारत सरकार दुनिया भर में स्‍वास्‍थ्‍य के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान, नवोन्‍मेष और बहुविषयक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।”
आयुष मंत्रालय के सचिव ने ज़ोर देकर कहा, “मेटाबोलिक बीमारियों के बढ़ते बोझ के लिए मिलकर काम करने वाले, विज्ञान पर आधारित समाधान की ज़रूरत है। आयुर्वेद एक समग्र, बचाव वाला और पर्सनलाइज़्ड तरीका देता है, जो आज जैव चिकित्‍सा की प्रगति के साथ जुड़ने पर और भी ज़्यादा असरदार हो जाता है। यह सम्‍मेलन एकीकृत अनुसंधान में भारत की लीडरशिप बढ़ाने, क्लिनिकल सबूतों को मज़बूत करने और भविष्य की स्‍वास्‍थ्‍य नीति बनाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है।”
सीसीआरएएस के डायरेक्टर जनरल, डॉ. रविनारायण आचार्य ने कॉन्फ्रेंस की वैज्ञानिक अहमियत पर ज़ोर दिया और बताया, “ऐसे समय में जब मेटाबोलिक बीमारियाँ खतरनाक दर से बढ़ रही हैं, आयुर्वेद की होलिस्टिक समझ असरदार और प्रैक्टिकल समाधान देती है। यह सम्‍मेलन सबूतों पर आधारित बातचीत के ज़रिए पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को नवीनतम जैव चिकित्‍सा अनुसंधान से जोड़ने के लिए तैयार की गई है। इसके नतीजे एकीकृत देखभाल फ्रेमवर्क, ट्रांसलेशनल रिसर्च और ग्लोबल हेल्थ पॉलिसी में अहम योगदान देंगे।”
सेमिनार की यूनिट प्रमुख और आयोजन सचिव डॉ. सुखोलाचना भट्ट ने बताया कि “यह सम्‍मेलन आयुर्वेद और आधुनिक जैव चिकित्‍सा विज्ञान के जाने-माने विशेषज्ञों को मोटापे और मेटाबोलिक डिसऑर्डर की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए सबूतों पर आधारित एकीकृत तरीकों से एक साथ लाती है। उन्होंने आगे कहा कि सीसीआरएएस के रिसर्च जर्नल जेडीआरएएस का मोटापा और मेटाबोलिक डिसऑर्डर पर एक विशेष संस्‍करण, दस दूसरी किताबों के साथ, चल रही अनुसंधान की गहराई और वैज्ञानिक बातचीत और एकीकृत स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
यह कॉन्फ्रेंस भारत और विदेश से आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्‍सा, जीव विज्ञान और सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य के जाने-माने विशेषज्ञों को एक साथ लाती है। शैक्षणिक कार्यक्रम में पूर्ण सत्र, समानांतर वैज्ञानिक सत्र और टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और डिस्लिपिडेमिया के ट्रांसलेशनल साइंस और एकीकृत प्रबंधन पर एक संगोष्‍ठी शामिल है। 2 दिसम्‍बर को टीसीएस स्मार्ट-एक्‍स हब, आईआईएससी में नैनोटेक्नोलॉजी और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी पर एक स्पेशल वर्कशॉप होगी। दोनों दिन समत्वम, पथशोध और सीएआरआई द्वारा एक हेल्थ स्क्रीनिंग कैंप चलेगा। कॉन्फ्रेंस से पहले वर्चुअल साइंटिफिक बातचीत 25-27 नवम्‍बर 2025 तक हुई। कार्यक्रम के दौरान सीसीआरएएस के रिसर्च जर्नल जेडीआरएएस का मोटापा और मेटाबोलिक डिसऑर्डर पर एक विशेष संस्‍करण और 10 दूसरी किताबों का भी विमोचन होगा।
इसमें 700 से ज़्यादा प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है, जिसमें 267 मौखिक प्रस्‍तुति, 120 वर्चुअल पेपर प्रेजेंटेशन, 70 पोस्टर, और जाने-माने वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और अनुसंधानकर्ताओं के 16 मुख्‍य भाषण और सम्‍मेलन के दौरान बातचीत होगी।
आयुर्वेद, मोटापा और दिल की बीमारियों, स्‍ट्रोक और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ने के बारे में एकीकृत दृष्टिकोण पर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन, सीसीआरएएस एकीकृत अनुसंधान को आगे बढ़ाने, वैश्विक सहयोग को मज़बूत करने और सर्वांगीण और पहुंच योग्‍य स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल की भारत की कल्‍पना के साथ साक्ष्‍य आधारित नवोन्‍मेष को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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