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केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड पहल पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

RKTV NEWS/नई दिल्ली 26 सितंबर।आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड (एटीएबी) की प्रगति और पाठ्यक्रम प्रत्यायन एवं व्यावसायिक अनुमोदन के माध्यम से आयुर्वेद के वैश्विक प्रसार हेतु इसके निरंतर प्रयासों का आकलन करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने की। इस अवसर पर सचिव वैद्य राजेश कोटेचा भी उपस्थित थे।
डॉ. वंदना सिरोहा ने बैठक के दौरान आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड की उपलब्धियों और रणनीतिक दिशा को प्रस्तुत किया, विशेष रूप से राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) अधिनियम, 2020 (पूर्व में आईएमसीसी अधिनियम, 1970) के दायरे से बाहर आयुर्वेद पाठ्यक्रमों को मान्यता देने में इसकी भूमिका और विदेशों में अभ्यास करने वाले आयुर्वेद पेशेवरों के लिए हाल ही में शुरू की गई समर्थन योजना पर ध्यान केंद्रित किया।
आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड की स्थापना आयुष मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (आरएवी) के प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत दिसंबर 2019 में जारी एक राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से की गई थी। आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड का गठन भारत और विदेशों में आयुर्वेद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को मान्यता देने के लिए किया गया था जो मौजूदा वैधानिक निकायों के अंतर्गत विनियमित नहीं हैं।
आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड ने अब तक 113 आयुर्वेद प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को मान्यता दी है जिनमें 24 भारतीय संस्थानों के 99 पाठ्यक्रम और 2 देशों के 14 अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम शामिल हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद शिक्षा के मानकीकरण और विश्वसनीयता में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड ने विदेशों में कार्यरत योग्य आयुर्वेद पेशेवरों को औपचारिक रूप से मान्यता देने के उद्देश्य से एक संरचित अनुमोदन योजना लागू की है। यह योजना सुनिश्चित करती है कि चिकित्सक कौशल, ज्ञान और नैतिक मानकों के कठोर मानदंडों को पूरा करें। इस पहल के अंतर्गत विदेशों में कार्यरत कुल 41 आयुर्वेद चिकित्सकों को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया है, जिससे मान्यता प्राप्त चिकित्सकों का एक विश्वसनीय वैश्विक नेटवर्क तैयार हुआ है।
यह अनुमोदन योजना पेशेवर वैधता को बढ़ाती है, अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलता को सुगम बनाती है और विश्वभर में आयुर्वेद को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में एकीकृत करने में सहायता करती है। यह जन विश्वास को भी सुदृढ़ करती है और शिक्षा, अनुसंधान और देश की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के प्रचार-प्रसार में वैश्विक सहयोग के अवसर प्रदान करती है।
आयुष मंत्रालय आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड जैसे संस्थागत तंत्रों के माध्यम से आयुर्वेद की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और वैश्विक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए हुए है, जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक कल्याण के एक स्तंभ के रूप में स्थापित करने के भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

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