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बिहार:कैग रिपोर्ट में नीतीश सरकार की नाकामी उजागर , राज्य में संस्थाबद्ध भ्रष्टाचार और गरीबी का दुष्चक्र जारी: धीरेंद्र झा

सदन में मंत्री ने दिया झूठा वक्तव्य, 2.9 करोड़ हैं केवल रजिस्टर्ड प्रवासी मजदूर।

RKTV NEWS/पटना(बिहार )25 जुलाई।खेगरामस के महासचिव धीरेंद्र झा ने कहा कि भारत सरकार के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) द्वारा वर्ष 2023–24 के लिए जारी रिपोर्ट ने बिहार सरकार की कार्यप्रणाली और तथाकथित विकास मॉडल की असलियत को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं और राज्य में संस्थाबद्ध भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता तथा आर्थिक कुप्रबंधन की गंभीर तस्वीर सामने लाते हैं।
उन्होंने कहा कि कल सदन के अंदर मंत्री विजय कुमार चौधरी द्वारा यह कहना कि बिहार के महज 26 लाख मजदूर राज्य से बाहर है, सरासर झूठ है. खुद केंद्र सरकार के श्रम विभाग ने स्वीकार किया है कि 2.9 करोड़ बिहार के लोग देश के दूसरे राज्यों में मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे और सेवा तंत्र में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं – 2019–20 में यह 21.66% था, जो 2023–24 में मात्र 22.30% रहा।
राज्य सरकार बजट का केवल 80% खर्च कर पाई – ₹3.26 लाख करोड़ के कुल बजट में ₹2.61 लाख करोड़ ही खर्च हुआ।
49649 करोड़ रुपये का उपयोगिता प्रमाणपत्र महालेखाकार कार्यालय में जमा नहीं किया गया, जो संस्थागत भ्रष्टाचार का स्पष्ट संकेत है।
SC/ST Sub Plan की राशि का सही ढंग से कानून नहीं रहने के कारण दुरुपयोग – यहां तक कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की यात्राओं पर इस मद से राशि खर्च की गई।
राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा (3.5%) से अधिक होकर 4.17% पर पहुंच गया – राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे बड़ी राशि ब्याज भुगतान में खर्च हो रही है।
अनुपूरक बजट की अनावश्यकता उजागर ,कई मामलों में मूल बजटीय व्यय ही पूरा नहीं हो सका।
यह भी उल्लेखनीय है कि:प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार आज देश में 33वें स्थान पर है, जबकि 1990 के दशक में यह 28वें स्थान पर था।
राज्य के 34% परिवार महा–गरीबी में जीवन जी रहे हैं।
सरकार द्वारा सामाजिक न्याय और गरीबी उन्मूलन पर ध्यान घटा है, जिससे गरीब तबके दुष्चक्र से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और टिकाऊपन हमेशा संदेह के घेरे में रहते हैं, और विकास योजनाओं में लूट आम बात बन गई है।
महागठबंधन सरकार द्वारा पूर्व में जारी सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट ने बिहार के व्यापक अविकास और सामाजिक विषमता को उजागर किया था। लेकिन उस दिशा में ठोस नीति अपनाने की बजाय नीतीश कुमार ने पुनः पलटी मारकर जन–विरोधी शक्तियों से हाथ मिला लिया।
उन्होंने कहा की बिहार की जनता अब सच जान चुकी है। बदलाव की आवश्यकता अब केवल नारा नहीं, जन–आवाज बन चुकी है। इंडिया गठबंधन सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और गरीबी उन्मूलन के लिए संकल्पबद्ध है।बिहार को एक नये विकासपथ की ज़रूरत है और वह रास्ता यहीं से निकलता है।

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