
RKTV NEWS/गोरखपुर(उत्तर प्रदेश)28 जुलाई।विगत रविवार को ” श्री दीप साहित्यक सेवा संस्थान गोरखपुर ” द्वारा संचालित संस्था “देव दीप साहित्यिक संगम” द्वारा आयोजित द्वितीय मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन श्री विश्वकर्मा सेवा समिति वशारतपुर गोरखपुर मे इंडक्शन बैंक के प्रबंधक मनीष मिश्र की अध्यक्षता एवं विजय प्रताप शाही एवं बिंदु चौहान एवं अनुरीता अवध मुंबई के विशिष्ट अतिथित्व मे सम्पन्न हुआ।
काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ भगवान विश्वकर्मा एवं माँ सरस्वती को अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा पुष्पांजलि अर्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ!
सरस्वती वंदना बिंदु चौहान द्वारा प्रस्तुत किया गया। भारतेन्दु सिंह द्वारा अपनी भाव पूर्ण प्रस्तुति किया गया। राम सुधार सिंह ने कोरोना के हालात पर अपनी रचना प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया!
गाज़ीपुर से पधारे ख्याति लब्ध कवि पटखनीया जी ने भगवान विश्कर्मा की वंदना से वातावरण को भक्तिमय बनाते हुए एवं आत्मीय बोध को आकर्षित किया।
आचार्य कृष्ण शर्मा द्वारा भगवान विश्वकर्मा का आवाहन करते हुए अपनी प्रस्तुति शिक्षक को समर्पित प्रस्तुत कर श्रोताओं को आत्मविभोर किया गया। इंजीनियर दानिका प्रसाद ने सावन विषय पर अपनी भाव पूर्ण प्रस्तुति से स्रोताओ को अंतर्मन से स्पंदित किया। श्रोता अभिभूत हो करते रहे वाह वाह। वीरेंद्र मिश्र विरही ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए साहित्य के भ्रातृत्व का आवाहन अपील करते हुए सावन पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं का मन
मोह लिया। श्रोताओं के करतल ध्वनि से पूरा हॉल गूंज रहा था – लाजवाब लाजवाब लाजवाब… गोरखपुर कि प्रसिद्ध विदुषी कवियत्री वंदना ने अपनी मधुर स्वर से भजन – आदत बुरी सुधार लो हो गया भजन से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। श्रोता भावविभोर चिल्ला रहे थे – शानदार शानदार शानदार।
विशिष्ट अतिथि विजय प्रताप शाही ने अपनी प्रथम सहभागिता में ही राष्ट्र रक्षा हेतु नभ जो जल गया कारगिल शहीदों को समर्पित ने श्रोताओं का मन मोह लिया। श्रोता एक स्वर बोल उठे क़्या बात क़्या बात क्या बात। श्री दीप साहित्यिक संस्थान के संस्थापक दिनेश गोरखपुरी द्वारा स्वरचित कर्मफल की चौपाइयों एवं भजन से श्रोताओं को मन्त्र मुग्ध कर दिया। श्रोता गण बरबस बोल उठे शाबाश शाबाश। बिंदु जी ने अपनी प्रस्तुति लिखना ही है तो आसमानी लिखो मर रहा आँखों का पानी लिखो से श्रोताओं को झकझोर कर जागृत करते हुए वर्तमान पर सोचने को विवश कर कर दिया। श्रोता बोल उठे नायाब नायाब नायाब।कार्यक्रम का संचालन नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर ने किया।
उक्त अवसर पर साक्षा काव्य पुस्तक भी वितरित किया गया।
अन्त में संस्था के अध्यक्ष दिनेश गोरखपुरी ने सबको धन्यवाद दे कर कार्यक्रम समाप्त किया।
