RK TV News
खबरें
Breaking Newsधार्मिक

जगत के गुरु भगवान श्री कृष्ण है :जीयर स्वामी जी महाराज

RKTV NEWS/पीरो (भोजपुर)11 जुलाई।गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भारत के महान मनीषी संत श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के शिष्य श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज ने गुरु चरण वंदना किया। श्री स्वामी जी ने पूज्य गुरुदेव त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के एक पुराने भजन का गायन कर गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर पूरे विधि विधान के साथ आचार्यों के द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूजा किया गया।
स्वामी जी ने गुरु पूर्णिमा का मतलब समझाते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा व्यास जी के जन्म जयंती के रूप में मनाई जाती है। वैसे गुरु पूर्णिमा के दिन सभी लोगों के द्वारा अपने गुरु की वंदना की जाती है। मनुष्य जीवन में गुरु का महत्व सबसे ज्यादा है। हर व्यक्ति के जीवन में एक गुरु जरूर होना चाहिए।
रविशंकर तिवारी ने बताया कि स्वामी जी ने कहा कि जिन्होंने गुरु नहीं बनाया है। जिनके गुरु नहीं है वह भी परमात्मा भगवान श्री कृष्ण को ही गुरु मान ले।
क्योंकि पूरे जगत के एकमात्र गुरु भगवान श्री कृष्ण ही है। हम गुरु के रूप में व्यास जी का भी जयंती मना सकते हैं। वह भी संसार के गुरु हैं। इस प्रकार से गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु के महत्व पर स्वामी जी ने मार्गदर्शन दिए।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर चातुर्मास्य व्रत स्थल परमानपुर में नई सड़क का उद्घाटन हुआ।

परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल के समीप सरकारी श्री त्रिदंडी स्वामी डिग्री कॉलेज का निर्माण कार्य भी चल रहा है। इस कॉलेज पर पहुंचने के लिए नई सड़क का भी निर्माण हुआ है। जिसका नाम श्री त्रिदंडी देव डिग्री कॉलेज परमानंद नगर रखा गया है। इस सड़क का निर्माण शाहाबाद के एमएलसी राधा चरण शाह के द्वारा कराया गया हैं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज के उपस्थिति में नई सड़क का उद्घाटन श्री राधा चरण सेठ शाह जी के द्वारा किया गया।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़ सहित कई प्रदेशों से लगभग 50 हजार से ज्यादा भक्त श्रद्धालु स्वामी जी का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किए।
स्वामी जी के द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भोज भंडारा प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई थी। जिसमें परमानपुर सहित आसपास के तमाम गांव सहित बिहार एवं अन्य प्रदेशों से आए हुए सभी श्रद्धालु भक्त प्रसाद ग्रहण किए।
स्वामी जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि भक्ति के पुत्र ज्ञान वैराग्य कैसे स्वस्थ हो उसके लिए नारद जी के द्वारा लगातार भ्रमण किया गया। नारद जी अपने आप में परम तपस्वी ऋषि थे। लेकिन नारद जी अपने तप साधना की पूरी शक्ति लगाने के बाद भी भक्ति देवी के पुत्र ज्ञान और बैराग्य को ठीक नहीं कर पाए।
कल की कथा को आगे बढ़ाते हुए स्वामी जी ने कहा कि नारद जी ने भक्ति देवी से पूछा माता जी आप ही बता दीजिए कि आपके पुत्र ज्ञान और बैराग्य कैसे ठीक होंगे। भक्ति देवी ने कहा नारद जी यह सत्कर्म से ही ठीक हो सकते हैं। नारद जी सोचे कि सत्कर्म का मतलब अच्छा कर्म इत्यादि करना होता है। नारद जी के द्वारा कई वेद पुराण इत्यादि को सुनाया गया। फिर भी भक्ति के पुत्र ज्ञान और बैराग्य ठीक नहीं हुए। जिसके बाद नारद जी पुन: भक्ति देवी से पूछे। माता जी क्या किया जाए कैसे ठीक होंगे। भक्ति देवी बोली कि सत्कर्म से ही यह ठीक हो सकते हैं। नारद जी जो पूरे दुनिया के सबसे बड़े मीडिया के काम करने वाले थे। उनको भी सत्कर्म कैसे किया जाए क्या किया जाए समझ में नहीं आ रहा था। वे लगातार कई ऋषि महर्षि से पूछ रहे थे। सत्कर्म क्या होता है। सत्कर्म कैसे किया जाता है। कई लोग नारद जी से बोले। महाराज आप ऋषि और तपस्वी हैं। आप सत्कर्म के बारे में पूछ रहे हैं। आप स्वयं नहीं जानते हैं कि सत्कर्म क्या होता है। कैसे किया जाता है। लगातार नारद जी मन ही मन सोच रहे थे। आखिर सत्कार कैसे किया जाए।
भक्ति के पुत्र ज्ञान और वैराग्य दक्षिण भारत के तमिलनाडु क्षेत्र में जब थे। तब तक पूरी तरह से स्वस्थ थे। लेकिन जैसे ही यह लोग गुजरात प्रदेश में पहुंचे। उसके बाद भक्ति देवी के पुत्र ज्ञान और बैराग्य अस्वस्थ हो गए। जिसके बाद तीनों लोग वहां से वृंदावन आ गये। वृंदावन आने के बाद भी भक्ति के पुत्र ज्ञान और बैराग्य ठीक नहीं हुए। यहीं पर नारद जी से भी भेंट हो गई। जिसके बाद नारद जी हरि के द्वार हरिद्वार पहुंचे
हरिद्वार को कहा जाता है कि भगवान के धाम पहुंचने का द्वार हरिद्वार है। जहां से भगवान श्रीमन नारायण के धाम को पहुंचा जाता है।
हरिद्वार से आगे जितना भी क्षेत्र है। उसे देव लोक कहा जाता है। क्योंकि भगवान की भूमि देवलोक को कहा जाता है। जहां पर गंगोत्री यमुनोत्री केदारनाथ बद्री नारायण के साथ कई धार्मिक स्थान मौजूद है। उन्हीं क्षेत्रों को देवभूमि कहा जाता है।
साक्षात भगवान श्रीमन नारायण जो बद्री नारायण के नाम से जाने जाते हैं। उनके धाम जाने के लिए द्वार हरिद्वार से शुरू होता है।
नारद जी वहीं देवभूमि पर पहुंचे हैं। जहां पर भगवान श्रीमन नारायण वास करते हैं। इधर राजा परीक्षित को श्राप लगा था। जिससे मुक्ति पाने के लिए सूकदेव जी के द्वारा श्रीमद् भागवत कथा श्रवण कराया जा रहा था। जहां पर सौनक ऋषि सूत जी के संवाद के दौरान भक्ति देवी के पुत्र ज्ञान और बैराग्य की चर्चा की जा रही थी। इसी प्रसंग अंतर्गत नारद जी भी भक्ति देवी के पुत्र ज्ञान और बैराग्य के अस्वस्थ होने के कारण का निवारण कैसे हो उसके लिए प्रयास कर रहे थे। जिसके लिए देवभूमि में नारद जी आए हुए थे। जहां पर श्रीमद् भागवत कथा सुनाई जा रही थी। वहीं से नारद जी भक्ति देवी के पुत्र ज्ञान और वैराग्य को भी श्रीमद् भागवत कथा निमित्त संकल्प लेकर सुन रहे थे। जिसके कारण ज्ञान और बैराग्य स्वस्थ होकर वृंदावन से देवभूमि पहुंच गए।
श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने मात्र से ही भक्ति के पुत्र ज्ञान और बैराग्य अस्वस्थ से स्‍वस्‍थ हो गए। ऐसे श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने से कलयुग में मानव का उद्धार होता है।

Related posts

दैनिक पञ्चांग: 02 मार्च 24

rktvnews

भोजपुर: डीएम के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी, जगदीशपुर ने किया दावा पंचायत स्थित पंचायत सरकार भवन का निरीक्षण।

rktvnews

भोजपुर:भाजपा-जदयू की डबल इंजन सरकार ने छीन लिए जल-जंगल-जमीन पर से जनता के अधिकार – राजेश सहनी

rktvnews

सारण:जिला पदाधिकारी के द्वारा लोक शिकायत के 15 मामलों की सुनवाई करते हुए समाधान किया गया।

rktvnews

भोजपुर: आरा में “ज्ञान का सौदागर” नुक्कड़ नाटक की हुई प्रस्तुति।

rktvnews

भोजपुर:सीबीएससी माघ मेला में दिखा शिक्षा, विज्ञान, कला-संस्कृति का संगम।

rktvnews

Leave a Comment