विज्ञान भवन में विश्व हिंदी परिषद का दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन संपन्न।
नई दिल्ली/मनोज कुमार प्रसाद 28 नवंबर।पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर विश्व हिंदी परिषद और भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “राष्ट्रीयता और मानवता के प्रतीक : पंडित दीनदयाल उपाध्याय” विषय पर विज्ञान भवन, दिल्ली में दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में देश-विदेश से आए विद्वानों, भाषाविदों, दार्शनिकों, प्रशासकों, पत्रकारों, राजनेताओं एवं शोधार्थियों ने एकात्म मानववाद और राष्ट्रवादी दर्शन के विविध आयामों पर गहन विचार प्रस्तुत किए।
सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता, निवर्तमान केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय कुमार मिश्र ‘टेनी’, और भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद मिश्र उपस्थित रहे। विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मभूषण आचार्य यर्लगड्डा लक्ष्मीप्रसाद एवं परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने परिषद का परिचय और सम्मेलन का विवरण प्रस्तुत किया, जबकि सम्मेलन का विषय प्रवर्तन संयोजक प्रो. रामनारायण पटेल ने किया।विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दी पी मिश्र ने धन्यवाद एवं राष्ट्रीय समन्वयक डॉ श्रवण कुमार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का संदेश पढ़ा ।
लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने कहा कि भारत की वर्तमान सरकार दीनदयाल जी के एकात्म दर्शन को ध्येय मानकर मानवता और राष्ट्रसेवा में निरंतर आगे बढ़ रही है।
निवर्तमान केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी ने कहा कि पंडित जी को राजनीतिज्ञ से अधिक दार्शनिक के रूप में स्वीकार किया जाता है। मन–वचन–कर्म की शुद्धता को उन्होंने राजनीति की आत्मा माना और मातृभाषाओं के सम्मान हेतु गृहमंत्रालय में भारतीय भाषा विभाग की स्थापना का उल्लेख किया।विश्व हिंदी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मभूषण आचार्य यर्लगड्डा लक्ष्मीप्रसाद ने कहा:“दीनदयाल उपाध्याय वह प्रकाशस्तंभ हैं जो बताते हैं कि राष्ट्र और मानवता एक-दूसरे से अलग नहीं—बल्कि पूरक हैं। प्रो. सच्चिदानंद मिश्र ने भारत की उस महान परंपरा को रेखांकित किया जो संसार को परिवार मानती है और समता–समरसता में विश्वास रखती है।
राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार ने कहा:“यह सम्मेलन हिंदी की शक्ति और भारत की विचार-धारा की विश्व-व्यापी स्वीकृति का प्रमाण है। सोशल मीडिया और वैश्विक सहभागिता ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय विस्तार दिया है।
दूसरे दिन सम्मेलन आठ सत्रों में चला। जिनमें—एकात्म मानववाद, हिंदी का वैश्विक परिदृश्य, दीनदयाल और संस्कृति–दर्शन, हिंदी पत्रकारिता, प्रकृति और जीवन-दर्शन, तथा राष्ट्रवादी सामाजिक चिंतन जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।इस दिन 100 से अधिक शोधकर्ताओं ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जिससे सम्मेलन एक विशाल अकादमिक मंच के रूप में उभरा।
विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ राजनेता के. सी. त्यागी, राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा, पूर्व मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र प्रख्यात समाजसेवी एवं भारत सरकार के श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के हिन्दी सलाहकार डॉ वी एस चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।पूर्व मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने कहा कि सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान का संदेश स्वयं उपाध्याय जी ने दिया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी मूल भावना पर आधारित है।राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने कहा कि भाषा हृदयों को जोड़ती है और हिंदी उसी सेतु का कार्य कर रही है।पूर्व सांसद के. सी. त्यागी ने कहा कि अंग्रेज़ी के दबाव को समाप्त कर भारतीय भाषाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
इथोपिया दूतावास के प्रतिनिधि गेब्रु टेकले ने भारत को अपना “दूसरा घर” बताते हुए कहा कि हज़ारों वर्षों से इथोपिया और भारत के संबंध ज्ञान और संस्कृति पर आधारित रहे हैं।सूरीनाम की उच्चायुक्त सुनैना मोहन ने कहा कि उनके देश में आज भी भारत की भाषा, भोजन, भजन और संस्कृति जीवित है—वहाँ हिंदी और भोजपुरी बोली जाती है, श्रीरामचरितमानस का पाठ होता है।
ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान और चीन से आए वक्ताओं — मयंक जैन ,डॉ. मधु खन्ना, डॉ. मृदुल कीर्ति, डॉ. दुर्गा सिन्हा ‘उदार’, कादंबरी शंकर, डॉ. राम पूर्णिमा शर्मा, डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी — ने हिंदी के वैश्विक प्रभाव और दीनदयाल जी के सांस्कृतिक दृष्टिकोण को वर्तमान समय का मार्गदर्शक बताया।
सम्मेलन के अंतिम सत्र में हिंदी और दीनदयाल उपाध्याय पर कार्य करने वाले विशिष्ट विद्वानों, शोधकर्ताओं और संस्थाओं को विश्व हिंदी परिषद द्वारा सम्मानित किया गया।पुरस्कार वितरण में राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य यर्लगड्डा लक्ष्मीप्रसाद, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी पी मिश्र राष्ट्रीय समन्वयक श्रवण कुमार , सम्मेलन संयोजक प्रो. रामनारायण पटेल, प्रो. संध्या गर्ग, डॉ. शकुंतला सरपुरिया, प्रो. शशि रानी, डॉ. दीनदयाल, डॉ. प्रीति तोमर, डॉ. पुरुषोत्तम कुंदे, प्रो. योजना कालिया, सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
दो दिवसीय यह सम्मेलन केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय दार्शनिक परंपरा, मानवतावाद, सांस्कृतिक चेतना और भाषाई स्वाभिमान का एक विराट उत्सव सिद्ध हुआ।दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों ने एकात्म मानववाद को आधुनिक मानवता के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बताया और हिंदी को वैश्विक विमर्श की प्रमुख भाषा के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त किया।

