आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 13 मई। समलैंगिकता जैसे समसामयिक मुद्दों पर एक विचार मंथन का आयोजन स्थानीय ग्रैंड होटल में हुआ। इसमें सभी पंथ, संप्रदाय तथा बौद्धिक विचार के लोग उपस्थित रहे और अपने विचारों को रखा जिसे प्रेस वार्ता के द्वारा सबको बताया गया। प्रमुख लोगों में सूर्य मोहन सिंह, प्रोफेसर एस एन सहाय, संजीव कुमार उपाध्याय अधिवक्ता ,अहमद हुसैन ,सोनू नर्वदेश्वर सिंह आकाश उर्फ अंथोनी,डा दिनेश आदि रहे जो मंचासिन रहे और अपनी बातों को सामाजिक, पारिवारिक और राष्ट्र हित में रखकर बताया की
समलैंगिकता हम सबों के लिए हितकारी नहीं है।कथित बौद्धिक लोगों ने अपनी बुद्धि की क्षमता दिखाते हुए संवैधानिक मान्यता के लिए पहल भी की है और बहुत कुछ हद तक सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे मान्यता दी है लेकिन इससे ना तो सामाजिक न्याय हो पाएगा ना प्राकृतिक न्याय बल्कि यह कुछ लोगों की मानसिक विकृतियों, सांस्कृतिक बर्बादी के लिए व्याकुल है।
शादी की संवैधानिक मान्यता तो है लेकिन उसके लिए वयस्क लड़का लड़की होना चाहिए। शादी संतति बढ़ाने का भी एक उचित माध्यम भी है। समलैंगिक शादी से सामाजिक पवित्र रिश्ता भी तार तार हो जायेगा , मां, भाई,बहन,मामा,चाचा आदि शब्द का क्या मतलब रहेगा।एक तरफ कम उम्र से शादी, बहुपत्नी प्रथा,अलग कानून और दूसरी तरफ लोकतंत्र की दुहाई, आरक्षण,जातीय विद्वेष सामाजिक ताना बाना को बर्बाद कर देंगे। जरूरत है आम लोगों को जागरूक होने की, राष्ट्रीय हित में बात करना और काम करना आवश्यक है। तभी भारत की एकता ,अखंडता और प्राचीन गौरव प्राप्त होगा और विश्व गुरु बनेगा।

