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बागपत:जिलाधिकारी अस्मिता लाल की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक हुई सम्पन्न।

आयुष्मान भारत योजना में बागपत प्रदेश के शीर्ष तीन जिलों में शामिल, अब तक 92 करोड़ से अधिक का निःशुल्क इलाज।
टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 व 18008914416 के प्रचार-प्रसार पर जोर।
पीसीपीएनडीटी समन्वयक राकेश कुमार की सेवा समाप्त, नियमविरुद्ध कार्य पर कार्रवाई।
सभी स्वास्थ्य इकाइयों में शालीन व्यवहार और पारदर्शिता पर जोर।

RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)27 अगस्त। जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी अस्मिता लाल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग की तमाम योजनाओं एवं कार्यक्रमों की बिंदुवार समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य संदेश यह रहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है। जिलाधिकारी ने कहा कि “स्वास्थ्य सेवाएँ सीधे जनता की जीवनरेखा से जुड़ी हैं, इसलिए इसमें ढिलाई करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें दंड भुगतना होगा।”
बैठक में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जनपद बागपत प्रदेश के शीर्ष तीन जिलों में शामिल है, जो इस योजना के तहत सर्वाधिक लाभार्थियों को लाभ पहुँचा रहा है। जिले का लक्ष्य 5,19,107 है, जिसके सापेक्ष अब तक 3,76,738 लाभार्थियों ने योजना का लाभ उठाया है। परिवार स्तर पर देखें तो 97,933 लाभार्थी परिवारों में से 90,121 परिवारों में कम से कम एक सदस्य का कार्ड बन चुका है। इस उपलब्धि के आधार पर बागपत प्रदेश में पाँचवें स्थान पर है। अब तक जिले के लाभार्थियों को इस योजना के अंतर्गत 92.16 करोड़ रुपये से अधिक का निःशुल्क इलाज मिला है। जिले के 27 अस्पताल (सरकारी और निजी) इस योजना से पंजीकृत हैं। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि 70 वर्ष से अधिक आयु वाले वृद्धजनों के कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाया जाए, ताकि वे भी समय से योजना का लाभ उठा सकें।
कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जनपद में फिलहाल 38 कुष्ठ रोगी चिन्हित हैं। इनके उपचार और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए एएनएम और आशा कार्यकर्ता निरंतर कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मानव संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए रिक्त पदों की सूचना राज्य स्तर पर भेजी गई है। जुलाई माह में इस कार्यक्रम के तहत 1693 मरीजों की ओपीडी में जाँच हुई। जिले में कुल 13 शिविर आयोजित किए गए जिनमें वृद्धाश्रम, जिला कारागार और विकलांग बोर्ड जैसे संस्थान शामिल रहे।
जिलाधिकारी ने टेली-मानस कार्यक्रम को अधिक से अधिक प्रचारित करने पर बल दिया। इसके अंतर्गत हेल्पलाइन नंबर 14416, राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1800-891-4416 और स्थानीय हेल्पलाइन 8505809611 के बारे में जन-जन को जागरूक करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जानकारी दी गई कि पिछले माह जिन आशा कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्त हुई थी, उनके स्थान पर नई आशाओं के चयन की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। चयनित आशाओं का प्रशिक्षण 5 सितम्बर से आरंभ होगा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आशाओं के कार्य का नियमित मूल्यांकन हो, और जो कार्यकत्री परिवार नियोजन एवं नसबंदी कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगी, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। इसके विपरीत जो आशाएँ लापरवाही करेंगी, उन्हें नोटिस दिया जाएगा। जननी सुरक्षा योजना में ‘ड्रॉप बैक’ लाभार्थियों की प्रगति को सुधारने पर विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े सभी कार्यक्रमों में पारदर्शिता और गंभीरता बनाए रखी जाए।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा में बताया गया कि लक्ष्य 343 के अनुरूप जिले के सभी विद्यालयों एवं आंगनबाड़ियों का भ्रमण कर लिया गया है। चिन्हित बच्चों का इलाज भी संचालित है। अब तक 1042 बच्चों को चिन्हित कर आगे उपचार हेतु रेफर किया गया है। बैठक में एसएनसीयू (विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। यहाँ मृत्यु के दो मामलों पर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
