भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर आयोजित भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान द्वारा कार्यक्रम में की शिरकत।

भोजपुरी भाषा को सरकारी मान्यता दिलाने के साथ और सशक्त बनाने पर दिया बल।

भिखारी ठाकुर ने भोजपुरी लोक कला के माध्यम से समाज सुधार में दिया महत्वपूर्ण योगदान: रणधीर राणा
RKTV NEWS/आरा ( भोजपुर)10 जुलाई।जमाने के हर दौर में लोककला की उपयोगिता प्रासंगिक रही है।जनता के हितों को लेकर की गई इसकी शुरूआत अब बाजार का भी एक सशक्त माध्यम बनती जा रही है।उक्त बातों का संबोधन आज माले के जिला कार्यालय सचिव दिलराज प्रीतम ने लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर स्थानीय पटेल बस पड़ाव में भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान द्वारा उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक मंच के परिसर में स्थापित की गई भिखारी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
दिलराज प्रीतम ने गुलामी के दौर में लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की रचनाओं को सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ शुरू किए सांस्कृतिक आंदोलन का कारगर हथियार बताया। साथ ही वर्तमान समय में लोक कला को और समृद्ध करने की आवश्यक्ता बताई। उन्होंने भोजपुरी भाषा को सरकारी मान्यता दिलाने से लेकर उसे और सशक्त बनाने की जरूरत पर बल दिया । दिलराज प्रीतम के साथ कार्यक्रम में शामिल हो रणधीर राणा ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने भोजपुरी लोक कला के माध्यम से समाज सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने नाटकों और गीतों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों, जैसे-नारी उत्पीड़न,गरीबी, और जातिवाद पर प्रहार किया।उन्होंने भोजपुरी भाषा और संस्कृति को समृद्ध किया और लोकगीतों के माध्यम से समाज को जागरूक किया। कार्यक्रम में दिलराज प्रीतम के साथ मुख्य रूप से विजय सिंह, कृष्णा यादव,रणधीर राणा समेत कई अन्य शामिल हुए।

