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झारखंड में ललित कला अकादमी साहित्य अकादमी तथा संगीत नाटक अकादमी गठन की हुई घोषणा।

भोजपुरी फाउंडेशन ने झारखंड में प्रचलित विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए साहित्य अकादमी गठन की घोषणा का किया स्वागत।

RKTV NEWS/रांची(झारखंड )3 सितंबर।मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में 2 सितंबर 2025 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक मेंं झारखण्ड राज्य के पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में ललित कला और अनुप्रयुक्त कलाओं के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करने और गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा इसके माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “झारखण्ड राज्य ललित कला अकादमी “के गठन की स्वीकृति दी गई।
झारखंड मंत्रीमंडल की बैठक मेंं झारखण्ड राज्य के जनजातीय भाषाओं को छोड़कर झारखण्ड राज्य के पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में प्रयुक्त विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के बीच साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और इनके समग्र विकास के उद्देश्य से ‘झारखण्ड राज्य साहित्य अकादमी ‘के गठन की स्वीकृति दी गई। साथ ही झारखण्ड राज्य के पूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में संगीत नाटक और अनुप्रयुक्त कलाओं के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करने और गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा इसके माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “झारखण्ड राज्य संगीत नाटक अकादमी “के गठन की स्वीकृति दी गई।
भोजपुरी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ अजय ओझा ने झारखंड सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा झारखंड मंत्री परिषद को बधाई देते हुए अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि “अपने मोबाइल पर झारखंड सरकार द्वारा ललित कला अकादमी साहित्य अकादमी तथा झारखंड राज्य संगीत नाटक अकादमी गठन के निर्णय संबंधित विज्ञप्ति को पाते ही मन प्रसन्नता से झूम उठा। अभी मैं कुछ व्यक्तिगत व्यस्तता की वजह से पटना में हूं, नहीं तो हम तत्काल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर उनके इस ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित निर्णय के लिए उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए उनका अभिनंदन करते। बहरहाल भोजपुरी फाउंडेशन अति शीघ्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से मिलकर उनका सम्मान करेगा।
डॉ ओझा ने अपने पोस्ट में आगे लिखते हुए बताया कि दरअसल बिहार से अलग होते ही तत्काल ललित कला अकादमी, साहित्य अकादमी तथा संगीत नाटक अकादमी का गठन हो जाना चाहिए था। स्व रामदयाल मुंडा का भी यही सपना था कि एक छत के नीचे सभी अकादमियों का दफ्तर होना चाहिए ताकि झारखण्डी साहित्य कला संस्कृति का संरक्षण, संवर्धन और प्रचार प्रसार हो सके। भोजपुरी फाउंडेशन भी अपने स्थापना काल से ही उपरोक्त अकादमियों के गठन के लिए संघर्षरत रहा है। हम लगातार झारखंड के दिसोम गुरु आदरणीय स्व शिबू सोरेन जी, झारखंड की तत्कालीन राज्यपाल और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवीर दास से मिलकर झारखंड में इन अकादमियों के गठन की मांग करते रहे। लेकिन यह स्वप्न अब जाकर साकार हुआ है।
भोजपुरी फाउंडेशन इस महति निर्णय के लिए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के साथ साथ समस्त मंत्रीमंडल का धन्यवाद करता है। झारखंड में संथाली, मुंडारी, कुड़ूख, हो, खड़िया आदि जनजातीय भाषाओं के अलावा नागपुरी, खोरठा, भोजपुरी, मगही, मैथिली तथा अंगिका, पंचपरगनिया कुरमाली, उड़िया तथा बंग्ला आदि विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं। साहित्य अकादमी का गठन होने से इन भाषाओं का सार्वभौमिक विकास होगा और विविध भाषा संस्कृति को समेटे झारखंड का भी वैश्विक स्तर पर पहचान सुनिश्चित होगा।
डॉ अजय ओझा ने बताया कि अति शीघ्र भोजपुरी फाउंडेशन का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर उन्हें इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए उनका स्वागत तथा अभिनंदन करेगा।

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