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भोजपुर:सभी को मर्यादा में रहना चहिए:जीयर स्वामी

पर्यावरण की शुद्धि के लिए यज्ञ जरूरी: जीयर स्वामी

संत दर्शन और यज्ञ करने से ही मानव का कल्याण संभव : जीयर स्‍वामी जी महाराज

RKTV NEWS/पीरो (भोजपुर)08 जुलाई।परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज ने प्रवचन करते हुए संत दर्शन और यज्ञ की महत्व को समझाया। संत जो माया से दूर रहता है। जिसे संसार की हर वस्तु सामान्य दिखाई पड़ता है। जिसमें अपने पराए का भेदभाव नहीं होता है। वही संत है। कभी-कभी लोग संत को भी दुनिया की माया से ग्रसित समझते हैं। लेकिन संत किसी से भेदभाव नहीं करते हैं। लेकिन संत की भी एक मर्यादा होती है। जिस प्रकार से सरकार के द्वारा किसी भी जिले की देखरेख करने के लिए जिला अधिकारी की नियुक्ति की जाती है। जिसके देखरेख और निर्देशन में ही पूरे जिले में किसी भी प्रकार की कार्यक्रम या कार्य होता है। इस प्रकार से संत महात्मा के पास भी कार्य करने के लिए मर्यादा निर्धारित होती है। उसे तो सभी को स्वीकार ही करना चाहिए। एक उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने कहा जैसे मेरे साथ आरती में ब्रह्मचारी जी रहते हैं। यह भी एक मर्यादा है। अब पंडाल में बैठे हजारों लोग यह कहने लगे कि हम भी ब्रह्मचारी जी की जगह पर आपके साथ आरती में सम्मिलित होंगे तो क्या संत की जो मर्यादा है, वह रह पाएगी। इसीलिए मर्यादा को सभी लोगों को समझना चाहिए। संत किसी से भेदभाव नहीं करते हैं। बल्कि मर्यादा से अपनी व्यवस्था को व्यवस्थित करते हैं।
स्वामी जी ने कहा की सतयुग में लोग तपस्या करते थे। जिससे उनका कल्याण होता था। त्रेता युग में लोग ऋषि-महर्षि यज्ञ आदि करके साधना पूजा करके जीवन को कृतार्थ करते थे। स्वामी जी ने कहा कि द्वापर युग में लोग भगवान के नाम का संकीर्तन, पूजा, पाठ, यज्ञ आदि करके ऋषि महर्षि भगवान की आराधना करते थे।
यज्ञ आज से नहीं बल्कि कई हजार वर्ष पहले से ही ऋषि महर्षि करते आ रहे हैं। इतिहास पुराण रामायण रामचरितमानस में त्रेता युग में जब राम जी का अवतार हुआ था। उस समय भी ऋषि महर्षि यज्ञ करते थे। जिनके यज्ञों को राक्षसों के द्वारा पूरा नहीं होने दिया जाता था। उस समय भी भगवान श्री राम जी के द्वारा विश्वामित्र मुनि के यज्ञ को राक्षसों को मार करके पूरा करवाया गया था।
इतिहास पुराण के अनुसार यज्ञ की महत्ता तो है ही उसके साथ-साथ विज्ञान के अनुसार भी यज्ञ को समझा जाए तो अनेक फायदे दिखाई पड़ते हैं।
आज प्रकृति में कई प्रकार के विषाणु कीड़े मकोड़े इत्यादि उत्पन्न हो रहे हैं। जिसके लिए सरकार द्वारा धुएं इत्यादि कीटाणुओं से मानव जीवन की रक्षा के लिए कई प्रकार के उपाय किए जा रहे हैं। प्रकृति वायुमंडल में फैले इन कीटाणुओं कीड़े मकोड़े को खत्म करने के लिए भी यज्ञ इत्यादि का महत्व बहुत ही ज्यादा है। यज्ञ में जो आहुति दी जाती है। जिससे निकालने वाले जो धुएं होते हैं। उससे वायुमंडल में फैले विषाक्त पदार्थ जीव इत्यादि समाप्त हो जाते हैं। जिससे मानव जीवन का कल्याण होता है