परिवार कल्याण कार्यक्रम की समीक्षा में बताया गया कि जुलाई 2025 तक पुरुष नसबंदी का लक्ष्य 60 था, जिसके सापेक्ष 28 ही पूरे हुए। महिला नसबंदी का लक्ष्य 527 था, जिसके सापेक्ष 467 पूरे हुए। जिलाधिकारी ने इस दिशा में प्रचार-प्रसार बढ़ाने और लक्ष्य हासिल करने की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि बागपत और बिनौली विकासखंड में नसबंदी लक्ष्यों को पार करने पर प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने टीवीग्रस्थित मरीजों को पोषण पोटली दी।
आरसीएच पोर्टल पर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पंजीकरण की स्थिति की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों का पंजीकरण लक्ष्य 13,208 के सापेक्ष 13,300 यानी 101 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जो उल्लेखनीय उपलब्धि है। माताओं के पंजीकरण में छपरौली विकासखंड की धीमी प्रगति पर चिंता जताई गई और इसे तेज करने के निर्देश दिए गए। जुलाई 2025 में मलेरिया जाँच का लक्ष्य 10,861 था, जबकि 7,962 जाँच ही हो सकीं। हालांकि जाँच दर में सुधार हुआ है और यह 65 प्रतिशत से बढ़कर 73 प्रतिशत तक पहुँच गई है। जिलाधिकारी ने इस प्रगति को और बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि जुलाई माह में चार नेत्र शिविर लगाए गए, जिनमें 246 लोगों की नेत्र जाँच हुई और 26 लोगों को मोतियाबिंद ऑपरेशन हेतु चिन्हित किया गया। वार्षिक लक्ष्य 16,204 के सापेक्ष अब तक 5401 ऑपरेशन हो चुके हैं। अकेले जुलाई माह में ही 1883 ऑपरेशन किए गए। इसके अतिरिक्त 8 से 14 वर्ष आयु वर्ग के 2605 बच्चों की नेत्र जाँच की गई, जिनमें से 158 में दृष्टि दोष पाया गया। सभी को निःशुल्क चश्मे प्रदान किए गए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जिला संयुक्त चिकित्सालय, 6 बीपीएचयू एवं 3 नॉन-बीपीएचयू स्वास्थ्य इकाइयों को निदान सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 1 करोड़ 15 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि उपकरणों और सुविधाओं को उन्नत करने में खर्च की जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पीसीपीएनडीटी के जिला समन्वयक राकेश कुमार को नियमविरुद्ध कार्य करने एवं लापरवाही बरतने के चलते संविदा सेवा से मुक्त किया जाए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी स्वास्थ्य इकाइयाँ पूरी तरह से सुचारू रूप से संचालित हों। मरीजों के साथ व्यवहार शालीन और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए। किसी भी डॉक्टर को बाहर से दवाएँ लिखने की अनुमति नहीं होगी। सीएमओ को निर्देश दिए गए कि हर सप्ताह समीक्षा करें, बच्चों का टीकाकरण समय पर सुनिश्चित कराएँ, सीएचसी और पीएचसी में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। एक्सपायर दवाओं को स्टोर से तुरंत हटाया जाए और अनुपयोगी वस्तुओं के निस्तारण की कार्यवाही समय पर की जाए।
जिला संयुक्त चिकित्सालय व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रंग-कोडित बेडशीट व्यवस्था लागू करने का भी निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत प्रत्येक दिन के लिए अलग रंग की बेडशीट होगी और उसका चार्ट अस्पताल में स्पष्ट रूप से चस्पा किया जाएगा। साथ ही ओपीडी स्लिप में बच्चों का आधार नंबर माँगने पर रोक लगा दी गई।
बैठक का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि स्वास्थ्य विभाग का प्रत्येक कर्मचारी और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाए। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि “स्वस्थ जनपद ही विकसित जनपद का आधार है। यदि हर स्तर पर गंभीरता, अनुशासन और पारदर्शिता अपनाई जाएगी तो बागपत निश्चित ही राज्य के सर्वश्रेष्ठ जिलों में गिना जाएगा।”
इस अवसर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ तीरथ लाल, एसीएमओ डॉक्टर दीपा सिंह ,डिप्टी सीएमओ यशवीर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एमएस मलिक वरिष्ठ कोषाधिकारी मनीष कुमार सिंह व अन्य स्वास्थ्यकर्मी, आदि उपस्थित रहे।

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