
RKTV NEWS/अजय राय 08 जून। भक्क बुड़बक पुलवा अइसेही थोड़े गिरा है। चचा जी रेल मंत्री से इस्तीफा मांगे थे, इसलिए पुलवा बमक कर जल समाधि ले लिहिस है। बेकारे में इंजीनियर को सस्पेंड किया जा रहा है। काम करने का जो मुकम्मल तरीका है, इंजीनयर साहेब उसी पर काम किये थे। जितना परसेंट तय है, उससे एको परसेंट ज्यादा नहीं लिए थे। पूरा काम सिस्टम के अनुसार हुआ था।
ई तो पुलवा का गलती है, जो बमक गया था।पुलवा से हमार बात हुआ है। कह रहीस था कि चचा जब देखो दूसरे ही से इस्तीफा मांगते रहते हैं। अपना कभी देते नहीं हैं। बिहार में मूड बनावे के चक्कर में दू-तीन सौ लुढ़क गया, तब काहे नहीं इस्तीफा दिए। पुलिसवा सब टीचरवा सब को पटना डाकबंगला चौक पर कूट रहा था, तब काहे नहीं इस्तीफा दिए। मदिरा का घरे-घरे होम डिलेवरी हो रहा है, तब काहे नहीं इस्तीफा दिए। अपना वाला देते नहीं हैं, आउर दोसरा से मांगते फिरते हैं। एही से हमार मूड खराब हो गया था और हम गंगा नदी में छलांग लगा दिए।
बताइए तो भला दुआरी-दुआरी घूम के विपक्ष को मजबूत कर रहे हैं, लेकिन पुलवा केतना मजबूत बन रहा है एकर चिंता नहीं है, तो पुलवा बमकबे न करेगा। लाडला भतीजा भैंसी का दूध पीया कि नहीं, इसका चिंता है, पुलवा कितना सीमेंट बालू पीया इसका चिंता ही नहीं है । जब देखो भतीजा के दुलार में लगे हुए हैं । पटना के राज-पाट भतीजा को सौंप कर ई दिल्ली के राज पाट संभाले के फेरा में हैं और एन्ने एगो पुल नहीं संभल रहा है। 1700 करोड़ पानी में बह गया इसका पता नहीं। दिल्ली संभालेंगे तो पता नहीं आउर कौची-कौची बहा देंगे। बड़का आये भतीजा पर भरोसा करने वाले। ओकरा पर तो क्रिकेट टीम भी भरोसा नहीं किया था, खाली पानिये पिलवाया। एको मैच नहीं खेलाया। चचा से ना पुल संभल रहा है न पियक्कड़ संभल रहा है। आ चचा कह रहे हैं कि हम तो देश संभालिए के मानेंगे।
चचा दुआरी-दुआरी घूम के समर्थन मांग रहे हैं। उड़ीसा भी गए थे। वहां पटनायक मामा कह दिए कि आगे बढ़ो खुदरा नहीं है। यही सब लूर लच्छन से पुलवा बमका हुआ था और अपनी इह लीला को समाप्त कर लिया। इसमें कौनो इंजीनियर-ठेकेदार का गलती नहीं है। ऊ सब तो अपना वाजिब परसेंटेज लेकर काम को अग्रसारित किया था।
बताइए चचा रेल मंत्री और मोदी जी से इस्तीफा मांग रहे हैं। मोदी जी तो वहां जाकर पटरी से गिट्टी उठाये। केतना फोटो खिंचाए। पटरी में नट बोल्ट ठोके, लेकिन चचा आप पुलवा के पास गए क्या? भर अंकवारी धर लेते कि ना रे बबुआ मत गिर, लेकिन आप तो ऐसा किये नहीं। पुलवा गिरने के बाद भी नहीं गए कि एकर माटी मजल का वेवस्था कर दें। श्राद्ध-ओराध कर दें, ताकि एकर आत्मा को शांति मिल जाये। पुलवा का आत्मा भटका तो आपको दिक्कत में डाल देगा।