यज्ञ में आहुति कई दिनों तक लगातार अग्नि में घी, तील, चावल इत्यादि से होती जाती है। जिससे जो धुआं निकलता है, वह धुआं जितने दूर में फैलता है। उतना दूर का जो क्षेत्र होता है उस क्षेत्र में फैले अनेकों प्रकार के कीटाणु समाप्त हो जाते हैं। जिससे प्रकृति का एक सुंदर स्वरूप दिखाई पड़ता है। ओजोन में जो छिद्र हो गया हैं, सूर्य में आज कुछ अलग प्रकार के थोड़े बहुत रंग दिखाई पड़ते हैं। उसको भरने के लिए भी यज्ञ इत्यादि का महत्व बहुत ज्यादा है।
स्वामी जी ने कहा कुछ लोग ऐतिहासिक पौराणिक महत्व को नहीं मानते हैं। आप यज्ञ को दूसरे तरीके से भी समझ सकते हैं। आज जब-जब चुनाव होता है तो नेता जनता से कहते हैं कि हम आपके लिए रोजगार की व्यवस्था करेंगे। जहां पर भी यज्ञ होता है। वहां पर भी तो रोजगार की व्यवस्था होती है। जहां पर हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। दुकानदार, टेंट वाले, माइक वाले, लाइट वाले, गाड़ी वाले, खाना बनाने वाले एवं अन्य कई प्रकार के रोजगार का सृजन होता है। जिससे कितने लोगों के रोजगार की व्यवस्था की जाती है। यदि आप कुछ भी नहीं मानते हैं तो भी रोजगार सृजन को तो आप जरूर मानते होंगे। इसीलिए जब यज्ञ, ज्ञान, प्रवचन इत्यादि होता है तो उससे कहीं ना कहीं प्रकृति वायुमंडल सहित पृथ्वी तथा पृथ्वी पर वास करने वाले लोगों का ही कल्याण होता है।
यज्ञ का महत्व केवल इतना ही नहीं है। बल्कि जहां पर यज्ञ होता है वहां हजारों लाखों की संख्या में लोग ज्ञान शिक्षा समाज में रहने की जीवन शैली भी सिखाते हैं। जिससे मानव जीवन का कल्याण होता है। आज लोगों का रहन-सहन, आचरण, खान पान, व्‍यवहार सब कुछ बिगड़ गया है। जिससे समाज में कई प्रकार की कुरीतियां बढ़ रही है। आज बच्चे अपने माता-पिता बड़ों का आदर सम्मान नहीं कर रहे हैं। बच्चों में गलत भोजन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। समाज में हिंसा बढ़ चुका है। लूट डकैती चोरी इत्यादि की घटनाएं बढ़ गई हैं। इन पर भी यदि लगाम लगाने का कोई एकमात्र सबसे बड़ा साधन है तो वह यज्ञ है। क्योंकि यज्ञ में समाज, संस्कृति, सभ्यता, ज्ञान, समरसता, मानव जीवन जीने की कला का उपदेश दिया जाता है। जिससे हजारों लोगों में यदि 50, 100 लोग भी अपने जीवन शैली को सही तरीके से जीने लगते हैं तो यह यज्ञ से बहुत बड़ा बदलाव है। इस तरीके से यदि 50-50 लोगों के ही जीवन को सही रास्ते पर यज्ञ के माध्यम से परिवर्तित किया जाता है तो समाज में बढ़ रही है नकारात्मक विचार, नकारात्मक रहन-सहन, नकारात्मक जीवन शैली, नकारात्मक सोच को धीरे-धीरे खत्म किया जा सकता है।
सरकार के द्वारा लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार, विवाद, चोरी, डकैती, मारपीट की घटनाओं के लिए कई प्रकार के कानून बनाए जाते हैं। पुलिस लगातार कंट्रोल करने की प्रयास करती है। लेकिन एक अपराधी पकड़ा जाता है। तब तक दूसरा अपराधी निकल जाता है। लेकिन यज्ञ इत्यादि के द्वारा एक व्यक्ति के जीवन को बदल दिया जाता है तो उसके घर के या उस व्यक्ति के साथ रहने वाले कई लोगों के जीवन में बदलाव आता है। इसीलिए संत समागम संत इत्यादि के द्वारा किए गए यज्ञ के लाभ फायदे पर यदि विस्तार से चर्चा किया जाए तो इसकी महत्व अनंत है। जिसकी कोई सीमा नहीं है।

