पावन मध्य प्रदेश!
एक नवंबर को खिला, यह पावन आदेश।
मध्य-प्रदेशी भाव से, परिचित सारा देश!
वन-उपवन व्यवहार में, हरा भरा परिवेश।
न्यारा प्यारा रूप यह , पावन मध्य प्रदेश।
हरे भरे सागौन का, गह गह यह परिवेश।
शीशम छाजन शैलजा,बूटी लतिका केश।।
सजी राजधानी सभी,अनुपम यह भोपाल।
अमृत जैसा नीर है, पावन दाता ताल।।
बैरसिया तहसील की, लगे निराली बात।
सच्चाई के देव सब, निर्भय रहती रात।।


