वाराणसी/ उत्तरप्रदेश 08 जून।कल 07 जून को वाराणासी में स्थित भारतेन्दु भवन में *डॉoभोला प्रसाद ‘आग्नेय’* की अध्यक्षता एवं *’डॉ० आदित्य कुमार अंशु’* के संचालन में *भारतेन्दु हरिश्चन्द्र* की स्मृति में कवि गोष्ठी सम्पन्न हुई। माँ सरस्वती की वंदना *श्री रमाशंकर वर्मा “मनहर’* ने प्रस्तुत किया। कु. प्रज्ञा ने अपनी ओजपूर्ण वाणी से कवयित्री कविता तिवारी की कविता :- जब तक सूरज चंदा चमके तब तक ये हिन्दुस्तान रहे” सुना कर समाज को नयी दिशा दिखाने का कार्य किया। तत्पश्चात कु० आशी वत्स ने मैथिली भाषा में – “हे जननी किये देलों एहन ज्ञान” सुना माता सरस्वती से सम्पूर्ण भारत के जन-जन को ज्ञानी बनाने का निवेदन किया। *श्री फतेह चन्द ‘बेचैन’* ने अपनी छोटी-छोटी रचनाओं से नयी ऊर्जा को संचारित किया। श्री रमाशंकर वर्मा ने अपने गीतों से गोष्ठी को रसमय बनाया तथा *डॉ० आदित्य कुमार ‘अंशु’* के – वंशी के बजमा कन्हैया माखन चोर हो” सुना कर गोष्टी को गति प्रदान किया । अध्यक्षीय काव्य पाठ करते हुए डॉ० आग्नेय ने अपनी हास्य व्यंग रचनाओं से रस परिवर्तन किया। *श्रीमती मालिनी देवी* ने “आगन की कोर पर मेरी गली के नुक्कड़ पर” सुनाकर सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। अन्त में भारतेन्दु हरिश्चन्द के प्रपौत्र *श्री दीपेश चन्द्र चौधरी* ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि- “मेरे प्रपितामह की सोच थी कि जब तक हमारे अन्दर स्वाभिमान नहीं होगा तब तक यह देश महान नहीं होगा। अतः ऋषियों मुनियों की तरह सनातनी परंपरा को कायम करते हुए भारत को विश्वगुरू आज के साहित्यकार बनावें।
previous post