संत दर्शन के महत्व

सबसे पहले संत का मतलब समझते हैं। संत वह है जिनके आचरण रहन-सहन जीवन शैली विचार उनके मार्गदर्शन ज्ञान उपदेश साधना तपस्या से जो तेज प्रकाशित होता है। उसे संत कहते हैं। संत का मतलब सब कुछ होने के बाद भी अपने जीवन को त्याग के साथ जीना सभी लोगों के साथ समानता रखना मानव जीवन को सुधारने के लिए उपदेश देना इत्यादि होता है। संत वह नहीं है जो केवल अपना वस्त्र बदल लिए हैं। जिनका आचरण समाज के हित में नहीं है। जो अपने स्वरूप को बार-बार बदलते रहते हैं। कभी गृहस्त आश्रम में चले जाते हैं कभी सन्यास आश्रम को अपना लेते हैं। संत और संन्यासी वही हैं जिनका संकल्प अटल हैं। जिन्होंने अपने जीवन को भगवान श्रीमन नारायण के चरणों में समर्पित कर दिया है। जो रात दिन लगतार भगवान के चिंतन में लगे रहते हैं। जिन्हें इस दुनिया के लोगों के लिए बेहतर मार्ग दिखाने की चिंता तो रहती है। लेकिन जो अपने को बराबर उन परमात्मा से जोड़कर के रखते हैं वही संत हैं।
स्वामी जी ने कहा एक बार नारद जी भगवान श्रीमन नारायण से पूछे भगवान संत का मतलब क्या होता है। भगवान श्रीमन नारायण ने कहा नारद जी जाइए एक रोड पर वहां पर एक सांप होगा उसी से पूछिएगा, वही बताएगा। नारद जी वहां पर पहुंचे तब तक एक गाड़ी से सांप कुचलकर समाप्त हो गया। जैसे ही नारद जी ने अपने सवालों को वहां पर रखा तब तक यह घटना घट गई। इसके बाद नारद जी वापस लौट आए भगवान को यह घटना बताए। इसके बाद नारद जी फिर भगवान जी से वही सवाल पूछे। फिर एक बार भगवान ने कहा जाइए उस गांव में एक गाय ने बछड़े को जन्म दिया है। उससे पूछिएगा वही बछड़ा आपको सवाल का जवाब देगा।
नारद जी वहां पर गए जैसे ही अपना सवाल उस बछड़े से पूछे। तब तक बछड़ा भी मृत्यु को प्राप्त हो गया। नारद जी मन ही मन बहुत ही परेशान हो रहे थे। यह क्या हो रहा है। वापस लौटकर भगवान के पास आए फिर से वही बात भगवान से दोहरा रहे हैं। भगवान जी ने कहा नारद जी जाइए गांव में एक बच्चे का जन्म हुआ है। वह छोटा सा बालक आपके सवालों का जवाब देगा। नारद जी उस गांव में पहुंचे जहां पर बच्चे का जन्म हुआ था। जा करके फिर से उस बच्चे के सामने यही सवाल दोहराए संत दर्शन का क्या मतलब होता है क्या महत्व होता है तब तक बच्चा भी मृत्यु को प्राप्त हो गया।
नारद जी दुखी होकर फिर वापस लौट गए नारद जी ने भगवान श्रीमन नारायण से पूछा भगवान बार-बार आप मुझे क्यों परेशान कर रहे हैं। आप ही बता दीजिए कि संत दर्शन का क्या महत्व होता है। भगवान ने कहा नारद अभी तक आपको समझ में नहीं आया। संत दर्शन का बहुत बड़ा महत्व होता है। जिससे सब कुछ बदल जाता है। ठीक है नारद हम तुमको बताते हैं। संत दर्शन का क्या महत्व है। पहले जन्म में जो सर्प था। जिसकी आयु हजारों वर्ष होती है। तुम्हारे दर्शन मात्र से उसका कल्याण हो गया। वहीं सर्प दूसरे जन्म में बछड़ा बना फिर से नारद जी आपके दर्शन मात्र से वह बछड़ा को भी मुक्ति मिल गया। इसके बाद तीसरी जन्म में मानव योनि का शरीर प्राप्त किया। जैसे ही आप फिर से अपना दर्शन उस बालक को दिए उस बालक का इस संसार से मोक्ष हो गया। यही संत दर्शन का सबसे बड़ा महत्व है। जिससे लंबे समय तक सर्प योनि में भटकने वाला जीव भी मोक्ष की प्राप्ति कर लिया। नारद जी आप इतने बड़े महान संत हैं। जिसके दर्शन मात्र से ही जीवन चक्र से मुक्ति मिल गई।

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